ईको-फ्रेंडली Ganeshotsav

गणेशोत्सव के मौके पर हर साल पुणे की नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। किसी जमाने में शहर की शान कही जाने वाली मुला-मुठा नदियां आस्था के चलते आज दम तोडऩे की कगार पर पहुंच चुकी हैं। हालांकि प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों द्वारा की जा रही जनजागृति के चलते अब शहरवासी पर्यावरण के बारे में सोचने लगे हैं। इस बार Ganeshotsav में ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग पिछले साल के मुकाबलेbappa काफी अधिक रही। सामान्य मूर्तियों से कीमत ज्यादा होने के बावजूद लोगों ने मिट्टी से बनी मूर्तियों को तवज्जो दी। इतना ही नहीं प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विभिन्न घाटों पर आने वाले श्रृद्धालुओं की संख्या भी इस बार अपेक्षाकृत कुछ कम रही। डेढ़ दिन और पांच दिनों के गणपति का विसर्जन हो चुका है। प्रारंभिक तौर पर जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके मुताबिक भक्तों ने नदियों के बजाए घर या सोसाटियों में बनाए गए कुंडों में विर्सजन को प्राभमिकता दी। महानगर पालिका द्वारा भी हर साल इस तरह की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। पिछले साल हुई ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की बिक्री को देखते हुए विक्रेताओं ने इस बार ज्यादा मूर्तियां बनवाईं थीं, मगर डिमांड के चलते वो भी कम पड़ गईं। पिंपरी-चिंचवड़ के मूर्ति विक्रेता मनोहर काले ने कहा, इस बार बुकिंग के शुरुआती दिनों में ही 90-100 ईको-फ्रेंडली मूर्तियों के ऑर्डर मिल गए थे। जो पिछली साल के मुकाबले ज्यादा है। मिट्टी की मूर्तियों के टूटने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए हम ज्यादा नहीं बनवाते, पर पिछले गणेशोत्सव की डिमांड को देखते हुए इस बार अधिक ईको-फ्रेंडली मूर्तियां बनवाई थीं। लेकिन भी कम पड़ गईं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की डिलेवरी के लिए हमें इस बार अलग व्यवस्था करनी पड़ी। शहर के मुख्य बाजार लक्ष्मी रोड के विक्रताओं के यहां भी ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग अधिक रही। एक विक्रेता ने कहा, शाडू़ (मिट्टी) की मूर्तियां वैसे भी महंगी होती हैं, इस बार तो महंगाई के चलते उनके दाम और भी ज्यादा थे। गत गणेशोत्सव में जिस छोटी मूर्ति की कीमत 500 से 700 रुपए थी, वो इस बार 1000 से 1200 रुपए में बिकी। इसके बाद भी अधिकांश लोगा शाड़ू की मूर्तियां ही ले गए। इसके अलावा कई गणेश मंडलों ने भी इस बार ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार करवाई हैं। वहीं, कुछ मंडलों ने फैसला किया है वे प्रतिमा की प्रतिकृति का ही विसर्जन करेंगे, ताकि नदियों में प्रदूषण न हो।

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