पर्रिकर के GOA में भाजपा से नाराज हैं लोग!

अब जब गोवा (GOA) सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है, तो ये बात काफी मायने रखती है कि मनोहर पर्रिकर के गोवा में भाजपा को लेकर गुस्सा है। संभव है कि 4 फरवरी को होने वाले मतदान में यह गुस्सा किसी बड़े उलटफेर की कहानी लिख जाए। गोवा की आधे से ज्यादा आबादी पर्यटन पर निर्भर है और नोटबंदी के चलते उसकी आमदनी पर करारी चोट हुई है। भाजपा के लिए मुसीबत यह है कि नोटबंदी के साइड इफेक्ट समाप्त होने से पहले ही राज्य में चुनावी बिगुल बज गया है। कुछ स्थानीय नेता मानते हैं कि यदि चुनाव साल के अंत तक होते तो ज्यादा बेहतर होता।

गड़बड़ाएगा गणित
नोटबंदी को केंद्रीय स्तर पर भले ही बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा हो, लेकिन राज्य में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ता अच्छे से जानते हैं कि जनता को परेशानी तो हुई है। और इस परेशानी का बदला लेने का मौका उसे कुछ जल्दी मिल गया GOAहै। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 40 में से 22 सीटें अपने नाम की थी और इस जीत में उत्तरी गोवा का काफी योगदान था, लेकिन इस बार उसका गणित गड़बड़ा सकता है। क्योंकि यहां भाजपा को लेकर असंतोष का माहौल है। आज का खबरी ने जब गोवा वासियों का दिल टटोलने की कोशिश तो एक बड़े वर्ग में भगवा पार्टी के प्रति गुस्सा साफ तौर पर नजर आया। फिर भले ही वे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग हों, मछुआरे या फिर टैक्सी ड्राइवर।

कुछ असर तो होना चाहिए
कैंडोलियम निवासी जॉर्ज भाजपा समर्थक रहे हैं, उनके घर के वोट कभी किसी दूसरी पार्टी को नहीं गए, मगर इस बार वो आम आदमी पार्टी का साथ देने का मन बना चुके हैं। जॉर्ज कहते हैं, बात केवल डिमॉनिटाइज़ेशन की नहीं है, कई मुद्दे पर जिन पर मौजूदा सरकार नाकामयाब रही। लिहाजा इस बार दूसरे विकल्प को आजमाना मैं बेहतर समझूंगा। जॉर्ज की तरह रफीक भी भाजपा से नाराज हैं, हालांकि उनकी नाराजगी पूरी तरह से नोटबंदी तक सीमित है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े रफीक कहते हैं, नोटबंदी का जितना असर हम पर हुआ है, उसका कुछ प्रतिशत तो भाजपा पर होना ही चाहिए। मेरा वोट भाजपा को नहीं जाएगा, ये पक्का है। जॉर्ज और रफीक की तरह उत्तरी गोवा में अनगिनत लोग हैं, जिनका भाजपा से मोहभंग हो चुका है।

कई और भी हैं वजह
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग जहां नोटबंदी जैसे फैसलों के चलते भाजपा से नाराज हैं, तो आम जनता राज्य सरकार की वादाखिलाफी से नाराज है। इसमें सबसे प्रमुख है मंडोवी नदी पर तैरते कैसीनो, सत्ता में आने से पहले भाजपा ने कहा था कि वो इन्हें यहां से दूर ले जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अंग्रेजी की अपेक्षा स्थानीय भाषाओं को तवज्जो न देने को लेकर भी पार्टी की आलोचना हो रही है।

Leave a Reply