सॉरी Shaktimaan : कमजोर है कानून, कैसे दिलाएं इंसाफ?

Shaktimaan  को अपाहिज बनाने वाले नेताजी को गिरफ्तार तो कर लिया गया है, लेकिन उन्हें इस हैवानियत की सजा मिलेगी इसकी संभावना बेहद कम है। अगर उन्हें दोषी पाया भी जाता है तो महज 50 रुपए जुर्माना भरकर वो फिर किसी को बैसाखी थमाने के लिए बाहर निकल आएंगे। इसकी वजह है कमजोर कानून। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 में सालों से कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इसके तहत Shaktimaan दोषी पाए जाने पर अधिकतम सजा का प्रावधान भी महज 50 से 100 रुपए तक है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेजुबान जानवरों के प्रति हमारी सरकार और राजनीतिक पार्टियां कितनी संजीदा हैं। अधिनियम की धारा 11 (1)(ए) से लेकर (ओ) तक पहली बार कुसूरवार ठहराए गए व्यक्ति पर कम से कम 10 और अधिकतम 50 रुपए तक जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर न्यूनतम 25 और अधिकतम 100 रुपए जुर्माना या 3 माह कैद का प्रावधान है। इसके चलते बेजुबानों के अधिकारों के लिए लडऩे वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गौर करने वाली बात ये भी है कि इस अधिनियम के तहत अब तक शायद ही किसी को सजा सुनाई गई हो।

पुलिस नहीं जानती कानून
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम कमजोर तो है ही, साथ ही इसके बारे में लोगों को जानकारी भी नहीं है। आम जनता ही नहीं पुलिस भी इसे लेकर गफलत में रहती है। पीपुल्स फॉर एनीमल्स (पीएफए) की पुणे इकाई के अध्यक्ष मनोज ओसवाल कहते हैं, अधिकतर पुलिसकर्मी कानून से वाकिफ नहीं हैं। आमतौर पर पुलिस ऐसे मामलों को टालने की कोशिश करती है, जब तक पीछे न पड़ो केस दर्ज नहीं होता।

आईपीसी का सहारा
जानवरों के लिए काम करने वाली संस्थाओं को दोषियों को सजा दिलवाने के लिए आईपीसी की धारा 428, 429 का सहारा लेना पड़ता है। इसके तहत जानवरों को जहर देने, मारने आदि पर एक साल तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे ही बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 72 और 73 भी इस मामले में कारगर है। पहले इन धाराओं में मामला दर्ज करवाया जाता है, फिर अधिनियम की धाराएं लगवाई जाती हैं।

Shaktimaan क्या कहता है कानून
मारना, सवारी करना, जरूरत से ज्यादा सामान लादना, किसी तरह का कष्ट पहुंचाना। कमजोर या बीमार जानवर से काम करना, उनके पैर बांधना। जानवर को छोटे पिंजरे में कैद करना, या मोटी चेन से बांधना। मालिक द्वारा अपने पालतू जानवर को पर्याप्त खाना-पानी नहीं देना आदि दंडनीय अपराध है।

काम के घंटे तय
अधिनियम में ट्रांसपोर्ट के काम में इस्तेमाल किए जाने वाले जानवरों के लिए कार्य के घ्ंाटे निर्धारित किए गए हैं। कानून कहता है, ऐसे इलाके जहां तापमान 37 डिग्री से ऊपर हो, वहां जानवरों से दोपहर 12 से 3 बजे तक बोझा नहीं उठवाया जा सकता। लगातार पांच घंटे तक बिना किसी ब्रेक के भी काम नहीं लिया जा सकता। इसी तरह पूरे दिन 9 घंटे से ज्यादा काम प्रतिबंधित है।

…और सजा: इन सभी अपराधों के लिए दोषी पाए जाने पर महज 50 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

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