स्टेशन परिसर में चलता है जुआ

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पुणे रेल मंडल जुआरियों के लिए स्वर्ग बनता जा रहा है। बीते दिनों जुए के लेनदेन को लेकर यार्ड में हुए जानलेवा हमले के
बाद भी रेल प्रशासन द्वारा इस बारे में कुछ खास नहीं किया गया, उल्टा मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शाम ढलते ही रेलवे परिसर में जुआरियों का जमावड़ा लग जाता है, इसमें रेल कर्मचारी, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) और गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) जवानों के साथ-साथ बाहर के जुआरी भी शामिल होते हैं। पुणे स्टेशन के पार्सल गेट के अंदर जहां आरपीएफ के मंडल सुरक्षा आयुक्त का कार्यालय है वहां से कुछ ही दूरी पर जुए की बाजियां लगाई जाती हैं, शेड के नीचे हर रोज लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। सूत्र बताते हैं कि रेलवे क्वॉट्र्स से अवैध व्यापार संचालित करने वाले रेलकर्मियों द्वारा ही वरिष्ठ अधिकारियों की छत्रछाया में जुए का ये कारोबार चलाया जा रहा है। रेल परिसर में पुलिस की कार्रवाई का किसी तरह का भय नहीं रहता, इसलिए जुआरी बेधडक़ यहां अपनी किस्मत आजमाने आ जाते हैं। जानकारी के अनुसार पैसों के लेनदेन को लेकर छोटा-मोटा विवाद यहां अक्सर होता रहता है। चूंकि आरपीएफ और जीआरपी का भी इस गैरकानूनी कारोबार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सहयोग रहता है, लिहाजा मामला सामने आने से पहले ही दबा दिया जाता है। रेलकर्मी अनिल गायकवाड़ और उसके साथियों द्वारा की गई मारपीट का मामला भी इसलिए सामने आया क्योंकि पीडि़त को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सबका हिस्सा
एक जवान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात 8 से 9 के बीच ही जुआ शुरू हो जाता है। पुणे स्टेशन के अलावा खडक़ी, शिवाजीनगर और दूसरे छोटे स्टेशनों पर भी रात के अंधेरे में जुआरी सक्रिय रहते हैं। आरपीएफ और जीआरपी दोनों को इसकी जानकारी रहती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता, क्योंकि इस अवैध कारोबार से जो कमाई होती है उसमें सबका हिस्सा होता है। जवान के मुताबिक ज्यादातर गोदाम, यार्ड और बंद पड़े केबिन में जुआ खेला जाता है। चिंचवड़ के सेंट्रल केबिन में चलने वाला जुआ रविवार को बंद रहता है।

फिर शुरू हुआ धंधा
कई दिनों तक पुणे स्टेशन से गायब रहे अनधिकृत हॉकर फिर से सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार हॉकरों के मुखिया और कुछ अधिकारियों में चल रहा विवाद लंबी कोशिशों के बाद सुलझ गया है, अब हॉकर पहले की ही तरह प्लेटफॉर्म नंबर दो से 6 तक सामान बेच सकते हैं। ताड़ीवाला रोड स्थित रेलवे कॉलोनी से अवैध व्यापार संचालित किया जाता है। अनधिकृत हॉकर बकायदा सिर पर सामान रखकर रेल अधिकारियों के घर के सामने से प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर दाखिल होते हैं। हॉकरों पर कार्रवाई के अधिकार रेलवे के कमर्शियल विभाग से लेकर आरपीएफ तक के पास हैं, लेकिन हर कोई जिम्मेदारी दूसरों पर डालकर खुद को पाकसाफ बताता रहता है। गौरतलब है कि लोकमत समाचार के लगातार खुलासे और किंग कोबरा नामक संगठन के प्रदर्शन के बाद स्टेशन से अनधिकृत हॉकर पूरी तरह से गायब हो गए थे। तभी से सुलह का दौरा जारी था, जो हाल ही में खत्म हुआ है।

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