महा हड़ताल से जुड़ी 10 बातें

बेहतर वेतन और नई श्रमिक एवं निवेश नीतियों के विरोध में ट्रेड यूनियन आज हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के चलते पूरा देश एक तरह से थम गया है। कई हिस्सों में हड़ताल का व्यापक असर नजर आ रहा है। बैंकिंग, टेलीकॉम सहित अन्य क्षेत्रों के लाखों कर्मचारियों के काम बंद करने से आम जनता के साथ साथ सरकारों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आइए नजर डालते हैं इस महाबंद से जुड़ी 10 बातों परः

  1. Strikeबैंक, सरकारी कार्यालय और फैक्टरियां भी बंद में शामिल हैं। हालांकि कई बैंकों की ऑफिसर यूनियन ने इस हड़ताल से दूरी बनाए रखी है। महाबंद में कुछ राज्यों के स्थानीय संगठनों के शामिल होने से सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक असर पड़ा है।
  2. रेडियोलॉजिस्ट और सरकारी अस्पतालों की नर्सें भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा कर चुकी हैं। इसके मद्देनजर अस्पतालों में व्यवस्था चरमराने की आशंका है।
  3. कोल इंडिया के कर्मचारियों से इस हड़ताल में भाग लेने से सरकार मुश्किल में पड़ गई है। हालांकि उसका दावा है कि अगले 50 से 60 दिनों का स्टॉक होने से पावर प्लांट प्रभावित नहीं होंगे।
  4. हड़ताल में शामिल संगठन बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों को शिथिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने के सरकारी फैसले पर भी इन्हें आपत्ति है।
  5. मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार ने निजीकरण और कुछ कंपनियों को बंद करके 55,907 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार द्वारा संचालित 77 कंपनियों का घाटा बढ़कर 26, 700 करोड़ रुपए पहुंच गया है। ऐसे में सरकार इन्हें बंद करने का मन बना चुकी है।
  6. हड़ताल खत्म करने की कोशिशों के तहत वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों को पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। मगर ट्रेड यूनियनों को वित्तमंत्री का यह आश्वासन पसंद नहीं आया।
  7. कुछ दिन पहले सरकार ने अकुशल मजदूरों का भत्ता 246 से बढ़ाकर 350 रुपए करने का ऐलान किया था। सरकार ने दावा किया था कि ये प्रस्ताव मिनिमम वेज एडवाइजरी बोर्ड की उस बैठक में पेश किया गया था, जिसका हिस्सा ट्रेड यूनियन भी हैं। हालांकि यूनियनों का कहना है कि बैठक में ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई। उनकी मांग अब भी 692 रुपए रोजाना है। इस 279 रुपए के अंतर के चलते ही हड़ताल को इतना भारी समर्थन मिल रहा है।
  8. ट्रेड यूनियनों का कहना है कि वो सरकारी पेंशन फंड और स्टॉक मार्केट में अधिक पैसा लगाने के सरकार के दिशा निर्देशों का भी लगातार विरोध करती रहेंगी।
  9. हड़ताल की वजह से कई राज्यों में सरकारी और निजी स्कूल एवं कॉलेज भी पूरी तरह बंद रहे। सार्वजनिक यातायात प्रभावित होने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
  10. इस महाहड़ताल में संघ से संम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ शामिल नहीं है। उसने पहले ही खुद को इससे दूर रखने का ऐलान कर दिया था।

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