बाप्पा ने बचाईं नदियां

यूं तो पुणे के गणेशोत्सव में हर साल कुछ नया देखने को मिलता है, लेकिन पर्यावरण के लिहाज से इस बार काफी कुछ ऐसा देखने को मिला जिसकी कल्पना खुद प्रशासन ने भी नहीं की थी। तकरीबन 1.95 लाख गणेश प्रतिमाओं का नदियों के बजाए महानगर पालिका (मनपा) द्वारा तैयार किए गए टैंकों में विसर्जन किया गया। ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है20150927_182620। सबसे ज्यादा अच्छी बात ये रही कि टैंकों में विसर्जन के लिए कुछ बड़े मंडल भी आगे आए, जिसमें कसबा गणपति मंडल प्रमुख है। इसके लिए मेयर दत्तात्रय धनकवड़े की तरफ से कसबा गणपति मंडल के अध्यक्ष श्रीकांत शेटे का सम्मान भी किया गया। आमतौर पर बड़े मंडल टैंकों में विसर्जन को धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध करते रहे हैं। कसबा गणपति मंडल के पहल करने से माना जा रहा है कि आने वाले सालों में बाकी मंडल भी इस राह पर चल सकते हैं। मनपा की तरफ से नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए विसर्जन घाटों पर टैंक बनाए जाते हैं, ताकि लोग सीधे नदियों में प्रतिमांए विसर्जित न करें। इस साल मानसून की बेरुखी के चलते राज्य के कई हिस्सों में सूखे का खतरा मंडरा रहा है। पुणे को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए मनपा की तरफ से बड़े पैमाने पर शहरवासियों से नदियों में गणेश idols विसर्जिन न करने की अपील की गई थी, जिसे लोगों ने हाथों-हाथ लिया। सामान्य तौर पर हर साल प्रशासन की तरफ से विसर्जन के लिए 120 से 130 टैंकों की व्यवस्था कराई जाती है, मगर इस बार 182 टैंक बनाए गए। लोगों को आकर्षित करने के लिए इन टैंकों पर पर्यावरण से जुड़े संदेश भी लिखे गए थे। मनपा अधिकारियों को खुद इस बात की उम्मीद नहीं थी कि उनकी अपील को इतना अच्छा रिस्पांस मिलेगा। तकरीबन हर घाट पर गणेश भक्तों को कृत्रिम टैंकों में विसर्जन करते देखा गया, लोग बाकायदा लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने से भी पीछे नहीं हटे। कई हाउसिंग सोसाइटियों की तरफ से कैम्पस में ही विसर्जन के इंतजाम किए गए थे। इसके अलावा ईको-फ्रेंडली प्रतिमा चुनने वालों ने घर पर ही विसर्जन को प्राथमिकता दी, जिसके चलते घाटों पर जुटने वाली भीड़ इस बार अपेक्षाकृत कुछ कम नजर आई। शहरवासियों की तरफ से मिले इस रिस्पॉस से पर्यावरण प्रेमियों में भी खुशी का माहौल है। गौरतलब है कि मुला-मूठा जैसी शहर की प्रमुख नदियां प्रदूषण की वजह से दम तोडऩे के कगार पर पहुंच गई हैं। सरकारी स्तर पर नदियों का पुराना स्वरूप लौटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लोग इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते।

लाखों मूर्तियां दान
गणेश भक्तों ने 20150927_182603नदियों में विसर्जन के बजाए इस बार पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ मनपा बड़ी संख्या में मूर्तियां दान दीं। पुणे में जहां ये संख्या 20,075 रही वहीं पिंपरी-चिंचवड़ में 20,794 गणेश प्रतिमाएं दान की गईं। विसर्जन घाटों पर मनपा कर्मचारी तैनात किए गए थे, जो दान की गई मूर्तियों को तुरंत ट्रकों में भरकर ले जा रहे थे। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ दोनों ही जगह इस बार दान में मिलने वाली प्रतिमाओं का आंकड़ा पिछले साल से ज्यादा है।

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