गाय यूपी में माता तो असम में क्यों नहीं?

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के बाद से गौ संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. योगी जहां अवैध बूचड़खानों पर ताले लटका रहे हैं, वहीं उनकी देखा-देखी अन्य भाजपाई मुख्यमंत्रियों ने भी इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है. गुजरात में तो गौ हत्या पर आजीवन कैद का प्रावधान किया गया है. हिंदू धर्म में गाय को पूजा जाता है, इसलिए योगी और बाकी मुख्यमंत्रियों के फैसलों की बड़े पैमाने पर सराहना हो रही है. लेकिन एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर असम में ऐसी कोई हलचल क्यों दिखाई नहीं दे रही? असम में फ़िलहाल भाजपा सरकार है और एक हिंदू पार्टी होने के लिहाज से भाजपा गौ संरक्षण की cowहिमायती रही है. लिहाजा गाय को जिस नज़र से यूपी या दूसरे भाजपा शासित राज्यों में देखा जा रहा है उसी नज़र से असम में भी देखा जाना चाहिए. ये सब जानते हैं कि गायों की असम के रास्ते बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर तस्करी होती है, साथ ही वहां कई अवैध बूचड़खाने भी संचालित हैं जहां हर रोज़ गायों को कटा जाता है.

55 हजार से एक लाख तक
असम के शिवसागर और करीमगंज जैसे इलाकों से गायों को ट्रक में लादकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक ले जाया जाता है और वहां से उनकी बांग्लादेश में एंट्री होती है. इंडिया टुडे के मुताबिक, असम में एक स्वस्थ गाय को औसतन 55,000 रुपए में बेचा जाता है. जबकि बांग्लादेश में बीफ की ज़बर्दस्त मांग के चलते इसकी कीमत दो गुनी हो जाती है. यानी एक गाय एक लाख से ज्यादा की बिकती है.

मुनाफे की मिलीभगत
गायों को सड़क या नदी के रस्ते असम से बांग्लादेश ले जाया जाता है. जायज सी बात है कि ये काम बिना सरकारी मशीनरी की मिलीभगत के मुमकिन नहीं हो सकता. गायों की तस्करी का ये रैकेट कितना बड़ा है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैसों का लेन-देन हवाला के ज़रिये होता है. इंडिया टुडे ने अपने ख़ास अभियान में इसका खुलासा भी किया था.

एक गाय = 200 किलो मांस
एक ट्रक में 20 से 25 गायों को भरकर असम से बांग्लादेश ले जाया जाता है और वहां महंगे दामों में बेचा जाता है. एक गाय से औसतन 200 किलो मांस मिलता है. बांग्लादेश में गाय के मांस की काफी डिमांड है, इस डिमांड को पूरा करने के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों से तस्कर गायों को पहले असम लेकर आते हैं और फिर वहां से अगरतला के रस्ते पड़ोसी मुल्क में भेज दिया जाता है.

असम पर चोट ज़रूरी
जानकार मानते हैं कि अगर गायों की अवैध तस्करी को रोकना है तो असम पर चोट करना ज़रूरी है. यूपी या दूसरे राज्यों में गाय को नहीं काटा जाएगा, लेकिन उन्हें असम तो भेजा ही जा सकता है. तस्करों की पुलिस से घनिष्टता किसी से छुपी नहीं है, ऐसे में उनके लिए गायों की तस्करी मुश्किल ज़रूर होगी लेकिन असंभव नहीं. अगर असम में इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाती है तो तस्करों की कमर टूट जाएगी. राज्य और केंद्र दोनों में भाजपा की सरकार है, और यदि वो चाहे तो उसके लिए यह मुमकिन है

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