अपने ही कर रहे योगी की अनदेखी!

महीनों के सूखे के बाद जब बारिश की बूंदें धरती पर पड़ती हैं, तो दम तोड़ रहे शरीर में भी एक नई चेतना जग जाती है. उत्तर प्रदेश में भी आजकल कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है, हालांकि चेतना का रूप थोड़ा जुदा है. लंबे इंतज़ार के बाद सत्ता का स्वाद चख रहे भाजपाई इतने मदमस्त हो गए हैं कि खुद मुख्यमंत्री की हिदायतों को नज़रंदाज़ कर रहे हैं. यूपी में कानून व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है और इसी को आधार बनाकर भाजपा सत्ता में आई है. कुर्सी संभालने के पहले दिन से ही योगी आदित्यनाथ ने साफ़ कर दिया था कि अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं पर इसका कोई असर नहीं है या फिर शायद वे अपने कृत्यों को अराजकता की श्रेणी से बाहर समझते हैं. मेरठ में बीते दिनों पार्टी नेता संजय त्यागी और उनके समर्थकों ने पुलिस थाने पर जमकर हंगामा किया, ये हंगामा अगर किसी पीड़ित को न्याय दिलाने को लेकर होता तो समझा जा सकता था. मगर नेताजी ने कानून तोड़ने वाले अपने बेटे के पक्ष में पूरा थाना सिरपर उठा लिया.

yogiरोका तो दी धमकी
आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि नेता और उनके समर्थकों ने कुछ पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट भी की. पुलिस की गलती बस इतनी थी कि उसने सख्त मुख्यमंत्री के राज में सख्ती बरतते हुए गाड़ी पर काली फिल्म और हूटर लगाने के लिए नेताजी के बेटे का चालान काट दिया. मेरठ के नगर पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी के मुताबिक जब पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोकी तो नेता का बेटा धमकी देने लगा. जब उसे थाने चलने को कहा तो उसने फ़ोन करने अपने पिता को बुला लिया.

कुछ नहीं सुना
गोरखपुर में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने चर्च में प्रार्थना को यह कहकर रुकवा दिया कि वहां धर्मांतरण हो रहा है. पुलिस के ऐसी किसी घटना से इंकार करने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना नहीं होने दी. इसके अलावा कई जगहों पर पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी देखने को मिली. गौर करने वाली बात यह है कि सरकार में होने के बावजूद कुछ भाजपा नेता पुलिस पर पुरानी सरकार का हमदर्द होने का आरोप लगाकर उससे उलझ रहे हैं.

क्या फर्क रह जाएगा
समाजवादी पार्टी भाजपा पर कानून व्यवस्था दुरुस्त करने में नाकाम होने का आरोप लगा रही है, लेकिन इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. नई सरकार को व्यवस्था समझने और उसे अपने हिसाब से पटरी पर लाने में वक़्त लगता है और योगी को तो अभी एक महीना भी नहीं हुआ है. हालांकि भगवा चोले में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वालों पर लगाम लगाने के लिए योगी को कुछ ज़रूर करना होगा. यदि भाजपा नेता और कार्यकर्ता ऐसे ही बवाल मचाते रहेंगे तो फिर सपा और पार्टी विद द डिफरेंस कहलाने वाली भाजपा में क्या फर्क रह जाएगा.

ये तस्वीर बदलनी है
सपा सरकार के दौरान पार्टी नेता ने एक पुलिसकर्मी को सरेआम महज इसलिए थप्पड़ मार दिया था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा था. अदालत ने ताजमहल के एक निश्चित दायरे से आगे वाहन ले जाने पर पाबंदी लगाई हुई है. जब नेताजी अपनी गाड़ी लेकर आगे जाने लगे तो पुलिसकर्मी ने उन्हें कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, इस पर नेताजी इतने भड़क गए कि उन्होंने पुलिसकर्मी हो थप्पड़ रसीद कर डाला. योगी सरकार पर इस तस्वीर को बदलने की ज़िम्मेदारी है, अब देखने वाली बात ये है कि क्या वो ऐसा कर पाते हैं?

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