खून और पानी साथ नहीं बह सकते

सिंधु जल समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी को चेतावनी देते हुए कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। पीएम ने इस मुद्दे पर सोमवार को एक बैठक की। गौरतलब है कि उरी हमले के बाद मांग की जा रही है कि पाकिस्तान के modiसाथ सिंधु समझौते को रद्द किया जाए। सरकार के भीतर भी इस तरह की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। ये संधि 1960 में हुई थी। इसके तहत सिंधु, ब्यास, रावी, सतलुज, चेनाब और झेलम नदियों के पानी का भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारा होता है। पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने समझौते पर पुनर्विचार के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि कोई भी समझौता एक तरफा नहीं हो सकता।

हुआ नुकसान
कुछ वक्त पहले जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा था कि सिंधु जल समझौते के कारण राज्य को काफी नुकसान हुआ है। इसके तहत राज्य की जनता सिंधु नदी के पूरे पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकती। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सिंध ुजल समझौते पर दाखिल जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई से इंकार कर दिया है। वकील एमएल शर्मा की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में समझौते को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

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