ब्रिटेन की रेटिंग घटी, भारत पर पड़ेगा असर

यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के बाद ब्रिटेन की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। सोमवार को ब्रिटेन ने रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर की शीर्ष ट्रिपल ए क्रेडिट रेटिंग गंवा दी है। एजेंसी का कहना है कि जनमत संग्रह के नतीजे से ब्रिटेन के आर्थिक प्रदर्शन में गिरावट आ सकता है। इससे पहले पाउंड 31 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। ब्रिटेन के बाजार दूसरे दिन भी गिरावट के साथ बंद हुए और आने वाले दिनों में इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है। ब्रिटेन के ईयू से अलग होने का भारत सहित ukपूरी दुनिया पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर असर पड़ना लाजमी है। जिस गंभीरता से वित्तमंत्री और आरबीआई गर्वनर भारत पर असर न होने की बात कह रहे हैं, उससे ही यह साफ हो जाता है कि स्थिति काफी नाजुक है। मौटे तौर पर देखा जाए तो भारत पर ब्रिटेन के इस फैसले के आर्थिक और सामाजिक दोनों हित प्रभावित होंगे।

संकट 1
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी से सब वाकिफ हैं। इतिहास गवाह है कि जब पश्चिमी देशों में उथल पुथल होती है तो हमारे सेंसेक्स और निफ्टी कटी पतंग की तरह गोते खाते रहते हैं। ऐसे में जब ब्रिटेन आर्थिक परेशानी का सामना करेगा, जिसकी शुरुआत हो चुकी है तो भारतीय बाजार प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएगा। इसके अलावा भारत की कई बड़ी और छोटी कंपनियां ब्रिटेन में सक्रिय हैं। आर्थिक अस्थिरता का खामियाजा उन्हें भी झेलना होगा। उदाहरण के लिए टाटा समूह ब्रिटेन की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी की कमाई का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटेन से आता है। ऐसे में उसकी चिंता का अनुमान लगाया जा सकता है ।

संकट 2
ऐसे भारतीयों की संख्या काफी अधिक है, जिनके कारोबार इटली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों में है, लेकिन यूरोप में उनका मुख्य ठिकाना ब्रिटेन है। ऐसे लोगों को अब आवाजाही में परेशानी का सामना करना होगा। अब तक ब्रिटेन का पासपोर्ट यूरोपीय पासपोर्ट माना जाता है। और यूरोपीय पासपोर्ट धारक ईयू के किसी भी देश में रह सकता है या काम कर सकता है, लेकिन ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने की स्थिति में ऐसा नहीं होगा।

संकट 3
ब्रिटेन के ईयू से अलग होने का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा। भारत रक्षा क्षेत्र में ब्रिटेन के साथ काफी आगे बढ़ने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए उसे अपनी रफ्तार कम करनी होगी। संभव है कि उसे नया साझीदार तलाशना पड़े। अगर ब्रिटेन आर्थिक तंगहाली का सामना करता है, तो उसे फिर से पुराने रूप में आने में काफी वक्त लग जाएगा।

क्या है रेटिंग
रेटिंग इस बात को तय करती है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार से कितना धन उधार ले सकती है। सैद्धांतिक तौर पर बेहतर क्रेडिट रेटिंग का मतलब होता है कम ब्याज दर। इसी तरह रेटिंग गिरने का आश्य है कि कर्ज के लिए ज्यादा ब्याज दर चुकानी होगी।

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