पेट्रोल सस्ता तो हुआ…पर हकीकत जानते हैं आप?

तेल के दामों में लंबे अंतराल के बाद कमी देखने को मिल रही है. इसकी वजह मोदी सरकार द्वारा एक्साइज़ ड्यूटी 2 रुपए घटाना है. सरकार ने एक तरफ जहां इस फैसले को जनहित में बताया, तो वहीं दूसरी तरफ यह भी जता दिया कि आम आदमी का ख्याल रखने के लिए उसे 26 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना होगा. वित्त मंत्रालय ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा, “यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों के असर से आम आदमी के हितों की रक्षा की जा सके.” इसी बयान में सरकारी खजाने पर पड़ने वाले असर को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि सरकार को एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती से पूरे साल में 26 हज़ार करोड़ और मौजूदा कारोबारी साल में 13 हज़ार करोड़ रुपए का घाटा होगा.

घाटे पर जोर क्या?
घाटे पर ज्यादा जोर देकर सरकार कहीं न कहीं यह दर्शाना चाहती है कि आम आदमी के हितों के लिए वह किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है. हालांकि, हकीकत यह है कि राजस्व की कुर्बानी के इस फैसले तक पहुंचने से पहले सरकार एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ा-बढ़ाकर पहले ही अपना खज़ाना भर चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में कार्यभार संभालने वाली भाजपा (एनडीए) सरकार ने अब तक करीब 11 बार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया, जबकि कमी अब जाकर की गई है. यानी सरकार हर बार जनता की जेब से पैसा निकालकर अपनी झोली भरती रही, और जब एक बार जनता को कुछ देना पड़ा तो उसे घाटा याद आ रहा है.

लगातार भरा खज़ाना
2014 में जब भाजपा सत्ता में आई तो पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 9.48 रुपए थी, जो अब दो रुपए घटाने के बाद 19.48 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है. इसी तरह डीजल पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी में जबरदस्त इजाफा हुआ है. यह 3.56 से बढ़कर अब 15.33 रुपए प्रति लीटर हो गई है. इसके बावजूद सरकार यह जाहिर करने में लगी है कि उसे एक्साइज़ ड्यूटी घटाने से कितना नुकसान होगा.

जानें, बिल्डरों की मनमानी पर ऐसे लगेगी लगाम!

बिल्डरों की मनमानी और दादागिरी पर लगाम लगाने वाला रियल एस्टेट कानून (Real Estate Act) यानी रेरा आग से प्रभावी हो गया है. अब घर खरीदने वालों को बिल्डर परेशान नही कर पाएंगे और यदि वो ऐसा करते भी हैं तो उन्हें इसकी भरी कीमत अदा करनी होगी. यानी अब कांसुमेर सही मायनों में किंग कहलायेगा. आइए जानते हैं इस कानून से जुड़ीं कुछ अहम् बातें:

  • इस कानून के तहत राज्य स्तर पर रियल एस्टेट अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो खरीददारों  की शिकायतों का निपटारा करेगी. ख़ास बात यह है कि रियल एस्टेट एजेंट्स भी अथॉरिटी के साथ रजिस्टर होंगे, जिसका मतलब यह हुआ कि उनके द्वारा धोखाधड़ी की आशंका कम रहेगी. साथ ही ये केवल वही प्रोजेक्ट्स बेच पाएंगे, जो पंजीकृत हैं.
  • जुलाई तक सभी प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है. यानी अब बिल्डर कोई भी प्रोजेक्ट्स बिना रजिस्ट्रेशन की जारी नहीं रख पाएंगे. इतना ही नहीं पंजीकृत प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी अथॉरिटी को डी जाएगी. कानून के तहत बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा होने की तारिख देनी होगी.
  • यदि सही समय पर पजेशन नहीं दी जाती तो इसके लिए बिल्डर को जुर्माना भरना पड़ेगा, अब तक इसके लिए उपभोक्ता को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे. यानी अब बिल्डरों में समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने के दबाव रहेगा.
  • कानून में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि बिल्डरों को खरीदारों से लिया गया 70% पैसा प्रोजेक्ट के अकाउंट में रखना होगा. इसका इस्तेमाल वह केवल निर्माण कार्यों में ही कर सकेंगे. पहले बिल्डर इस पैसे का इस्तेमाल दूसरे प्रोजेक्ट्स या कामों में करते थे, जिस वजह से प्रोजेक्ट में देरी होती थी.
  • इस कानून से पारदर्शिता आएगी. पहले उपभोक्ता केवल वही जान पता था, जो बिल्डर द्वारा उसे बताया गया है, लेकिन अब वो अथॉरिटी की वेबसाइट पर जाकर सभी जानकारियां प्राप्त कर सकेगा. साथ ही प्रोजेक्ट में बिना खरीदार की अनुमति के कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा. मसलन, यदि बिल्डर ने आपसे लिफ्ट का वादा किया है, तो वो अपनी मर्जी से उस फैसले से पलट नहीं सकेगा.
  • प्रोजेक्ट की बिक्री सुपर एरिया पर नहीं बल्कि कॉर्पोरेट एरिया पर करनी होगी. नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने के साथ ही जेल का भी प्रावधान है.
ऐसे 5 रुपए सस्ता पाएं गैस सिलेंडर

5महंगाई के दौर में यदि आप रसोई गैस सिलेंडर पर कुछ छूट चाहते हैं, तो आपको भुगतान का तरीका बदलना होगा। यानी अगर आप सिलेंडर के लिए बुकिंग और पेमेंट ऑनलाइन करते हैं तो आपको हर सिलेंडर पर 5 रुपए छूट मिलेगी। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है। मालूम हो कि नोटबंदी के बाद से सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने पर जोर दे रही है। इससे पेट्रोल और डीजल के कैशलेस भुगतान पर छूट की घोषणा की गई थी। तेल कंपनियों के मुताबिक, सरकार की तरफ से अब रसोई गैस पर भी छूट देने को कहा गया है। इसका फायदा लेने के लिए ग्राहकों को नेट बैकिंग, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। इसमें 5 रुपए की छूट मिलेगी। ट्रांजेक्शन होने पर छूट का अमाउंट ग्राहक कम्प्यूटर स्क्रीन पर देख सकेंगे।

मोदीजी हमारी तो टिप ही मारी गई

नोटबंदी से कालेधन वालों की कमाई पर असर पड़ा होगा या नहीं, कहना मुश्किल है, लेकिन वेटरों की जेब जरूर हल्की हो गई है। आलम ये है कि एक दिन में 1000-2000 रुपए की ऊपरी कमाई करने वाले वेटरों को बमुश्लिक 50-60 रुपए ही नसीब हो रहे हैं। 9 नवंबर के बाद से उन्हें टिप मिलना लगभग बंद हो गया है। दिसंबर से जनवरी तक का समय गोवा के वेटरों के लिए कमाई के लिहाज से सबसे अच्छा रहता है। लेकिन इस बार उनकी जेब खाली है। बात केवल छोटे रेस्त्रां या होटलों तक ही सीमित नहीं है, आलिशान होटलों में काम करने वाले वेटर भी मायूस हैं। पीक सीजन में गोवा में सैलानियों का जमावड़ा लगता है। भारी संख्या में यहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं, ऐसे में वेटरों की कमाई का आंकड़ा भी ऊपर उठने लगता है। लेकिन कैश की किल्लत के चलते लोग टिप देने से बच रहे हैं।

मिल जाए तो किस्मत
कैंडोलिम बीच के पास स्थित होटल इन्फर्नो के मैनेजर का कहना है, डिमॉनिटाइजेशन से हमारी कमाई तो कम हुई ही है वेटरों को टिप मिलना भी बंद हो गया है। भारतीय हो या विदेशी टूरिस्ट टिप कोई दे ही नहीं रहा है। अगर किसी को मिल जाए तो वो उसकी किस्मत। वेटर डेविड ने कहा, हमारे यहां विदेशी टूरिस्ट ज्यादा आते हैं, पहले उनसे काफी अच्छी खासी टिप मिल जाया करती थी मगर अब सबकुछ बंद हो गया है। क्रिसमस या नए साल के मौके पर तो बहुत अच्छी कमाई होती थी।

निकलता नहीं पैसा
होटल कैकटस में बतौर वेटर काम करने वाले विनय ने कहा, मोदीजी के फैसले के चलते तो हमारी टिप बंद ही हो गई है सर। दिसंबर का समय तो हमारी कमाई का समय होता था। टूरिस्ट इस सीजन में ज्यादा आते हैं, इसलिए हमें टिप भी अच्छी खासी मिल जाती थी। कभी कभी तो एक दिन में 1000 रुपए तक मिल जाते थे, लेकिन अब तो कोई हमारे लिए पैसा निकालता ही नहीं। टूरिस्ट कार्ड से पहले भी पेमेंट करते थे, मगर टिप कैश में दे जाते थे।

खुद ही पूछ रहे
कैंडोलिम स्थित टीमा नामक रेस्त्रां के वेटरों ने टिप कमाने का अलग तरीका निकाला है। कार्ड से पेमेंट करने वाले पर्यटकों से वो खुद ही पूछ लेते हैं कि क्या आप कुछ टिप देना चाहते हैं, यदि व्यक्ति हां बोलता है तो टिप की राशि मिलाकर बिल बना दिया जाता है। कार्ड से पेमेंट के बाद वेटर मैनेजर से अपने हिस्से की राशि प्राप्त कर लेते हैं। वेटर विनय ने कहा, अब क्या करें सर, कई बार लोग खुद टिप देना चाहते हैं मगर कैश न होने के चलते वो ऐसा नहीं कर पाते। इसलिए हमने सोचा कि क्यों न ये तरीका अपनाया जाए। ऐसा करने से कुछ न कुछ टिप तो आ ही रही है, हालांकि पहले के मुकाबले आंकड़ा बेहद कम है।

बस, मुस्कुरा देते हैं
होटल पाम्स के एक वेटर के मुताबिक, टिप के रूप में मिलने वाली कमाई आधी से भी कम हो गई है। विदेशी सैलानी सबसे ज्यादा टिप देते थे, लेकिन अब वो बस मुस्कुरा देते हैं। देसी पर्यटकों से भी कुछ कमाई नहीं हो रही। पिछले साल मुझे इतनी टिप मिली थी कि एक नया फोन खरीद लिया था मगर इस बार तो जेब खाली है।

ऐसे कमाएं घर बैठे पैसा

अगर आप घर बैठे पैसा कमाना चाहते हैं तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। इंटरनेट पर ऐसी तमाम वेबसाइट मौजूद हैं, जो आपको घर बैठे-बैठेdemo pic पैसा कमाने की सुविधा मुहैया करवा रही हैं। बस जरूरत है सही वेबसाइट पहचानने और उस पर रजिस्ट्रेशन करने की। यहां हम आपको ऐसी ही कुछ वेबसाइट्स के बारे में बताने जा रहे हैं:

इलैंस डॉट कॉम
लाखों फ्रीलांसर इस वेबसाइट से जुड़े हैं। वर्तमान में इलैंस डॉट कॉम 180 देशों में फ्रीलांस का काम करवाती है। 1999 में शुरू हुई ये वेबसाइट सबसे पुरानी ऑनलाइन वेबसाइटों में से एक है। इस वेबसाइट से जुडऩे के लिए आपको इस पर रजिस्ट्रेशन करना होगा और फिर शुरू हो जाएगी घर बैठे कमाई।

स्क्रिप्टेड डॉट कॉम
अगर आपको लिखना पसंद है तो ये वेबसाइट आपके बहुत काम की है। यह फ्रीलांसर राइटर्स का एक ऐसा नेटवर्क है, जो वेबसाइट मालिकों को उनकी जरूरत के अनुसार कंटेंट उपलब्ध कराता है। अगर आपकी अंग्रेजी अच्छी है और क्रिएटिव राइटिंग में दक्ष हैं, तो आपको स्क्रिप्टेड डॉट कॉम पर 500 से 600 शब्दों के एक आर्टिकल के लिए 1500 रुपए तक मिल सकते हैं।

अमेजन मकैनिकल टर्क
इस वेबसाइट पर बिजनेस से संबंधित कई तरह के काम करवाए जाते हैं, और सभी कामों को अलग-अलग बांट दिया जाता है। फिर हिट के आधार पर पैसा दिया जाता है। महज 3 से 4 मिनट के काम के लिए एम टर्फ 5 रुपए तक अदा करती है। इस हिसाब से देखें तो आपकी कमाई का आंकड़ा 60 हजार रुपए महीने तक जा सकता है।

फीवर डॉट कॉम
यह वेबसाइट लोगो डिजाइनिंग, राइटिंग और ट्रांसलेशन के लिए पैसा देती है। प्रत्येक काम के लिए यहां 5 डॉलर तक मिल सकते हैं। कई फ्रीलांसर इस साइट से घर बैठे Earn कर रहे हैं। आप भी साइन अप करके उनकी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।

ओ डेस्क डॉट कॉम
यह प्लेटफॉर्म वेब डिजाइनर, लोगो डिजाइनर के साथ उन पेशेवरों के लिए भी बहुत फायदेमंद है, जिन्हें वर्डप्रेस वेबसाइट तैयार करना आता है। इस वेबसाइट पर आप जितना चाहें उनता पैसा कमा सकते हैं। ओ डेस्क डॉट कॉम छोटे व्यापारियों और फ्रीलांसर के बीच एक सेतु का काम करती है।

Natural disaster: संपत्ति बीमा करवाया क्या?

चेन्नई इस वक्त प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। अब तक वहां 290 के आसपास लोगों की मौत हो चुकी है और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इससे पहले हरिद्वार, जम्मू-कश्मीर और ओडिशा को भी प्रकृति के कहर का सामना करना पड़ा था। Natural disaster का सिलसिला पिछले chenniकुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है। बाढ़ और भूकंप अब आम हो गए हैं। इसे देखते हुए संपत्ति बीमा लेना समझदारी वाला फैसला हो सकता है। कई लोग इस अपनाने भी लगे हैं। यहां हम आपको बीमा और क्लेम से जुड़ी कुछ बातें बता रहे हैं:

बीमा लेने के फायदे
बीमा लेने वाले अधिकतर लोग जीवन या वाहन बीमा तक सीमित रहते हैं। संपत्ति बीमा को हम यह सोचकर नकार देते हैं कि उसे कुछ होने वाला नहीं है। जबकि चेन्नई जैसी घटनाएं एक ही झटके में हमारी सोच को गलत साबित कर देती हैं। आज के वक्त में जीवन और वाहन बीमा के साथ-साथ संपत्ति बीमा भी बहुत महत्वपूर्ण है। संपत्ति बीमा प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आपके घर के सामान और निर्माण को होने वाले नुकसान की भरपाई करने में मददगार साबित होता है।

अगर कागजात हो जाएं?
आमतौर पर माना जाता है कि अगर पॉलिसी के कागजात खो गए तो क्लेम हासिल नहीं किया जा सकता। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कंपनियां बीमा धारकों की परेशानी को समझते हुए केवल कुछ जरूरी जानकारी के आधार पर ही क्लेम आवेदन स्वीकार कर लेती हैं। मसलन, इंश्योरेंस का साल, बीमा धारक का नाम, प्रीमियम आदि। इसलिए यदि प्राकृतिक आपदा में आपके इंश्योरेंस के कागजात हो जाते हैं तो घबरवाने की कोई जरूरत नहीं है।

उतना मुश्किल नहीं
विशेषज्ञों के मुताबिक, आपदा की स्थिति में क्लेम लेना अब उतना मुश्किल नहीं है जितना पहले हुआ करता था। बीमाधारक अपने नुकसान का आकलन करते हुए कंपनी की हेल्पलाइन पर इसकी जानकारी दे सकता है या आसपास स्थिति कार्यालय को सूचित कर सकता है। अधिकतर बीमा कंपनियां प्राकृतिक आपदा के लिए एक अलग विंग बनाकर रखती हैं, ताकि क्लेम का निपटारा जल्द किया जा सके। जम्मू-कश्मीर और ओडिशा में आई आपदा के दौरान भी कंपनियों ने इसी तरह से प्रभावितों के आवेदनों को निपटाया था।