जानें: Modi से क्या चाहते हैं लोग

narendra modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अब तक का कार्यकाल विदेश यात्राओं के नाम रहा है। उन्होंने एक के बाद एक कई यात्राएं कीं। विदेशी सरजमीं पर मोदी ने भारत को सशक्त, समृद्ध और खुशहाल राष्ट्र के रूप में पेश किया और खूब वाहवाही बटोरी। लेकिन क्या देशवासियों से जिन अच्छे दिनों का वादा Modi ने किया था उसे वे पूरा करते नजर आए? इस बारे में आज का खबरी ने वरिष्ठ पत्रकारों, नेताओं और आम जनता से बात की। साथ ही उनसे जानना चाहा कि 2016 में नरेंद्र मोदी को जनआकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए किन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

कुछ खास नहीं बदला

वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक जागरण के पूर्व संपादक सरोज अवस्थी कहते हैं, “मोदीजी देश के प्रधानमंत्री हैं, ऐसे में विदेश यात्राएं स्वभाविक हैं। जहां तक बात इन यात्राओं से भारत को होने वाले फायदे की है तो यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल तो केवल इतना ही नजर आ रहा है awastiकि इन यात्राओं ने मोदीजी को दुनिया भर में एक ब्रांड बना दिया है। हर तरफ मोदी ही मोदी छाए हुए हैं। अगर जनता से किए गए वादों की बात करें तो वो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। आम आदमी की सबसे बड़ी समस्या क्या है, महंगाई। संप्रग सरकार के कार्यकाल में भी जनता इससे परेशान थी और आज भी है। महंगाई पर बड़ी-बड़ी बातें जरूर की गईं, लेकिन उसे कम करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास नहीं हुए। इसके अलावा और भी कई मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र सरकार की भूमिका कुछ अटपटी रही। मसलन, बीच में एक खबर आई थी कि रूस भारत में न्यूक्लियर प्लांट लगाना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही हमें यूरेनियम देने को तैयार है। ऐसे में गाड़ी कहां अटक रही है, समझना मुश्किल है”।

सरोज अवस्थी के मुताबिक, इस साल मोदीजी को विशेषकर उन मुद्दों ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनके सहारे वे सत्ता में आए। जैसे महंगाई, रोजगार और विकास। आम जनता को इससे को ई फर्क नहीं पड़ता कि जीएसटी लागू होगा या नहीं, उसे केवल इतना ही चाहिए कि उसकी थाली खाली न रहे। मेरा मानना है कि सरकार को अब आपस के झगड़े सुलझाकर विकास पर ध्यान देना चाहिए। हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का उदाहरण ले सकते हैं। उन्हें अब यह समझ आ गया है कि जनता क्या चाहती है, इसलिए उनका पूरा फोकस मेट्रो, फ्लाईओवर, सड़क, बिजली, पानी पर है। मोदी सरकार को भी जनआकांक्षाओं को समझना चाहिए।

उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

पुणे कांग्रेस नेता रमेश धर्मावत मानते हैं कि मोदी सरकार अब तक जनता की अपेकक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। धर्मावत कहते हैं, “आज हर कोई पूछ रहा है कि अच्छे दिन कहां हैं। फिर चाहे वह आम आदमी हो या व्यापारी वर्ग। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में व्यापारियों की समस्या इतनी बढ़ गई है dharmavatकि उनके लिए मुनाफा कमाना तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अगर मैं महाराष्ट्र की बात करूं तो यहां भी लोग भाजपा-शिवसेना सरकार के वादों के पूरा होने की बांट जोह रहे हैं”। धर्मावत नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को सही करार देते हैं। उनका कहना है, “अगर हमें विदेशी निवेश चाहिए तो उसके लिए यात्राएं करनी होंगी। लेकिन यात्राओं का फायदा क्या मिला ये देखना भी जरूरी है। मोदी सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में अब तक तो ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि उनके विदेश दौरे भारत के लिहाज से सार्थक रहे”।

कांग्रेस नेता की नजर में केंद्र सरकार को 2016 में कॉमन मैन के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। वे कहते हैं, “सरकार यदि जीएसटी लाना चाहती है तो ठीक है, लेकिन उसकी दर कम होनी चाहिए। अगर वैट और सर्विस टैक्स से ज्यादा दर रहेगी तो कैसे चलेगा। जरा सोचिए जीएसटी 24-25 प्रतिशत हुई तो वस्तुएं के दाम कहां जाएंगे। मेरा मानना है कि इसकी दर 15-16 प्रतिशत तक रहनी चाहिए, ताकि किसी पर ज्यादा भार न पड़े। सरकार अगर कर नीति में बदलाव कर व्यापारियों को छूट देती है तो काफी अच्छा रहेगा। कुल मिलाकर मैं बस यही कहना चाहूंगा कि सरकार जो भी फैसले ले उसमें आम आदमी का हित झलकना चाहिए”।

टीम को भी मोदी बनना होगा
समाचार4मीडिया के एडिटोरियल हेड अभिषेक मेहरोत्रा कहते हैं, “नरेंद्र मोदी के आने के बाद देश में विकास की काफी बातें हो रही हैं। उन्होंने लोगों abhishekके मन में विकास की भावना जागृत की है, इसे सरकार की उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि विकास बातों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वैसे इसकी एक वजह यह भी है कि मोदी की टीम उनकी तरह प्रभावशाली नहीं है। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक जो काम किया, उससे लोग काफी प्रभावित हैं, मगर उनकी टीम के बाकी सदस्य अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाए। अकेले मोदी देश नहीं चला सकते, यह एक टीम वर्क है और जब तक पूरी टीम संतुलित नहीं होगी विकास रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा”।

अभिषेक के मुताबिक, 2016 में भाजपा को सबसे पहला काम यही करना चाहिए कि टीम मोदी को मोदी बनाने का प्रयास हो। इसके अलावा सरकार को आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि इन्हीं के बूते भाजपा सत्ता में आई है। अभिषेक कहते हैं, मोदी के अंतरराष्ट्रीय दौरों से भारत को फायदा हो रहा है, लेकिन आम आदमी को इसकी खुश तभी होगी जब उसकी समस्या पर भी गौर फरमाया जाए। पिछले डेढ़ सालों में प्रत्यक्ष तौर पर महंगाई घटी है, यह मानना मुश्किल है। चाहे दाल हो या सब्जी सब के भाव ऊपर की ओर भाग रहे हैं। एक और महत्वपूर्ण मुद्दा जिस पर मोदी को ध्यान देने की जरूरत है, वो है भ्रष्टाचार। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कही थी, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट। अरुण जेटली का नाम भ्रष्टाचार से जुड़ते ही पार्टी और मोदी की नीतियां बदल गईं, ऐसा नहीं होना चाहिए।

विदेश कम जाते तो अच्छा होता
सरकारी कर्मचारी एनआर श्रीधर का नजरिया मोदी सरकार को लेकर सकारात्मक है। वे कहते हैं, “इतनी जल्दी सरकार के कार्यकाल पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते। डेढ़ साल का वक्त सरकार चलाने के लिहाज से ज्यादा नहीं है। नरेंद्र मोदी ने कई अच्छे फैसले लिए हैं, और एक अच्छी सोच के sridharसाथ आगे बढ़ रहे हैं”। हालांकि श्रीधर मानते हैं कि महंगाई के मुद्दे पर मोदी कुछ खास नहीं कर पाए हैं। वे कहते हैं, “आम आदमी के लिए खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम अब भी समस्या बने हुए हैं और जब तक इसका हल नहीं तलाशा जाता, उसके लिए अच्छे दिन सपना ही बने रहेंगे”। श्रीधर उन लोगों में शामिल हैं जो मानते हैं कि मोदी पिछले साल अपने विदेश दौरों में कटौती करके देश पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे। वे कहते हैं, “प्रधानमंत्री के लिए विदेश यात्राएं जरूरी हैं इसमें कोई दोराय नहीं। लेकिन अगर पीएम उन्हे थोड़ा कम करते तो शायद ज्यादा अच्छा लगता”। कॉमन मैन के नाते श्रीधर कहते हैं, “सरकार को इस साल महंगाई कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बेकार के विवादों में पडऩे के बजाए मोदी और सरकार का केवल एक ही एजेंडा होना चाहिए, आवाम की उम्मीदों पर खरा उतरना”।

Canada illuminated with Diwali lights

By: Anuj Ismail Special Correspondent Canada

The Indian community who are residing miles away from their soil will be celebrating the festival of lights Diwali on November 11, in their own way. Interestingly the school and colleges across the country will be closed on November 11, for Remembrance Day.
What is Remembrance Day?: diwaliOn Remembrance Day, members of the armed forces (soldiers, sailors, and airmen) are commemorated. The other common name for this day is Armistice Day, which marks the date and time when armies stopped fighting World War I. On November 11th at 11am in 1918 (the last minute of the eleventh day of the eleventh month). As many as 100,000 Canadian soldiers died in the First and Second World Wars.
The students who have come to Canada this year are overwhelmed that they will not have classes on that day, so that they will be able to celebrate the festival of lights midst their friends.
Rajendra Kumar, student of International business said,” This the first time that I am away from my family, I will miss my family on this day however I am happy about the fact that I do not have to attend the class. I will be going at the Indian community centre to celebrate the festival of lights. ”
Dheeraj Singh, who is pursuing network and technology, said,” I have invited my friends over to my place for Laxmi Puja, and light up my house with DIAS, followed by dinner. We will not be playing with firecrackers, as I do not want to pollute the environment. ”
”I overwhelmed about the fact that I will not have to attend my classes and get a day off, similar to what happens in India, I will be going out with my friends and burst crackers and have a good time. I will miss my parents; however, it feels like home away from home. ”

सस्ते Shopping डेस्टिनेशन

अगर आपShopping 1 इंटरनेशल टूर पर जाते हैं तो सबकी ख्वाहिश यही होती है कि वापसी में आप उनके लिए कुछ न कुछ जरूर लेकर आएं। कुछ लोग तो मुंह खोलकर अपनी इच्छा बयां कर देते हैं, अब ऐसे में मना भी नहीं किया जा सकता। लिहाजा आप, ये पता लगाने मेु जुट जाते हैं कि कहां से सस्ती शॉपिंग की जाए? आइए हम आपकी इस खोज को थोड़ा आसान बना देते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं उन देशों के बारे में जहां आप अपनी जेब पर ज्यादा बोझ डाले बगैर सबके लिए कुछ न कुछ खरीद सकते हैं।

हांगकांग
हांगकांग को एशिया के सबसे फेमस Shopping डेस्टिनेशन के तौर पर पहचाना जाता है। यहां वैरायटी तो मिलती ही है साथ ही मोलभाव की संभावना भी काफी अधिक रहती है। इसलिए पर्यटक कम खर्च में ज्यादा शॉपिंग कर पाते हैं। हांगकांग में आपको कपड़ों से लेकर घर की साज-सज्जा तक का सारा सामान मिल जाएगा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स भी आपको पसंद आ सकते हैं। कहा जाता है कि अगर आप एक सूटकेस के साथ हांगकांग जा रहे हैं तो वापसी पर उनका दो होना लाजमी है।

स्पेन
स्पेन के मैड्रिड में शॉपिंग करने का अनुभव आपके लिए यादगार रहेगा। यहां भी भारत की तरह स्ट्रीट बाजार का चलन है। पर्यटकों से लेकर स्थानीय निवासी ज्यादातर स्ट्रीट बाजार को ही तवज्जो देते हैं, क्योंकि यहां लगभग हर सामान सस्ते दाम में उपलब्ध हो जाता है। इसके अलावा मैड्रिड में बड़े-बड़े शोरूम भी हैं, अलग-अलग वैरायटी के सामान से भरे पड़े हैं। मैड्रिड में बूटिक्स काफी ज्यादा हैं, ऐसे में डिजाइनर सामान यहां बेहद उम्दा मिलता है।

जापान
जापान की राजधानी टोक्यो सस्ती शॉपिंग के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है। यहां आपको जरूरत का सारा सामान मिल जाएगा, वो भी काफी कम कीमत पर। फिर चाहे वो इलेक्ट्रॉनिक आइटम हो या फुटवेयर। टोक्यो में कई ऐसे बाजार हैं जहां हर वक्त पर्यटकों की भीड़ रहती है। अन्य देशों की तरह यहां भी स्ट्रीट बाजार का चलन है, खासकर सुबह और शाम के वक्त यहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। तो अगर आप टोक्यो घूमने जा रहे हैं तो खरीददारी आपकी जेब का बोझ ज्यादा नहीं बढ़ाएगी।

थाईलैंड
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक को भी शॉपिंग डेस्टीनेशन के तौर पर पहचाना जाता है। यहां कई ऐसे बाजार हैं जो रातभर खुले रहते हैं। कहा जाता है कि ये शहर कभी सोता नहीं। बैकॉक में आप कपड़ों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक सस्ते में खरीद सकते हैं। हालांकि यहां के हैंडीक्राफ्ट की भी अच्छी डिमांड रहती है। यहां भी मोलभाव की गुंजाइश भारत की तरह रहती है। अगर आप इसमें माहिर हैं तो संभव है खरीददारी के लिए दूसरों से कम पैसे चुकाने पड़ें।

यहां होते हैं सबसे ज्यादा Rape

पिछले कुछ सालों में महिलाओं की स्थिति तेजी से सुधरी है, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इस दौरान उनके साथ बलात्कार जैसे अपराधों में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। गौर करने वाली बात ये भी है कि Rape के मामले महिलाओं को लेकर संर्कीण सोच रखने वाले मुल्कों की तुलना में आजाद ख्याल देशों में ज्यादा सामने आ रहे हैं। पेश है ऐसे ही टॉप 10 देशों की सूची:

1-अमेरिका
अमेरिका rape-usaकी गिनती दुनिया के सबसे विकसित देशों में होती है। लेकिन महिलाओं की सुरक्षा यहां आज भी सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हालांकि ये बात अलग है कि इस पर ज्यादा चर्चा नहीं होती। अमेरिका में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां हवस के दरिंदों ने महिलाओं के साथ हैवानियत की सारी हदें पार दीं, बावजूद इसके सरकारी स्तर पर खास कदम नहीं उठाए जा रहे। महिलाओं के साथ ही युवा लडक़ों के साथ भी यहां जबरदस्ती के मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि अंकल सैम की यह कंट्री महिलाओं के लिए असुरक्षित बन गई है। नेशनल वायलेंस अगेंस्ट वूमन सर्वे के अनुसार, 6 में से एक अमेरिकी महिला बलात्कार का शिकर बनती है।

2-भारत
विकासशील से विकसित बनने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे भारत में भी महिलाओं की सुरक्षा सवालों में है। देश सहित पूरी दुनिया को हिलाने  वाले निर्भया कांड के बाद भी इस दिशा में कुछ खास नहीं किया जा सका है। तकरीबन हर राज्य में बलात्कार के मामलों में हर साल इजाफा होता है। राज्य स्तर पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून बनाए गए हैं, लेकिन उन्हें अमल में लाने वाला सिस्टम अब भी जस का तस है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर 22 मिनट में एक महिला बलात्कार की शिकार बनती है।

3-दक्षिण अफ्रीका
बलात्कार  के बढ़ते मामले प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज दक्षिण अफ्रीका की खूबसूरती पर भी कालिख लगा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक यहां 50 से 55 हजार महिलाएं हर साल हवस का शिकार बनती हैं। खासतौर पर अकेली और कामकाजी महिलाओं के साथ ऐसे अपराध ज्यादा होते हैं। महिला सुरक्षा यहां सरकारी प्राथमिकता में न के बराबर है। इसके चलते महिला पर्यटक भी अब यहां अकेले जाने में कतराने लगी हैं। कुछ वक्त पहले कम्यूनिटी ऑफ इंफॉर्मेशन, एम्पावरमेंट एंड ट्रांसपेरसी ने महिलाओं से सवाल पूछे थे, जिसमें से हर तीन में से एक महिला ने बलात्कार की बात स्वीकारी थी। दुनिया भर में बच्चों से रेप के मामले सबसे ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में होते हैं।

4-मैक्सिको
खूबसूरत देश मैक्सिको भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की काली छाया से अछूता नहीं है। यहां अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वो दिन दहाड़े वारदातों को अंजाम देने से भी नहीं चूकते। कुछ वक्त पहले स्पेन की छह महिला पर्यटकों के साथ हुई घटना ने मैक्सिको सहित पूरे विश्व को खिलाकर रख दिया था। बावजूद इसके महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिला है। स्पेन की सैलानियों की रेप के बाद बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी।

5-कनाडा
बसने केrape-afterm लिहाज से भारतीयों की पसंदीदा जगहों में से एक कहा जाने वाला कनाडा भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। यहां हालात ये हो चुके हैं कि हर तीन में से एक महिला बलात्कार का शिकार बनती है। जबकि केवल 6 प्रतिशत मामले ही पुलिस में दर्ज किए जाते हैं। दूसरे देशों की तरह यहां भी अधिकांश जान-पहचान वाले ही महिलाओं की आबरू को तार-तार करते हैं। बच्चों की यौन प्रताडऩा भी यहां बढ़ रही है। जस्टिस इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के मुताबिक, बलात्कार के दौरान 62 प्रतिशत महिलाओं को शारीरिक रूप से यातना दी जाती है और 9 फीसदी को बुरी तरह मारा जाता है।

6-जर्मनी
हिटलर के rape-germजर्मनी में महिलाओं को अब भी इस्तेमाल की वस्तु के तौर पर देखा जाता है। यहां बलात्कार पीडि़तों के लिए मॉर्निंग आफ्टर पिल को कानूनी तौर पर अनुमति मिलने के बाद रेप के मामलों में जबरदस्त इजाफा दर्ज किया गया है। कामकाजी और अकेले रहने वाली महिलाएं यहां सबसे ज्यादा खौफ में जीती हैं। बलात्कार पीडि़तों को लेकर पुलिस के रवैये की भी यहां आलोचना होती रहती है। माना जा रहा है कि अगर जर्मनी रेप चार्ट में ऐसे ही आगे बढ़ता रहा तो उसका पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हो सकता है।

7-स्वीडन
आमतौर rape-sweedenपर शांत माने जाने वाले यूरोपीयन नेशन के इस देश में बलात्कार पीडि़तों की संख्या बढ़ रही है। महिलाएं-युवतियों से लेकर बच्चे भी हवस के शैतानों के निशाने पर हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर चार में से एक महिला यहां बलात्कार जैसे जघन्य अपराध का शिकार बनती है। जिस तरह से स्वीडन में रेप क्राइम बढ़ा है, उसे देखकर आशंका जताई जा रही है कि दुनिया के टॉप 10 देशों में इसकी रैंकिंग में ऊपर पहुंच सकती है। यह पर्यटकों के लिए भी निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। यूरोपियन यूनियन स्टडी के मुताबिक पूरे यूरोप में स्वीडन में सबसे ज्यादा बलात्कार के मामले सामने आते हैं।

8-रूस
रूसी rapeee-vबालाओं की खूबसूरती पूरी दुनिया में मशहूर है और यही खूबसूरती उनकी जान की दुश्मन बनी हुई है। हर साल 6000 से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। जबकि असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रूस में महिलाओं के साथ गैंगरेप की सबसे ज्यादा वारदातें हुईं थीं, वो मानसिकता यहां अब भी कायम है। कई गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि रूप में अधिकर बलात्कार के मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते, जिस वजह से असल संख्या का पता लगाना मुश्किल है।

9-थाईलैंड
थाइलैंड rape-russiaउन देशों में शुमार है जहां वेश्यावृति को कानूनी मान्यता दी गई है। इसके पीछे तर्क था कि काम इच्छा की पूर्ति के लिए अगर लोगों को आसान साधन उपलब्ध होगा तो बलात्कार जैसी घटनाओं में कमी आएगी, लेकिन हो इसके एकदम उलट रहा है। यहां हर साल सबसे ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज किए जाते हैं। यहां तक कि बच्चियों के साथ ही बुजुर्ग महिलाएं भी शिकार बनती हैं। खासतौर पर अकेली महिलाओं के लिए तो यह जगह सबसे ज्यादा खतरनाक है।

10-बेल्जियम
बेल्जियम की शांत फिजा भी बलात्कार पीडि़तों की चीख से अपनी पहचान खो रही है। लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद यहां महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए जाते। हालात ये हो चले हैं कि महिला-युवतियों के लिए घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। 2013 में यहां एक ही दिन में बलात्कार के 8 केस दर्ज किए गए थे।

8 विमानों की अनसुलझी पहेली

पिछला साल हवाई यात्रियों और एविएशन इंडस्ट्री के लिए काफी खराब रहा। इस दौरान कई हवाई दुघर्टनाएं हुईं, जिसमें, सैंकड़ों यात्रियों को अपनी जान गंवाई पड़ी। मलेशियाई विमान एमएच 370 के बारे में तो अब तक साफ तौर पर कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। केवल एमएच 370 ही नहीं कई ऐसे Flights हैं, जिनका गायब होना अब तक पहेली बना हुआ है। यहां हम आपको ऐसी ही आठ चर्चित घटनाओं के बारे में बता रहे हैं।

रहस्मय एमएच 370
मलेशिmalयई एयरलाइन का विमान एमएस 370 8 मार्च, 2015 को बीच सफर में गायब हो गया। विमान ने 239 यात्रियों के साथ क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन वो कभी वहां पहुंचा ही नहीं। विमान के बारे में कई तरह की अटकलें लगाई गईं, ऐसी खबरें भी आईं कि आतंकवादियों ने विमान हाईजैक कर लिया है। मगर साफ तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सका।

अरबों का बोइंग 737
ब्राजील brazilका एक विमान 1979 में रियो जाते वक्त बीच में ही गायब हो गया था। आज तक किसी को नहीं पता कि विमान के साथ क्या हुआ था। विमान में अरबों रुपए की कीमत का आर्ट वर्क था। विमान की खोज की लाख कोशिशें की गईं, मगर उसका कोई पता नहीं चला। उड़ान के कुछ वक्त बाद ही विमान से संपर्क टूट गया था।

डीसी-4 की आखिरी उड़ान
टोक्यो candaके लिए रवाना हुआ कैनेडियन पैसेफिक एयरलाइंस का विमान डीसी-4 असमान से कहां गया कोई नहीं जानता। 21 जुलाई, 1951 को उड़ान भरने के साथ ही विमान गायब हो गया। एमएच 370 की तरह इस विमान की तलाश के लिए बड़े अभियान चलाए गए, मगर कुछ हासिल नहीं हुआ। 31 यात्रियों सहित 6 क्रू मैंबर वाले इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका जताई गई, लेकिन मलबा कोई नहीं खोज सका।

मलबा तक नहीं मिला
न्यूयॉर्क सेNorthwest 58 यात्रियों को लेकर उड़ान भरने वाला विमान 1950 में जब गायब हुआ तो पूरे अमेरिका में हडक़ंप मच गया। सर्च ऑपरेशन चलाए गए, बाद में पता चला कि विमान मिशिगन नदी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन ऐसा क्यों हुआ इसका पता अब तक नहीं चल सका है। यहां तक कि बचाव दल को विमान का मलबा तक नहीं मिला। हालांकि पानी में तैरतीं कुछ लाशें जरूर मिली थीं, जिससे हादसे की पुष्टि हुई।

बिगबैंड लीडर मिलर
दूसरे  विश्व युद्ध के दौरान गायब हुआ बिगबैंड लीडर ग्लैन मिलर विमान आज भी एक अनसुलझी पहेली है। विमान ने 15 दिसंबर, 1944 को पेरिस के लिए उड़ान भरी थी। मिलर को जवानों के लिए पेरिस में आयोजित एक कॉन्सर्ट में शामिल होना था। उन दिनों मिलर की गिनती मशहूर म्यूजिशियनों में होती थी। उनके मून और मूनलाइट जैसे गानों ने युवाओं को दीवाना बना रखा था।

सबकुछ सामान्य था…..पर
अमेरिकीDC-4 सेना के 96 जवानों को लेकर कैलीफोर्निया से विएतनाम जा रहा विमान भी रहस्मय ढंग से गायब होने वाले विमानों की फेहरिस्त में शामिल है। विमान ने गुआम में तेल भरवाने के लिए लैंडिंग की थी, इसके बाद वो फिलीपींस में उतरा, लेकिन यहां से उड़ान भरने के बाद उसके साथ क्या हुआ कोई नहीं जानता। पायलट ने सबकुछ सामान्य होने का संदेश भी दिया था। विमान का खोज में 200,000 स्क्वॉयर माइल्स से ज्यादा तक खंगाला गया पर कुछ पता नहीं चला।

एक साथ पांच लापता
अमेरिका flight19नौसेना की फ्लाइट 19 सहित पांच विमानों के 1945 में गायब होने ने बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य को और भी गहरा दिया था। जहां इन विमानों का संपर्क टूटा वो जगह बरमूडा ट्रायंगल के आसपास या ऊपर थी। बरमूडा ट्रायंगल को विमानों के लिए खतरनाक माना जाता है, यहां कई विमान गायब हो चुके हैं। फ्लाइट 19 की खोज में गए विमान का भी कोई पता नहीं चल सका था।

…और खो गईं एमिलिया
विख्यात  लेखिका एमिलिया एरहार्ट का विमान सहित गायब होना एविएशन इंडस्ट्री की सबसे चर्चित घटना थी। 2 जून,1937 को एमिलिया ने नेवीगेटर फ्रेड नूनन के साथ विमान में उड़ान भरी और मिड-पैसेफिक में हॉलैंड आइलैंड के पास उनका विमान गायब हो गया। एमिलिया पहली महिला एवीएटर थीं, जिन्होंने अकेले अटलांटिक ओशिएन के ऊपर उड़ान भरी थी। यूएस नौसेना और कोस्ट गार्ड ने बड़े पैमाने पर खोज अभियान चलाया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।

ऐसी MAA नहीं देखी होगी

हमें भले ही खतरों से खेलने का शौक हो, लेकिन हम अपने बच्चों को हमेशा इससे दूर रखते हैं। लेकिन 25 वर्षीय मॉर्गन ब्रिचलर शायद ऐसा नहीं सोmomचतीं। वो जहां भी जाती हैं, अपनी नन्ही परी को साथ ले जाना नहीं भूलतीं, फिर चाहे वो एरिजोना के घने जंगल हों या मैक्सिको और हवाई की ऊंची पहाडिय़ां। मॉर्गन की बेटी हेदली महज तीन साल की हैं, लेकिन जन्म के चंद महीनों बाद ही मॉर्गन उसे लेकर अमेरिका के प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सैर पर निकल पड़ी थीं। मॉर्गन चाहती हैं कि हेदली भी उन्हीं की तरह खतरों की खिलाड़ी बने, इसलिए वो उसे हर जगह साथ लेकर जाती हैं। मॉर्गन खुद को नेचर ग्रुपी कहती हैं, उन्हें ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर चढऩा भी बेहद पसंद हैं। खास बात ये है कि वो हेलदी को अपनी पीठ पर लेकर ऐसा करती हैं। मॉर्गन ने यह अभ्यास अपने घर में बनी इंडोर रॉक वॉल पर तब शुरू किया था जब हेदली सिर्फ 18 महीनों की थी। मॉर्गन कहती हैं, बच्चों के लिए प्रकृति के करीब रहना बेहद जरूरी है, मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी भी प्रकृति को प्यार करे, उसे समझे। मॉर्गन ने कहा, मुझे अच्छा लगता है कि हम दोनों रोज कुछ नई यादें जोड़ते हैं, जब हेदली बड़ी होगी तो उसे यह देखकर खुशी होगी कि बचपन में ही वो इतना सब कर चुकी है।

जिंदगी अब हुई शुरू
मॉर्गmom1न और उनकी तीन साल की बेटी के इंस्टाग्राम पर फैन हैं और इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही हैं। मॉर्गन कहती हैं, लोग मानते हैं कि शादी के बाद जिंदगी पूरी तरह खत्म हो जाती है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं। मेरी जिंदगी की असल शुरुआत हेदली के जन्म के साथ हुई। वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त होने के साथ प्रेरणा भी है। मैं अपने एडवेंचर्स को उसके अलावा किसी और के साथ शेयर नहीं कर सकती।

Photo: Dailymail.com

आखिर कब तक?

तुर्की की एक सुबह ने मानवता को झंकझोरने वाली जिस तस्वीर को दुनिया के समक्ष पेश किया, वो एक काले अध्यान के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई है। कई जाने-माने कलाकारों ने तीन साल के अलायन कुर्दी को श्रृद्धांजलि देने के लिए अपने विचारों को कूचियों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा। सोशल साइट्स पर अलायन के लिए दुख प्रकट करने वालों की फौज उमड़ पड़ी। Turkey सहित शरणार्थी समस्या से जूझ रहे देशों में हलचल पैदा हो गई। एक अदद आसरे की आस में घूम रहे परिवारों में से फिर कोई अलायन न बने इसके लिए मंथन शुरू हो गया, संभव है इसका कोई स्थायी हल भी निकल जाए। लेकिन नफरत, सनक और राजनीतिक सौदेबाजी के चलते बच्चों का यूं अलायन बनना बदस्तूर जारी रहेगा। दुनियाभर में बड़ों की करनी की सजा भुगतते बच्चों की कुछ तस्वीरें….

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आखिरी मिनट में मिली HURU को जिंदगी

जबCourtesy: DailMail मौत आंखों के सामने हो तो हम जिंदगी की आस में आखिरी सांस भी दांव पर लगा देते हैं। फोटो में नजर आ रही इस बिल्ली (HURU) ने भी यही किया। जब एक-एक करके उसके साथियों को मारा जाने लगा तो जान बचाने के लिए बिल्ली स्लॉटरहाउस की रैलिंग पर चढ़ गई। हालांकि उसे जिंदगी अपने प्रयासों से नहीं बल्कि कुछ समाजिक कार्यकर्ताओं की बहादुरी से मिली। दरअसल, चीन में हर साल यूलिन डॉग एंड कैट मीट फेस्टिवल मनाया जाता है, इस दौरान सैंकड़ों आवारा या चुराए गए कुत्ते और बिल्ली मारे जाते हैं। ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल को खबर मिली थी कि चीन में बड़े पैमाने पर कुत्ते-बिल्लियों को मारने के लिए लाया गया है, इसके आधार पर संगठन की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर हूरू और उसके जैसे कई जानवरों को आजाद कराया। सभी जानवरों को छोटे-छोटे पिंजरों में कैद किया गया था। HURU इस वक्त वॉशिंगटन एनिमल रेस्क्यू लीग में सदमे से उभरने की कोशिश कर रही है। आजाद कराए गए सभी जानवर इतने गहरे सदमें थे कि उन्होंने कुछ वक्त तकrescue1 खाने-पानी को छूआ भी नहीं। ह्यूमन सोसाइटी के मुताबिक, चीन में सालाना 10 मिलियन बिल्लियों को खाने के लिए मौत के घाट उतारा जाता है। जबकि यूलिन फेस्टिवल में 10,000 से ज्यादा बिल्लियों की हत्या होती है। ये फेस्टिवल 2010 में पहली बार ग्रीष्म संक्रांति के नाम पर आयोजित किया गया था। तब से हर साल इस मौके पर सैंकड़ों बेजुबानों को कुर्बान किया जाता है। ज्यादातर जानवर आवारा या चोरी के होते हैं, जिन्हें कई दिनों तक भूखा-प्यास रखा जाता है।

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सफलता के 10 मिसाइल मंत्र

मिसाइल मैन और पीपुल्स प्रेसीडेंट जैसे कई नामों से पहचाने जाने वाले अब्दुल कलाम भले ही अब हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी कही बातें हमे Abdul Kalamशा हमारा हौसला बढ़ाती रहेंगी। राष्ट्रपति के रूप में भी कलाम ने कभी खुद को एक दायरे में सीमित नहीं किया, वो बच्चों के बीच जाकर उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते रहे। कलाम मानते थे कि सपने हमेशा बड़े देखने चाहिए, क्योंकि बड़ी सोच ही हमें बड़ा बना सकती है। बेहद सामान्य परिवार में जन्मे कलाम ने यह साबित किया कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी हमें आगे बढऩे से नहीं रोक सकतीं, बशर्ते हम खुद ऐसा न चाहें। एक नजर उनकी 10 प्रेरक बातों पर।

  • श्रेष्ठता एक सतत प्रक्रिया है, हादसा नहीं।
  • सपना सच करने के लिए पहले सपना देखना होगा।
  • इंसान को मुश्किलों की जरूरत पड़ती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए मुश्किलें जरूरी हैं।
  • इंतजार करने वालों को केवल उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।
  • आसमान की तरफ देखिए, हम अकेले नहीं हैं। पूरा ब्रह्मांड हमारा दोस्त है और वो उन्हीं को सर्वोत्तम देता है, जो सपने देखते हैं और मेहनत करते हैं।
  • जो लोग मन से काम नहीं करते, उन्हें जो सफलता मिलती है वो खोखली होती है।
  • युवा अलग तरीके से सोचने का साहस दिखाएं, अविष्कार करने का साहस दिखाएं, अंजान रास्तों पर चलें।
  • अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त, सुंदर मस्तिष्क वाला देश बनाना है तो समाज के तीन सदस्यों को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी, ये तीन हैं-पिता, मां और अध्यापक।
  • हमें तभी याद रखा जाएगा, जब हम अपनी युवा पीढ़ी को एक समृद्ध और सुरक्षित भारत दे पाएं।
  • जीवन एक मुश्किल खेल है और आप इंसान होने के अपने जन्मजात अधिकार को बरकरार रखते हुए ही इसे जीत सकते हैं।