तेजस की इन खूबियों को जानते हैं?

देश की पहली फुल एसी सेमी हाईस्पीड ट्रेन तेजस को अगर पटरी पर दौड़ता विमान कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस ट्रेन में ऐसी कई खासियतें हैं, जो आपको विमान में बैठने का अनुभव प्रदान करती हैं. मुंबई और गोवा के बीच चलने वाली इस ट्रेन में एलईडी टीवी से लेकर चाय-कॉफ़ी वेंडिंग मशीन जैसी तमाम सुविधाएं हैं.

सुविधाएं ज्यादा हैं, तो जायज है किराया भी ज्यादा होगा. तेजस में सवारी के लिए आपको शताब्दी के मुकाबले 20 फीसदी अधिक किराया चुकाना होगा. मुंबई से करमाली के लिए एसी चेयर कार का किराया 1,190 रुपए है. जबकि मुंबई से रत्नागिरी का किराया 835 रुपए. एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया इससे अधिक रहेगा.

यह ट्रेन सप्ताह में पांच दिन चलेगी. इसकी तरह मानसून सीजन में 10 जून से 31 जून तक यह सोमवार, बुधवार और शनिवार को ही चलेगी. तेजस के डिब्बे 200 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ने में सक्षम हैं. हालांकि फिलहाल ट्रेन की रफ़्तार 160 ही रहेगी.

इस ट्रेन में यात्रियों के मनोरंजन का पूरा ख्याल रखा गया है. विमान की तरह सामने वाली सीट पर स्क्रीन लगी हुई है, जिसमें यात्री टीवी देख सकते हैं. स्क्रीन पर वॉल्यूम कंट्रोल करने के आप्शन भी मौजूद रहेंगे.

तेजस में आपको वाईफाई की सुविधा भी मिलेगी. इतना ही नहीं, जिस तरह विमान में ज़रूरत पड़ने पर बटन दबाकर आप एयर होस्टेस को बुला सकते हैं. वैसे ही यहां बटन दबाने पर अटेंडेंट हाज़िर हो जाएगा.

आमतौर पर यात्रियों की शिकायत होती है कि सीट आरामदायक नहीं हैं, लेकिन तेजस में आप ऐसी शिकायत नहीं कर पाएंगे. क्योंकि इसकी सीट बहुत ज्यादा कंफर्टेबल हैं. आप अपनी सुविधा अनुसार सीट को एडजस्ट कर सकते हैं और इसमें पिलो भी लगा हुआ है.

यह भारतीय रेलवे की पहली ऐसी ट्रेन है, जिसमें मेट्रो की तरह स्लाइडिंग दरवाजे हैं. दरवाजों के कंट्रोल गार्ड के हाथ में होने के चलते, ट्रेन चलने के बाद या रुकने से पहले कोई भी चढ़ या उतर नहीं पाएगा. इससे हादसों को कम करने में भी मदद मिलेगी.

ट्रेन में सीसीटीवी कैमरों के अलावा पैसेंजर इंफार्मेशन सिस्टम भी लगाया गया है. इस सिस्टम की मदद से यात्रियों को यह पता चल सकेगा कि कौनसा स्टेशन आने वाला है. ट्रेन में एलईडी लाइटिंग के अलावा डिजिटल डेस्टिनेशन बोर्ड हैं. तेजस में कम पानी की खपत वाले बायो वैक्यूम टॉयलेट हैं.

ये हैं दुनिया के 5 सबसे बड़े बम

अमेरिका ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत नांगरहार में अब तक का सबसे बड़ा बम गिराकर दुनिया में खलबली मचा दी है. अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाया है. आपको बता दें कि एक गैर परमाणु हथियार के इस्तेमाल के लिए सेना को राष्ट्रपति की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती. वैसे ये एकमात्र सबसे बड़ा बम या मदर ऑफ़ ऑल बॉम नहीं है, आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही घातक बमों के बारे में:

मदर ऑफ़ ऑल बॉम (GBU-43/B)
अमेरिका ने पहली बार इस बम का इस्तेमाल किया है. 30 फुट लंबे और 9800 किलोग्राम वजनी इस बम को जीपीएस से संचालित किया जाता है. इसे MC-130 ट्रांसपोर्ट प्लेन से फेंका जाता है और  ज़मीन पर गिरते ही यह धमाका कर देता है. इसका मुख्य असर धमाके के गुबार के रूप में होता है. जो हर दिशा में एक मील तक फैल जाता है. इस बम पर एल्यूमीनियम का पतला आवरण होता है. इसका काम मुख्यतौर पर बंकरों और भूमिगत सुरंगों को नष्ट करना है. अमेरिका ने इराक युद्ध के दौरान इसे बनाया था, तब इसकी लागत 16 मिलियन डॉलर आई थी.

बंकर-बस्टर (MOP)
ये अमेरिका का एक और गैर-परमाणु बम है. इसका असल नाम है मैसिव ऑर्डिनेंस पेनिट्रेटर यानी एमओपी को जिसे बंकर-बस्टर भी कहा जाता है. इसका वजन 14000 किलोग्राम है और लम्बाई 20.5 फुट. बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक यह दुनिया का सबसे बड़ा गैर-परमाणु हथियार है, जिसे जमीन के अंदर लोकेशन और बंकरों को निशाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. ये सुपरसोनिक रफ़्तार से ज़मीन से टकराता है. एमओपी 200 फुट गहराई तक जा सकता है और 60 फुट कंक्रीट तोड़ सकता है.
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फादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब (ATBIP)
रूस का विएशन थर्मोबैरिक बॉम ऑफ़ इंक्रीज़्ड पावर (ATBIP) एक विशालकाय बम है. वॉर हिस्ट्री ऑनलाइन के मुताबिक, रूसी जनरल स्टाफ के डिप्टी चीफ ने बम के बारे में एक बार कहा था कि जो भी जीवित है, वो भाप बनकर उड़ जाएगा. यह एक तरह से फ्यूल-एयर बम है. तकनीकी रूप से इसे थर्मोबैरिक हथियार के रूप में जाना जाता है. इसका वजन 7100 किलोग्राम.

जीबीयू-28 हार्ड टारगेट पेनेट्रेटर
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायल और दक्षिण कोरिया की वायु सेनाओं के पास 2300 किलोग्राम वजन वाले जीबीयू-28  बंकर बस्टर बम हैं. हालांकि दोनों यह बम अमेरिका से मिलते हैं. अमेरिका ने 1991  में इराकी बंकरों, सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए प्रयोग किए थे. कहा जाता है कि ये 6 मीटर मोटी कंक्रीट में भी छेद कर सकते हैं.

स्पाइस बम
यह भारतीय वायु सेना के ज़खीरे में शामिल सबसे बड़ा बम है. इसे इसरायल की रफ़ेल एडवांस्ड डिफ़ेंस सिस्टम्स लिमिटेड ने बनाया है. इसे गिराने के लिए फ्रांस में बने मिराज 2000 लड़ाकू विमानों का उपयोग किया जा सकता है. वजन की बात करें तो यह करीब 900 किलोग्राम का है. हमारे पड़ोसी चीन के पास भी 250 से 1350 किलोग्राम वाले बम होने की बात कही जाती है. हालांकि उसके हथियारों का सही आंकलन लगाना मुश्किल है.

बंद होते ही पेंटिंग बन जाएगा TV

कितना अच्छा हो अगर टीवी (TV) को कभी बंद करने की ज़रूरत ही न पड़े, या जब वो इस्तेमाल में न हो तो बोरिंग काली स्क्रीन के बजाए किसी खूबसूरत पेंटिंग में तब्दील हो जाए. सुनने ये ज़रूर कुछ अजीब लग रहा हो, लेकिन सैमसंग ने इसे सच कर दिखाया है. TVसैमसंग ने अल्ट्राथिन टीवी “द फ्रेम” पेश किया है. लकड़ी के फ्रेम में फिट यह टीवी देखने पर किसी पिक्चर फ्रेम की तरह नज़र आता है और यदि आप आर्ट-मोड एक्टिव कर देते हैं तो यह पारंपरिक काली स्क्रीन के बजाए पेंटिंग का रूप ले लेता है. एक और अच्छी बात ये है कि टीवी इनविजिबल कनेक्शन से लैस है, यानी आपको तारें कहीं दिखाई नहीं देंगी, इतना ही नहीं इसे पेंटिंग की तरह किसी भी दीवार पर टांगा जा सकता है, क्योंकि इसमें नो-गैप वल्ले वॉल-माउंट सुविधा है.

“द फ्रेम” को जनवरी में अमेरिका में हुए कंजुमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो में सबसे पहले प्रदर्शित किया गया था. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका के एसवीपी देव दास कहते हैं, “इस साल हम स्मार्ट फीचर्स, क्राफ्टमैनशिप और क्रिएटिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं. फ्रेम आपको टीवी से कुछ ज्यादा सोचने का मौका देता है”

10 कैटेगरी
कंपनी ने कुल 10 अलग-अलग कैटेगरी में 100 आर्ट सेट डिज़ाइन किए हैं. आप अपनी पसंद अनुसार लैंडस्केप, आर्किटेक्चर, वाइल्डलाइफ, एक्शन और ड्राइंग आदि आर्ट वाला टीवी चुन सकते हैं. जब आप टीवी नहीं देख रहे होंगे तो आपका टीवी आपके इन पेंटिंग में तब्दील हो जाएगा. कंपनी के मुताबिक “द फ्रेम” गर्मियों तक बाज़ार में लांच कर दिया जाएगा.

एक लीटर में 200 किमी चलेगी यह कार!

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ज्यादातर लोगों की यही शिकायत रहती है कि उनकी कार अच्छा एवरेज नहीं देती। इस शिकायत को दूर करने के लिए बेंगलुरु स्थित रेवा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र एक कॉन्सेप्ट कार डेवलप कर रहे हैं, जो एक लीटर में 200 से 250 किमी की दूरी तय कर सकती है। अगर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भविष्य में इस कॉन्सेप्ट को अपनाती है, तो तेल के बढ़ते दाम परेशानी की वजह नहीं रह जाएंगे। यह कार सिंगापुर में अगले साल होने वाले शेल इको मैराथन में प्रदर्शित की जाएगी। प्रोफेसर शहनवाज और मोहम्मद इरफान के मार्गदर्शन में बनी टीम इस कॉन्सेप्ट कार को डिजाइन कर रही है। जिसमें अमर्त्य साह, मुजकिर शरीफ, मोहम्मद इरफान, एसके मेहबूब मुर्शीद, मोहम्मद आतिफ, तोयोद हलदार, सुजीत राणा, नीतेश प्रजापति, मयुख तालुकदार, रेबु नासकार और एसके मुस्तफा शामिल हैं। साह के मुताबिक, इस कार में दो सीटें होंगी। इसे फ्यूल एफिशिएंट कार के तौर पर डिजाइन किया गया है।

काफी हल्की
अमर्त्य साह ने बताया कि कॉन्सेप्ट कार का इंजन सामान्य कारों की तुलना में अलग होगी। सिलेंडर और उसके हेड जरूरत के मुताबिक तैयार किए गए हैं। कार्ब्युरेटर की जगह इलेक्ट्रिकल फिउल इंजेक्शन सिस्टम इस्तेमाल किया गया है। अधिकतम माइलेज के लिए गाड़ी को काफी हल्का बनाया गया है।

इस बच्चे में हैं तीन लोगों के डीएनए!

क्या एक बच्चे के शरीर में तीन लोगों के डीएनए हो सकते हैं? सरल शब्दों में कहें तो क्या एक बच्चे के तीन बॉयोलॉजिकल मां-बाप हो सकते हैं? कुछ वक्त पहले तक इस सवाल का जवाब शायद न होता, लेकिन अब यह मुमकिन है। अमेरिकी डॉक्टरों की टीम ने यह करिश्मा कर दिखाया है। पांच महीने के हो चुके इस बच्चे में अपने माता-पिता के डीएनए के साथ साथ डोनर महिला का डीएनए भी है। डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चा उस आनुवांशिक स्थिति से मुक्त होगा, जो उसकी मां के जीन में है। जिस नई तकनीक से यह संभव हो सका, उसे तीन व्यक्ति प्रजनन या स्पिंडल न्यूक्लियर ट्रांसफर नाम दिया गया है।

dr-zhang-with-childदरअसल, जॉर्डन निवासी महिला के माइटोकॉन्ड्रिया में आनुवांशिक दोष था, जिससे उसके बच्चे को लेह सिंड्रोम नामक विकार हो सकता था, जिससे उसकी जान भी जा सकती थी। न्यूयॉर्क के न्यूहोप फर्टिलिटी सेंटर ने इसे देखते हुए स्पिंडल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक के इस्तेमाल का फैसला लिया। हालांकि अमेरिका में इस प्रक्रिया की अनुमति नहीं होने चलते यह मुमकिन नहीं था। इसलिए डॉक्टरों की टीम महिला को मैक्सिको ले गई, जहां उसका सफल इलाज हुआ। यह परिवार पहले चार गर्भपात और दो बच्चों की मौत का सदमा झेल चुका था।

कैसे मिली सफलता
डॉक्टरों ने चरणबद्ध तरीके से इस काम को अंजाम दिया। उन्होंने पहले खराब माइटोकॉन्ड्रिया वाली मां के अंडाणु से केंद्रक ;न्यूकलियस द्ध को निकालकर सुरक्षित रखा। फिर डोनर मां सेहतमंद माइटोकॉन्ड्रिया वाली कोशिका के केंद्रक को हटाया। इसके बाद डोनर मां के अंडाणु में वास्तविक मां का केंद्रक स्थापित किया गया। इस प्रकार दो मां और एक पुरुष के जीन मिलने से शिशु का जन्म हुआ।

क्या है माइटोकॉन्ड्रिया?
हर कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया होता है, जिसका काम कोशिका को ऊर्जा प्रदान करना होता है। इसे कोशिका का पावर हाउस भी कहा जाता है। कुछ महिलाओं के माइटोकॉन्ड्रिया में आनुवांशिक दोष पाए जाते हैं। जिसका असर उनके होने वाले बच्चों पर दिखाई देता है। माइटोकॉन्ड्रिया की खासियत यह है कि ये केवल मां से ही विरासत में मिलते हैं, पिता से नहीं।

क्या है लेह सिंड्रोम
लेह सिंड्रोम एक गंभीर मस्तिष्क संबंधी विकार है, जिसके चलते 40 हजार नवजात शिशुओं में कम से कम एक प्रभावित होता है। यह विकास जानलेवा है। इससे पीडि़त अधिकतर बच्चे दम तोड़ देते हैं।

1990 में शुरुआत
वैसे ये पहली बार नहीं है कि जब तीन लोगों के डीएनए के इस्तेमाल से बच्चा पैदा किया गया है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक के आखिरी में हुई थी, लेकिन उसमें कई खामियां थीं। अमेरिकी डॉक्टरों ने उन खामियों को दूर करते हुए एकदम नई तकनीक का इस्तेमाल किया है।

Knowledge Booster: जानें क्या है एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन

  • Boost your Knowledge….

अगर आप वॉट्सएप इस्तेमाल करते हैं, तो एंड टू एंड एनक्रिप्शन का नाम तो जरूर सुना होगा। शायद आप उसके बारे में थोड़ा बहुत जानते भी हों। वॉट्सएप ने कुछ वक्त पहले ही इस सुविधा का तोहफा अपने यूजर्स को दिया है। दरअसल एंड टू एंड एनक्रिप्शन एक Knowledgसिक्योरिटी फीचर है। इसका मतलब है कि आपके द्वारा शेयर किया गया डाटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। फिर भले ही वह चैट, इमेज, वीडियो या मैप के रूप में हो।

कैसे करता है काम
पहले की बात करें तो जब आप वॉट्सएप पर संदेश भेजते थे, तो वह टेक्स्ट फॉर्मेट में डिलेवर होता था। जिसके चलते कोई भी हैकर आसानी से उसे पढ़ सकता था। मगर अब ऐसा नहीं होगा। एंड टू एंड एनक्रिप्शन फीचर के चलते आपके द्वारा भेजे जाने वाले संदेश टेक्स्ट के बजाए एक कोड में कन्वर्ट होकर जाएगा और सीधे रिसीव करने वाले के फोन पर पहुंचकर डीकोड होगा। यानी अब वॉट्सएप पर आपके संदेशों को कोई तीसरा यानी हैकर पढ़ नहीं पाएगा।

ऐसे रिकवर करें डिलीट हुईं Photos

कभी-कभी फोन की सफाई करते-करते वो Photos भी गलती से डिलीट हो जाती हैं, जो हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण थीं। ऐसी स्थिति में पछतावा करने के Recoverअलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता। हम खुद को कोसते हैं, आसपास पड़ी चीजों पर गुस्सा निकालते हैं। गलती से हुई गलती के लिए आपको पछताना न पड़े, इसलिए हम आपको कुछ ऐसे ट्रिक्स बताने जा रहे हैं जिससे आप डिलीट हुईं Photos को आसानी से रिकवर कर सकते हैं।

  • बाजार में कई ऐसे सॉफ्टवेयर हैं, जो चंद मिनटों में डिलीट हुईं फोटो रिकवर कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है। मसलन, रिकवरी तक नई फोटो क्लिक न करें, और न ही फोन में किसी तरह के डाटा का आदान-प्रदान करें। दरअसल फोन मैमोरी से डिलीट फोटो ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा छिपा दी जाती हैं और उनकी जगह नई फोटो ले लेती हैं। ऐसे में यदि आप नई तस्वीरें क्लिक करेंगे तो डिलीट हुईं फोटो का वापस पाना मुश्किल हो जाएगा।
  • रिकवरी के लिए सबसे पहले सबसे आप देखें कि उन फोटो की लोकेशन कहां था, यानी उन्हें कहा सेव किया गया था मैमोरी में या मैमोरी कार्ड में। अगर डिलीट की गईं फोटो मैमोरी कार्ड में थीं, और कार्ड फॉर्मेट किया जा चुका है तो बिना प्रोफेशनल मदद के उन्हें वापस नहीं पाया जा सकता। लेकिन यदि अगर कार्ड फॉर्मेट नहीं किया गया है, तो रिकवरी मुमकिन है।
  • रिकवरी के लिए मैमोरी कार्ड को कम्प्यूटर से कनेक्ट करें और कार्ड का पूरा बैकअप लें। इसके बाद आपको फोटो रिकवरी सॉफ्टवेयर की मदद लेनी होगी। Asoftech Photo Recovery इस मामले में सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर है। इसे डॉउनलोड करने के बाद अपने कम्प्यूटर में इंस्टॉल कर लें। फिर फोन के मैमोरी कार्ड को रीडर के माध्यम से कम्प्यूटर से जोड़ें।
  • अगर डिलीट की गईं फोटो फोन की मैमोरी में सेव थीं, तो उसे यूएसबी केबल के साथ कम्प्यूटर से कनेक्ट कर लें। फिर Asoftech Photo Recovery सॉफ्टवेयर पर क्लिक करें और संबंधित ड्राइव सिलेक्ट करें। स्कैनिंग पूरी होने पर सॉफ्टवेयर उन फोटो की सूची आपको दिखाएगा, जो रिकवर की जा सकती हैं। जो फोटो आपको रिकवर करनी है, उसे सिलेक्ट कर रिकवरी विकल्प पर क्लिक करें। चंद ही मिनटों में वो फोटो आपके फोन पर पुन: लौट आएंगी।
APP ढूंढेगा हिडन कैमरा

 

हिडन कैमरे आजकल सबसे बड़ी परेशानी बन गए हैं। ट्रायल रूम से लेकर टॉयलेट तक आपको बस यही डर सताता रहता है कि कहीं कोई आप पर camraनजर तो नहीं रख रहा। इस डर को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है एक मोबाइल APP। हिडन कैमरा डिटेक्टर नामक एप गूग प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसके इस्तेमाल से आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आसपास कोई छुपा कैमरा तो नहीं है। इसके अलावा अगर कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, तो उसका भी पता लगाया जा सकता है। अपने स्मार्टफोन के हार्डवेयर की मदद से आप इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड की पहचान कर सकते हैं। बस APP डाउनलोड कीजिए और जहां आप हैं वहां अपने स्मार्टफोन के साथ थोड़ा घूम लीजिए। अगर आपके फोन पर कोई सिग्नल मिलता है तो इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कहीं छुपा रखा है।

कैसे करता है काम
हिडन कैमरा डिटेक्टर रेडिएशन के आधार पर काम करता है। एप इंस्टॉल करने के बाद जब आप किसी ऐसी जगह जाते हैं जहां कैमरे छिपे हैं, तो यह उन कैमरों की रेडिएशन पकडक़र आपके स्मार्टफोन को इसकी सूचना देता है। आपके फोन की स्क्रीन पर एक लाल रंग का निशान दिखाई देने लगता है, जिसका मतलब है कि जहां आप खड़े हैं, वहां कोई हिडन कैमरा है।

क्या करें
अगर आप छुपे कैमरों का पता लगा लेते हैं, तो दूसरों की नजरों से बचने के लिए उस पर टेप या कपड़ा लगा सकते हैं। इससे भी ज्यादा अच्छा होगा कि आप तुरंत बाहर आ जाएं और संबंधित व्यक्ति से इसकी रिपोर्ट करें। यदि कैमरा होटल के बेडरूम, ट्रायल रूम या टॉयलेट आदि में है तो पुलिस को भी इससे अवगत कराया जा सकता है।

महिलाएं भी खड़े होकर कर सकेंगी टॉयलेट

कई बार ऐसा होता है कि हम घर के बाहर होते हैं और नेचर्स कॉल आ जाती है। पुरुषों को इस मामले में ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन महिलाurenओं के लिए मरना हो जाता है। हालांकि महिलाओं की कंट्रोलिंग पावर पुरुषों से ज्यादा होती है, मगर उसकी भी एक सीमा है। इस समस्या को दूर करने के लिए एक भारतीय इंटरप्योनर ने खास डिवाइस (Device) तैयार की है, जिसकी मदद से महिलाएं भी पुरुषों की माफिक खड़े होकर टॉयलेट (Toilet) कर सकेंगी। हमारे देश में एक तो पहले से ही पब्लिक टॉयलेट्स की कमी है, और जो हैं वो इतने गंदे रहते हैं कि उनके नाम से ही डर लगने लगता है। अगर यह डिवाइस पूरी तरह से अमल में आ गई तो महिलाओं को गंदे पब्लिक टॉयलेट्स का सहारा लेने की भी जरूरत नहीं होगी। जिन महिलाओं को झुकने में परेशानी होती है, उनके लिए भी यह डिवाइस बेहद कारगर साबित होगी। सबसे खास बात कि डिवाइस बहुत हैंडी है, इसे आसानी से बैग में रखा जा सकता है। इसके अलावा डिवाइस की कीमत भी ज्यादा नहीं है, यानी आम महिलाएं भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी।

एप याद दिलाएगा, पक्षियों के लिए पानी रखा क्या?

हममें से ऐसे कई लोग होंगे जो पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए बालकनी या टेरिस पर पानी का कटोरा रखते तो हैं, लेकिन उसे भरना अक्सर भूल जाते हैं। जब पक्षियों को खाली कटोरे में पानी के लिए चोंच मारते देखते हैं, तब हमें अपनी गलती का अहसास होता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सूरत के गैर सरकारी संगठन प्रयास ने हैदराबाद की ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल के साथ मिलकर एक मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार की है, जो हमें याद दिलाएगी कि कटोरे में पानी भरना है। इस एप का नाम बर्ड टैप नाम रखा गया है। प्रयास की तरफ से पक्षीbird प्रेमियों में मिट्टी के कटोरे मुफ्त बांटे जाते हैं, संस्था ने इसके लिए सूरत में जगह-जगह डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर भी स्थापित किए हैं। प्रयास के अध्यक्ष दर्शन देसाई कहते हैं, एनिमल वेलफेयर के लिए पिछले काफी सालों से काम कर रहे हैं और गर्मियों के मौसम में सैंकड़ों मिट्टी के कटोरे भी वितरित कर चुके हैं। इसका उद्देश्य यही है कि पानी के लिए पक्षियों को ज्यादा न भटकना पड़े, लेकिन कटोरों का वाजिब इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, इस पर नजर रखना हमारे लिए मुमकिन नहीं हो पाता। इसे ध्यान में रखते हुए हमने मोबाइल एप लांच किया, अब हमारे के लिए मिट्टी के कटोरों को इंस्टॉल और मेंटेन करना काफी आसान हो जाएगा।

क्या करना है
अगर आपको पानी रखने के लिए मुफ्त कटोरा चाहिए तो एप के माध्यम से नाम, मोबाइल नंबर आदि जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके बाद आपको बाउल डिस्ट्रीब्यूटर्स की लिस्ट में से किसी एक का चुनाव करना होगा। इस प्रक्रिया के बाद एक यूनिक टोकन नंबर जारी किया जाएगा, जिसे संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर को दिखाने पर कटोरा मिल जाएगा। उपयोगकर्ता को बाउल मिलने की पुष्टि करने के लिए एप में दिए पॉट रिसीव्ड बटन पर क्लिक भी करना होगा। दूसरे चरण में उपयोगकर्ता को कटोरे की फोटो खींचकर उसे एप पर अपलोड करनी होगी।

कैसे करेगा काम
दर्शन के मुताबिक, प्रारंभिक शोध में हमने ये पाया कि पानी का एक कटोरा गर्मियों के मौसम में लगभग तीन घंटे में खाली हो जाता है। इस लिहाज से हम एप उपयोगकर्ताओं को नोटिफिकेशन भेजकर कटोरा भरने की याद दिलाते हैं। सबसे पहले सुबह 9 बजे नोटिफिकेशन भेजी जाती है, इसके बाद दिन में तीन बार उन्हें रिमाइंड कराया जाता है। इसी साल मई में लांच हुए बर्ड टैप एप का अब तक 3500 से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।