सुखविंदर से Radhe Maa बनने की कहानी

सुखविंदर से Radhe Maa बनने की कहानी

सनी लियोनी के बाद आजकल राधे मां इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली शख्सियत बन गई हैं। संयोग देखिए कि आध्यात्मिक चोला ओढऩे वालीं राधे मां कभी पॉर्न स्टार रहीं सनी की फैन भी हैं। हालांकि इस वक्त उनकी चर्चा किसी दूसरी वजह को लेकर हो रही है। उन पर दहेज उत्पीडऩ और अश्लीलता फैलाने जैसे कई आरोप हैं। दरअसल, कुछ वक्त पहले राधे मां की स्कर्ट पहनें कुछ तस्वीरें सामने आईं, जिसके बाद उनके आध्यात्म के चोले पर सवाल उठने लगे। मुंबई की एक महिला वकील द्वारा केस दर्ज कराने के बाद तो राधे मां मीडिया की सुर्खियों में आ radhe-maaगईं। यहीं से उनकी पुलिस स्टेशन और अदालतों तक चक्कर लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई। वैसे, राधे मां कानून के खौफ के बीच ज्यादा दिनों तक रह पाएंगी इसकी संभावना बेहद कम है, क्योंकि उनके खिलाफ आरोप इतने पुख्ता भी नहीं हैं। दूसरे साधू-संतों की तरह राधे मां के पीछे भी भक्तों की लंबी-चौड़ी फौज है, जो किसी हाल में उन्हें गलत समझने को तैयार नहीं। मुंबई में राधे मां के दो आश्रम हैं, और दोनों ही जगह आलीशान गाडिय़ों में आने वाले उनके भक्त आज भी उनके प्रति पूरी श्रद्धा और आस्था रखते हैं। गुरदासपुर जिले के दोरांगला गांव में जहां राधे मां का जन्म हुआ, वहां तो  उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है। हर गली-चौराहे पर राधे मां की तस्वीर दिखाई देती है। आस्था और अंधविश्वास का ये संगम केवल राधे मां तक ही सीमित नहीं हैं, आसाराम बापू के भक्त भी उन्हें भगवान से कम नहीं समझते। जबकि बापू बलात्कार के आरोप में जेल में दिन गुजार रहे हैं। खुद को देवी मां का अवतार कहलवाने वालीं Radhe Maa को कुछ साल पहले तक सुखविंदर कौर के रूप में पहचाना जाता था। एक सामान्य ग्रहणी, जिसने अपने पति का हाथ बंटाने के लिए सिलाई शुरू की, और देखते ही देखते विख्यात बन गई। पंजाब के होशियारपुर जिले के मुकेरियान गांव में सुखविंदर ऊर्फ राधे मां अपने पति सरदार मोहन सिंह के साथ रहती थीं।

पति की मिठाई की दुकान से जो कमाई होती, उसमें घर तो चल जाता, लेकिन परेशानियों के साथ। इसके चलते सुखविंदर ने सिलाई करना शुरू किया, मगर उसकी अपेक्षाएं इससे भी संतुष्ट नहीं हुई। कुछ साल तक सबकुछ ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन सुखविंदर के पति की दुबई में नौकरी लग गई। परिवार के लिए ये खुशी का पल था, मगर कोई नहीं जानता था कि यहीं से सुखविंदर के एक नए जीवन की शुरुआत होगी। समय काटने के लिए सुखविंदर ने कुछ सहेलियों की सलाह पर परमहंस डेरा जाना शुरू कर दिया। सत्संग सुनते-सुनते सुखविंदर उसमें इतनी रम गई कि, अपने बच्चों को भी जिंदगी से अलग कर दिया। खुद को साध्वी के रूप में स्थापित करने के लिए उसने पहले माता की चौकियां करना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे खुद सत्संग देने लगी। उन्होंने डेरा प्रमुख रामदीन दास के साथ भी कई सत्संगों में हिस्सा लिया। हालांकि अब तक राधे मां का दायरा केवल पंजाब तक ही सीमित था, लेकिन एक घटना के बाद उन्हें देशभर में पहचाना जाने लगा। 2004 में जब सुखविंदर ने खुद को देवी का अवतार करार दिया तो कुछ हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया। जिसके बाद उन्हें पंजाब छोडक़र मुंबई आना पड़ा। देश की आर्थिक राजधानी में राधे मां को बिजनेसमैन संजीव गुप्ता का साथ मिला।

आज भी मुंबई में Radhe Maa जहां आश्रम चलाती हैं, वो जगह गुप्ता की ही है। सही मायने में देखा जाए तो सुखविंदर को राधे मां के रूप में लोगों की जुबान पर चढ़ाने में गुप्ता की भूमिका सबसे अहम रही। गुप्ता एक एडवरटाइजिंग कंपनी के मालिक हैं और मुंबई में जगह-जगह राधे मां के होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर लगाकर उन्होंने लोगों को एक नई साध्वी के उदय का अहसास कराया। मुंबई में कारोबार जमने के बाद राधे मां ने पंजाब जाना कम कर दिया। हालांकि, मुकेरिया गांव के खानपुर में राधे मां का एक मंदिर आज भी है, जिसे कोई और नहीं बल्कि उनकी बहन चलाती हैं। यहां वो राधे मां की तरह ही लोगों की परेशानियां दूर करने का दावा करती हैं।

पुणे में बच्चों की हैं फैक्टरियां

सुखविंदर कौन ने अपने भगवा चोला ओढऩे की धुन में अपने बच्चों को खुद से अलग कर दिया था। हालांकि बाद में जब वो मुंबई बस गईं तो उनके बच्चे और पति उनके साथ ही रहने लगे। राधे मां के भक्त कहते हैं कि वो अपने पति और बच्चों को केवल भक्तों की नजर से देखती हैं। राधे मां के दो लडक़े हैं और दोनों पुणे में अपनी-अपनी फैक्टरियां चला रहे हैं। कहने वाले यहां तक कहते हैं कि राधे मां ने आध्यात्म की आड़ में जो कमाया उससे अपने बेटों का जीवन सुधार किया। हालांकि, राधे मां और उनके भक्त इन आरोपों से इत्तेफाक नहीं रखते। राधे मां के बेटे और पति ने भी अब उन्हें गुरु कहना शुरू कर दिया है।

प्रसाद देने का तरीका

राधे मां गले लगाकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं, फिर चाहे वो कोई पुरुष हो या महिला। हाल ही में जब महाराष्ट्र के औरंगाबाद में पत्रकारों के सवाल सुनकर उन्हें बेहोशी छा गई थी तो एक पुरुष भक्त ने ही उन्हें गोद में उठाकर कार तक पहुंचाया था। वो अपने भक्तों की गोदी में सवार होने के भी मशहूर हैं। एक बात जो बहुत कम लोगों को पता है, वो ये कि राधे मां का प्रसाद देने का तरीका बेहद गंदा है। भक्तों के अलावा अगर कोई और उसे देख ले तो शायद उल्टी कर जाए। राधे मां के दरबार में ज्यादातर खीर का प्रसाद दिया जाता है। पहले वो खीर खुद मुंह में डालती हैं और चंद सेकेंड बाद उसे एक भक्त के हाथ पर निकाल देती हैं। फिर सभी भक्त उसमें से थोड़ा-थोड़ा खा लेते हैं। अगर कोई भक्त प्रसाद चढ़ाता है तो उसके साथ भी ऐसा ही किया जाता है।

बॉलीवुड में भी कद्रदान

राधे मां की छोटे कपड़ों में सामने आईं कुछ तस्वीरों को लेकर बॉलीवुड में भी अलग-अलग राय है। एक तरफ जहां सुभाष घई और राखी सावंत जैसी हस्तियां राधे मां का बचाव में हैं, वहीं ऋषि कपूर और विशाल ददलानी चुटकियां लेने से पीछे नहीं हटते। ऋषि कपूर ने राधे मां के साथ कुछ अन्य धर्मगुरुओं की फोटो ट्वीट कर कहा कि ऐसे लोगों को रोकना चाहिए जो अंधविश्वास फैलाते हैं। हालांकि, सुभाष घई इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने प्रेस को दिए एक बयान में कहा कि मैं और मेरी पत्नी राधे मां के भक्त हैं और उनके आश्रम भी जाते हैं, लेकिन हमें वहां कभी कोई आपत्तिजनक गतिविधि नहीं दिखी। उन्होंने आगे कहा, मैं जानता हूं कि राधे मां के अवतार अलावा वो एक आम लडक़ी भी हैं, जिन्हें शॉपिंग करना, घूमना, डांस करना पसंद है। घई की तरह पुणे स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट के विवादास्पद निदेशक गजेंद्र चौहान को भी लगता है कि राधे मां सही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर भी सर्कुलेट हो रही है, जिसमें वो राधे मां से आशीर्वाद लेते नजर आ रहे हैं। इसी तरह राखी सावंत और डॉली बिंद्रा में राधे मां के पक्ष में खड़ी हैं। बिंद्रा राधे मां की छोटे कपड़ों वाली तस्वीर पर कहती हैं, अच्छे कपड़ों में तस्वीर खिंचवाना में क्या गलत है। सावंत कहती हैं कि राधे मां के पास सकारात्मक शक्ति है, वो गलत नहीं हो सकतीं।

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