Election: भाजपा के अच्छे दिन, कांग्रेस की आंख में आंसू

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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे जहां कांग्रेस के लिए मायूसी भरे हैं, वहीं भाजपाई खेमे में उत्साह का माहौल है। भाजपा असम में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जादू बरकरार है, तो केरल में लेफ्ट गठबंधन एलडीफ को बहुमत मिला है। केरल और असम दोनों ही जगह चुनाव से पहले कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस के लिए तमिलनाडु में डीएमके के साथ जाना भी फायदेमंद साबित नहीं हुआ। राज्य में अम्मा की एआईडीएमके ने विपक्षी पार्टियों के लिए सारी संभावनाओं को खत्म कर दिया। नतीजों से गदगद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि देश कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ रहा है।

असम पर कब्जा
भाजपा के लिए असम में जीत काफी मायने रखती है। क्योंकि पार्टी ने 15 साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस उखाड़ फेंका है। भाजपा ने यहां केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को बतौर सीएम प्रोजेक्ट किया था। पार्टी को यहां असम गण परषिद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट जैसे क्षेत्रीय दलों का साथ मिला है। कांग्रेस के तीन बार से मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई के खिलाफ असंतोष का माहौल कायम हो गया था, जिसका खामियाजा उसे उठाना पड़ा।

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बंगाल में ममता राज
ममता बनर्जी के लिए चुनावी नतीजे राहत भरे हैं। राज्य के माहौल को देखते हुए माना जा रहा था कि इस बार पलड़ा भाजपा का भरी रह सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 2011 में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ममता ने 2014 में लोकसभा चुनाव में ज्यादा बड़ी जीत हासिल की थी और इस बार वे उससे भी आगे निकल गई हैं।
केरल से कांग्रेस दरकिनार
केरल में लेफ्ट ने शानदार प्रदर्शन किया है। वैसे यहां उत्तर प्रदेश की तरह हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा है। इसलिए पहले से ही माना जा रहा था कि बदलाव होगा। हालांकि वामदलों को इतना समर्थन मिलेगा इसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। भाजपा ने स्थानीय पार्टी भारत धर्म जन सेना के साथ गठबंधन किया था। पार्टी को आस थी कि उसके जरिए वो एझवा और नायर समुदाय के बीच बैठ बना सकती है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। चुनावी साल में लेफ्ट पार्टियों ने सोलर घोटाले को कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किया और इसमें सफल भी हुईं।
तमिलनाडु में अम्मा ही अम्मा
तमिलनाडु में अम्मा की आंधी बरकरार रही। अम्मा के लिए यह जीत काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की परंपरा हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की रही है। लेकिन इस बार जनता इस परंपरा को तोड़ते हुए जयललिता को बहुमत दिया। राजनीतिक विश्लेषक मानकर चल रहे थे इस बार एआईडीएमके को सत्ता से जाना होगा, क्योंकि बाढ़ के वक्त सरकार के कुप्रबंधन से जनता में खासी नाराजगी थी। इसके अलावा सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप भी लगे थे। मगर नतीजे अंदाजे से बिल्कुल अलग रहे। दरअसल, अम्मा ने सरकारी खजाने से तमाम ऐसी सब्सिडी योजनाएं शुरू की हैं, जिनकी वजह से उनकी छवि गरीब समर्थक सीएम की बन गई है। लोग इस बात को लेकर आशंकित थे कि अगर दूसरी सरकार बनती है तो शायद वो इन योजनाओं को बंद कर दे। इसलिए जनता ने अम्मा को एक और मौका दिया। वहीं पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन जीतने में सफल रहा है।

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