‘अब हर दावे पर होगा शक’

  • कांस्टेबल दंपति के झूठ से पुणे पुलिस शर्मिंदा

एवरेस्ट फतेह का झूठा दावा करने वाले युगल के चलते पुणे पुलिस को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। पुलिस कांस्टेबल दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ के दावे को नेपाल सरकार ने खारिज कर दिया है। साथ ही उन पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया है। इस संबंध में पुणे पुलिस को पत्र भेजकर सूचना दी गई है। पुलिस कमिश्नर रश्मि शुक्ला खुद मानती हैं कि इस घटना से पुलिस की छवि खराब हुई है। दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ का झूठ सामने आने के बाद से ही दोनों फरार है। दोनों शिवाजीनगर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ थे। मुख्यालय के पुलिसकर्मी इस बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहते, लेकिन वे इतना जरूर कहते हैं कि दिनेश और तारकेश्वरी ने पुलिस की छवि खराब की है।

policepuneहोता रहेगा शक
एक डीसीपी रैंक के अधिकारी ने कहा, महज लोकप्रियता हासिल करने के लिए इतना बड़ झूठ बोलने वालों को पुलिस में रहने का अधिकार नहीं है। पुलिसकर्मी होने के नाते उनका अपराध और भी बड़ा हो जाता है। भविष्य में जब कोई पुलिसकर्मी कोई रिकॉर्ड बनाएगा तो पहली बार में उसे भी शक की निगाहों से देखा जाएगा। राठौड़ दंपति के कृत्य की जितनी निंदा की जाए कम है।

दुख और गुस्सा
दिनेश को करीब से जानने वाले एक कांस्टेबल ने कहा, हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि वो इतना बड़ा झूठ बोल सकता है। पूरा डिपार्टमेंट उसके झूठ को सच मान रहा था, हम सभी बेहद खुश थे। दिनेश झूठ बोलने वाला व्यक्ति नहीं था। वो अपने काम से काम रखता था। हमें इस घटना पर दुख भी है और गुस्सा भी। दोनों ने फरार होकर बहुत बड़ी गलती की है। उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी।

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जाएगी नौकरी!
कमिश्नर शुक्ला ने कहा, दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय जांच के बाद से ही दोनों फरार हैं। माना जा रहा है कि उच्च अधिकारियों ने कांस्टेबल दंपति की बर्खास्तगी की सिफारिश की है। क्योंकि इस मामले ने पुलिस को शर्मसार किया है, इसलिए अधिकारी चाहते हैं कि दंड इतना सख्त हो कि फिर कोई पुलिसकर्मी झूठ बोलने का साहस न दिखा पाए। अगर दोनों की नौकरी बच भी जाती है तो उनका डिमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि रुकना तय है।

क्या है मामला
दिनेश और तार्केशवरी ने 5 जून को एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की थी कि उन्होंने 23 मई को एवरेस्ट फतेह किया था। पुणे पुलिस ने इसके लिए दोनों का सम्मान भी किया था। कांस्टेबल दंपति के इस दावे पर पर्वतरोहियों ने एक दल के आपत्ति जताई थी। जिसके बाद जांच शुरू हुई और नेपाल सरकार से संपर्क किया गया। अब नेपाल सरकार ने भी दिनेश के दावे को नकार दिया है।

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