इनके रक्त में है रक्तदान

अब तक 87 बार Blood Donate कर चुके हैं श्रीधर

ऐसे वक्त में जब खून के रिश्ते भी दगा दे जाते हैं, एनआर श्रीधर अपने खून से उन लोगों की जिंदगी संवार रहे हैं, जिनसे मानवता के अलावा उनका कोई जुड़ाव नहीं। आगरा निवासी श्रीधर अब तक 87 बार रक्तदान कर चुके हैं, ये आंकड़ा केवल आगरा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है। Sridharरक्तदान महादान को सही मायनों में चरितार्थ करने वाले श्रीधर के अथक प्रयासों के चलते करीब 200 लोगों को नई जिंदगी मिली है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी)में बतौर हायर ग्रेड असिस्टेंट कार्यरत श्रीधर की पहचान आगरा में रक्त दानवीर के तौर पर होती है। Blood Donation के प्रति श्रीधर की दीवानगी का आलम ये है कि जरूरतमंद के बारे में पता चलते ही वे सारे काम छोडक़र मदद को निकल जाते हैं। शहर के तकरीबन हर अस्पताल, ब्लड बैंक के पास श्रीधर का फोन नंबर है। जब भी किसी को बी निगेटिव की आवश्यकता होती है, सबसे पहला फोन श्रीधर को ही लगाया जाता है। मानवता की सेवा के लिए श्रीधर को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
लोगों को जीवन देने के श्रीधर के इस सफर की शुरुआत 19 साल पहले यानी 1989 में तब हुई जब अखबार के पन्ने पलटते-पलटते उनकी नजर एक सूचना पर गई। जिसमें बी निगेटिव ब्लड की आवश्यकता का जिक्र था। श्रीधर बताए गए पते पर तुरंत पहुंचे और खून देकर उस महिला की जान बचाई। तब से अब तक वे 87 बार रक्तदान कर चुके हैं। श्रीधर कहते हैं, जब मुझे पता चला कि मेरे खून देने के चलते उस महिला की जान बच सकी, तो एक अजीब सी खुशी हुई। आज भी जब रक्तदान करके आता हूं, खुद को बेहद हल्का महसूस करता हूं। इस बात की खुशी रहती है कि मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए मैं कुछ कर रहा हूं।

ऐसे आया ख्याल
श्रीधर बताते हैं कि रक्तदान का बीज उनके मन में स्कूलिंग के दौरान पड़ा। श्रीधर ने आगरा के प्रसिद्ध कॉन्वेंट स्कूल सेंट पीटर्स से पढ़ाई की है। MP S.P Singh Baghel giving award to Sridharएक दिन वे स्कूल की तरफ से एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रही तीन दिवसीय प्रदर्शनी देखने गए। जहां हेल्थ कार्ड बनाए बनाने के लिए उनका ब्लड टेस्ट किया गया। डॉक्टर ने श्रीधर को बताया कि उनका ब्लड ग्रुप बी निगेटिव है, जो काफी दुलर्भ होता है और इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। उसी वक्त उन्होंने फैसला कर लिया था कि वो बल्ड डोनेशन करके लोगों की मदद करेंगे।

पत्नी भी उनकी राह पर
श्रीधर की पत्नी अनुराधा भी उनकी राह पर चल रही हैं। वो भी अब तक चार बार रक्तदान कर चुकी हैं। इस बारे में श्रीधर ने कहा, मेरी पत्नी भी रक्तदान का महत्व जानती है। एक दिन उसने आकर मुझसे रक्तदान की इच्छा दशाई, तो काफी अच्छा लगा। श्रीधर अपने दोस्तों सहित हर मिलने-जुलने वाले को ब्लड डोनेट करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। उनकी बदौलत ही एलआईसी में एक ग्रुप स्थापित हो सका, जो जरूरमंदों को रक्तदान करता है।

मिलता है सुकून
श्रीधर रक्तदान के साथ-साथ जीव-जंतुओं के कल्याण के लिए भी काम करते रहते हैं। वे मेनका गांधी के संगठन पीपुल्स फॉर एनिमल्स से भी जुड़े IMG-20160115-WA0007हुए हैं। घर के आसपास यदि उन्हें कोई घायल पशु नजर आ जाता है, तो दवा लेकर उसके इलाज के लिए निकल पड़ते हैं। साथ ही वे समय-समय पर अनाथालय और कुष्ठ आश्रम जाना भी नहीं भूलते। श्रीधर कहते हैं, मैं केवल एक ही बात मानता हूं मानव सेवा-माधव सेवा। अगर भगवान ने हमें मनुष्य जन्म दिया है, तो उसे सार्थक करने के प्रयास करने चाहिए। मैं बस वही करने की कोशिश करता हूं। किसी जरूरतमंद की सहायता करने पर जो सुकून मिलता है, उसका अनुभव दौलत-शौहरत से भी नहीं हो सकता है।

पिता बने प्रेरणा
श्रीधर मूलरूप से दक्षिण भारत निवासी हैं, लेकिन पिताजी के केंद्रीय हिंदी संस्थान में कार्यरत होने के चलते पूरा परिवार आगरा में ही बस गया था। तमिलभाषी होने के बावजूद उनके पिता डॉ. एन.वी राजगोपालन ने हिंदी में पीएचडी की उपाधि हासिल की और कई वर्षों तक केंद्रीय हिंदी संस्थान में शीर्ष पद पर रहे। राजगोपालन अपनी ज्योतिष विद्या के लिए देशभर में विख्यात थे। श्रीधर अपने पिता को ही अपनी प्रेरणा मानते हैं।

One Response to "इनके रक्त में है रक्तदान"

Leave a Reply