जानें, बिल्डरों की मनमानी पर ऐसे लगेगी लगाम!

बिल्डरों की मनमानी और दादागिरी पर लगाम लगाने वाला रियल एस्टेट कानून (Real Estate Act) यानी रेरा आग से प्रभावी हो गया है. अब घर खरीदने वालों को बिल्डर परेशान नही कर पाएंगे और यदि वो ऐसा करते भी हैं तो उन्हें इसकी भरी कीमत अदा करनी होगी. यानी अब कांसुमेर सही मायनों में किंग कहलायेगा. आइए जानते हैं इस कानून से जुड़ीं कुछ अहम् बातें:

  • इस कानून के तहत राज्य स्तर पर रियल एस्टेट अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो खरीददारों  की शिकायतों का निपटारा करेगी. ख़ास बात यह है कि रियल एस्टेट एजेंट्स भी अथॉरिटी के साथ रजिस्टर होंगे, जिसका मतलब यह हुआ कि उनके द्वारा धोखाधड़ी की आशंका कम रहेगी. साथ ही ये केवल वही प्रोजेक्ट्स बेच पाएंगे, जो पंजीकृत हैं.
  • जुलाई तक सभी प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है. यानी अब बिल्डर कोई भी प्रोजेक्ट्स बिना रजिस्ट्रेशन की जारी नहीं रख पाएंगे. इतना ही नहीं पंजीकृत प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी अथॉरिटी को डी जाएगी. कानून के तहत बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा होने की तारिख देनी होगी.
  • यदि सही समय पर पजेशन नहीं दी जाती तो इसके लिए बिल्डर को जुर्माना भरना पड़ेगा, अब तक इसके लिए उपभोक्ता को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे. यानी अब बिल्डरों में समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने के दबाव रहेगा.
  • कानून में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि बिल्डरों को खरीदारों से लिया गया 70% पैसा प्रोजेक्ट के अकाउंट में रखना होगा. इसका इस्तेमाल वह केवल निर्माण कार्यों में ही कर सकेंगे. पहले बिल्डर इस पैसे का इस्तेमाल दूसरे प्रोजेक्ट्स या कामों में करते थे, जिस वजह से प्रोजेक्ट में देरी होती थी.
  • इस कानून से पारदर्शिता आएगी. पहले उपभोक्ता केवल वही जान पता था, जो बिल्डर द्वारा उसे बताया गया है, लेकिन अब वो अथॉरिटी की वेबसाइट पर जाकर सभी जानकारियां प्राप्त कर सकेगा. साथ ही प्रोजेक्ट में बिना खरीदार की अनुमति के कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा. मसलन, यदि बिल्डर ने आपसे लिफ्ट का वादा किया है, तो वो अपनी मर्जी से उस फैसले से पलट नहीं सकेगा.
  • प्रोजेक्ट की बिक्री सुपर एरिया पर नहीं बल्कि कॉर्पोरेट एरिया पर करनी होगी. नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने के साथ ही जेल का भी प्रावधान है.

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