Inspiration: जिंदगी ने छीने अपने, बचा रहे दूसरों की जिंदगी

कई बार ऐसा होता है कि चलते-चलते आप सड़क पर पड़े पत्थर से टकरा जाते हैं, आप कुछ देर रुककर पत्थर फेंकने वाले को गालियां देते हैं और फिर आगे accidentबढ़ जाते हैं। बिना इस बात की परवाह किए कि वो पत्थर कुछ और लोगों को चोटिल कर सकता है। केवल आप ही नहीं, अधिकतर लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी ही होती है। मगर दादराव बिल्लोरे और नेहा चराटी थोड़े अलग हैं। दूसरों की गलती की सजा भुगत रहे दादराव और नेहा अब इस जद्दोजहद में लगे हैं कि किसी अन्य को उस पीड़ा से न गुजरना पड़े, जो जिंदगी ने उन्हें दी है। दादराव को सड़क पर जब भी कोई गड्डा नजर आता है, वो उसे भरने बैठ जाते हैं। ठीक इसी तरह नेहा को जब नियम विरुद्ध बनाए गए किसी स्पीड ब्रेकर का पता चलत है तो वो उसे दुरुस्त करने वहां पहुंच जाती हैं। ददाराव और नेहा की कहानी हम सभी के लिए Inspiration है।

लापरवाही के गड्डे ने छीना बेटा
मुंबई निवासी दादराव बिल्लोरे ने पिछले साल 28 जुलाई को एक सडक़ हादसे में अपने 16 साल के बेटे प्रकाश को खो दिया था। प्रकाश अपने रिश्तेदार राम के साथ घर लौट रहा था। तभी जोगेशवरी-विखरोली मार्ग पर उनकी बाइक पानी से भरे एक गड्डे में फंसकर गिर गई। गड्डे की गहराई का potholesअंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रकाश और राम हवा में उछलकर काफी दूर जाकर गिरे। ज्यादा खून बहने की वजह से प्रकाश की मौत हो गई। ये गड्डा निर्माण कार्य के लिए खोदा गया था, जिसे भरने की जहमत न निजी कंपनी न उठाई और न ही महानगर पालिका ने। दादराव दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन वो ये नहीं चाहते कि प्रकाश की तरह किसी और घर का दीपक सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ जाए। इसलिए सडक़ पर जहां भी उन्हें गड्डा नजर आता है वो उसे भर देते हैं। 46 वर्षीय दादराव घूम-घूमकर सब्जी बेचते हैं। वो हमेशा अपने साथ पेवर ब्लॉक, मलबा, मिट्टी आदि रखते हैं, ताकि गड्डे को तुरंत भरा जा सके।

स्पीडब्रेकर बना काल
कोल्हापुर के गडहिंग्लज निवासी नेहा चराटी के लिए 4 अक्टूबर, 2015 का दिन सबसे काला साबित हुआ। इस दिन नेहा ने एक सडक़ हादसे में अपनी मां वीणा को हमेशा के लिए खो दिया। वीणा अपने पति विवेक के साथ स्कूटर पर सवार होकर बैंक जा रही थीं। जब उनका स्कूटर नगर परिषद के पास पहुंचा तो विवेक ने देखा कि एक कार काफी तेजी से उनके पीछे आ रही है। सामने स्पीड ब्रेकर देखकर विवेक को लगा कि अब कार ड्राइवर को स्पीड कम करनी ही पड़ेगी। लेकिन ड्राइवर को शायद स्पीड ब्रेकर नजर नहीं आया और उसने विवेक के स्कूटर को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। जिससे वीणा की मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि स्पीड ब्रेकर दूर से दिखाई नहीं देता। अपनी मां को खोने के गम में डूबी नेहा को जब ये बात चली तो उसने स्पीड ब्रेकर को रंगने का फैसला लिया। हालांकि इसके लिए उसे आरटीओ सहित सरकारी कार्यालयों से अनुमति लेनी पड़ी। नेहा की इस पहल के कुछ दिनों बाद प्रशासन जागा और पूरे गडहिंग्लज के गतिरोधकों को पेंट किया गया।

सुधार का प्रयास
नेहा कहती हैं, मेरी मां की मौत कार के ड्राइवर और नगर पालिका की लापरवाही के चलते हुई। अगर कार की स्पीड कम होती और स्पीड ब्रेकर रंगा होता तो शायद आज मेरी मां मेरे पास होतीं। मैं उन्हें वापस तो नहीं ला सकती, लेकिन इतनी कोशिश जरूर कर सकती हूं कि कोई और लापरवाही का शिकार न बने।

बेटे को श्रद्धांजलि
दादराव कहते हैं, बेटे के जाने के बाद परिवार की खुशियां चली गईं। उसकी कमी जिंदगी भर खलती रहेगी। सडक़ों की गड्डे भरकर मैं अपने बेटे को श्रद्धांजलि देता हूं और ये सुनिश्चित करने की कोशिश करता हूं कि किसी दूसरे को सरकारी लापरवाही के चलते अपनी जान न गंवानी पड़े। मैं ताउम्र ऐसे ही गड्डे भरता रहूंगा।

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