Jaipur रेलवे करेगा कचरे से प्यार

एक तरफ जहां रेलवे स्टेशनों पर कचरा कम करने के लिए मशक्कत की जा रही है, वहीं आने वाले दिनों में जयपुर रेल प्रशासन चाहेगा कि उसके परिसर में कचरा ज्यादा से ज्यादा हो। दरअसल, उत्तर दक्षिण रेलवे ने कचरे को कचरे की तरह इस्तेमाल करने के बजाए उसे ऊर्जा का स्रोत बनाने का फैसला लिया है। jaipur1इसके तहत Jaipur स्टेशन के पास बायोडिग्रेडबल और प्लास्टिक कचरे पर उपचार के लिए दो संयत्र लगाए जाएंगे, जो कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने का काम करेंगे। स्टेशन परिसर में हर रोज यात्रियों और वेंडरों द्वारा भरी मात्रा में कचरा किया जाता है। इसमें बायोडिग्रेडबल और नॉन-बायोडिग्रेडबल दोनों तरह का कचरा शामिल है। अब तक इस कचरे को साफ करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द था, लेकिन जल्द ही यह सिरदर्द उसके लिए दवा का काम करेगा। जनसंपर्क अधिकारी तरुण जैन ने बताया कि संयत्र की क्षमता 500 किलो बायोडिग्रेडबल कचरे को 22 किलो एलपीजी के बराबर बायो-गैस में बदलने की होगी। प्लास्टिक के कचरे पर उपचार के लिए बनने वाले संयत्र में 2000 किलो प्लास्टिक से डीजल बनाया जाएगा। जिसका इस्तेमाल रेल ईंजनों में होगा। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों संयत्र इस वित्तीय वर्ष तक काम करने लगेंगे। प्रशासन को विश्वास है कि संयत्रों के अमल में आने के बाद रेलवे ट्रैक और परिसर में कचरे की समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा। उत्तर दक्षिण रेलवे स्टेशन पर वॉटर रीसाइलिंग यूनिट लगाने पर भी विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो तकरीबन 80 फीसदी पानी को रीसाइकिल कर स्टेशन और वैगन आदि की सफाई में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे पानी की बचत होगी। इसके साथ ही सोलर संयत्र को अमल में लाने पर भी विचार चल रहा है। एक अधिकारी ने कहा, सोलर संयत्र हमारी ऊर्जा जरूरतों का करीब 8 प्रतिशत पूरा कर सकते है।

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