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प्रवीण अपनी जादूगरी कई अखबारों में दिखा चुके हैं। उनके काम करने की गति को देखकर सहकर्मी उन्हें माइकल शूमाकर बुलाते हैं। प्रवाीण को किसी भी खबर को डिजाइन करने में मुश्किल से चंद मिनटों का समय लगता है। प्रवीण उन लोगों में शुमार हैं, जिनके पास काम की कोई कमी नहीं, उल्टा उन्हें लोगों को मना करना पड़ता है। डिजाइनिंग के साथसाथ अब वे लेखन में भी खुद को स्थापित करने की कोशिशों में मशगूल हैं।

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