JNU: विदेशी मीडिया में मोदी सरकार की आलोचना

JNU प्रकरण को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आलोचना हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, “भारत अभिव्यक्ति की narendra modiस्वतंत्रता के पैरोकार लोगों के बीच हिंसक झड़प की वेदना झेल रहा है और प्रधानमंत्री मोदी इसे खामोश करने के लिए आतुर हैं”। अखबार ने आगे लिखा है कि टकराव ने मोदी के शासन के बारे में गंभीर चिंताएं उठाई हैं और यह आर्थिक सुधारों पर संसद में किसी प्रगति की राह में रोडा अटका सकती हैं। संदेश साफ है…उग्र राष्ट्रवाद के नाम पर हिंसा स्वीकार्य है। यहां तक कि अदालतें भी सुरक्षित स्थान नहीं हैं। राज्य या भाजपा को चुनौती खुद को जोखिम में डालकर मोल लें।

वहीं, फ्रांस के प्रमुख अखबार ल मोंड ने अपने संपादकीय में लिखा है,” मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारतीय लोकतंत्र के क्षितिज में बादल छाए हुए हैं। देशद्रोह के आरोप में एक छात्र नेता और एक पूर्व प्रोफेसर की गिरफ्तारी की आलोचना को चुप करने पर आतुर हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के तानाशाही रवैये का ताजा उदाहरण है”। संपादकीय में आगे लिखा गया है, “यह देखना विरोधाभासी है कि हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय ध्वज का बचाव कर रहे हैं, जिससे उन्होंने अपने भगवा झंडे को वरीयता देते हुए लंबे समय तक दूरी बनाए रखी”। न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि “पीट-पीटकर मार डालने को आतुर मानसिकता रखने वाली भीड़ की जिम्मेदारी मूल रूप से मोदी सरकार पर ही है। भारतीय नागरिकों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग के लिए सरकारी धमकियों के प्रति नाराजगी जताने का अधिकार है”।

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