हादसे के इंतजार में रेलवे!

जर्जर हो चुका है खड़की Railway Station पर लकड़ी का शेड……

पुणे रेल मंडल की लापरवाही कभी भी हादसे का सबब बन सकती है। खड़की स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर बना लकड़ी का शेड railwayजर्जर स्थिति में पहुंच गया है। हालात ये हो चले हैं कि लकड़ी गलकर कई जगह से टूट रही है, बावजूद इसके रेल प्रशासन नींद से जागने को तैयार नहीं। खड़की स्टेशन पर सबसे ज्यादा लोकल यात्रियों की भीड़ होती है, इसके अलावा कुछ एक्सप्रेस ट्रेनें भी यहां रूकती हैं। गर्मी के चलते अधिकतर यात्री सूरज की तपन से बचने के लिए शेड का सहारा लेते हैं, ऐसे में यदि शेड का छोटा हिस्सा भी गिरता है, तो जान माल का काफी नुकसान हो सकता है। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा, “प्रशासन महज पुणे स्टेशन तक सीमित होकर रह गया है। आला अधिकारी अक्सर पुणे स्टेशन का दौरा करते हैं, इसलिए छोटे स्टेशनों पर ध्यान नहीं दिया जाता”। अधिकारी के मुताबिक, पुणे मंडल में खड़की सहित कई ऐसे स्टेशन हैं, 20160422_072249जहां यात्री सुविधाएं नदारद हैं।

तो हटाया क्यों नहीं
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि प्लेटफॉर्म नंबर दो को टीन शेड से कवर करने के बाद भी पुराने लकड़ी के शेड को हटाया नहीं गया है। अगर रेल प्रशासन की नजर में पुराना शेड जरूरी है, तो उसकी मरम्मत पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। इस संबंध में पुणे मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झवर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।

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मुझे जानकारी नहीं
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इस संबंध में खड़की स्टेशन के स्टेशन मास्टर (एडमिनिस्ट्रेशनने कहा, यह सारी प्लानिंग हेड ऑफिस से होती है। उन्होंने इस बारे में क्या सोचा है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यहां कवर शेड कम है, मुझे लगता है इस वजह से पुराने शेड को नहीं हटाया गया होगा।

समझ से परे
खड़की से लोनावला के बीच सफर करने वाले प्रशांत रणपिसे ने कहा, वैसे तो हम लकड़ी के शेड के नीचे जाने से बचते हैं, लेकिन जब धूप सीधी होती है, तो इसका सहारा लेना ही पड़ता है। एक बात मुझे समझ नहीं रही है कि जब बड़ा शेड डाला गया है, तो फिर इसे हटाया क्यों नहीं जा रहा। या तो प्रशासन शेड दुरूस्त करे और यदि ऐसा नहीं कर सकता तो फिर इसे पूरी तरह हटा दे। 

हादसे पूछकर नहीं होते
इस संबंध में रेलवे प्रवासी ग्रुप की अध्यक्षा हर्षा शाह ने कहा, प्रशासन को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। हादसे किसी से पूछकर नहीं होते, यदि शेड गिर गया तो प्रशासन की ही बदनामी होगी। अगर पुणे मंडल को यात्रियों की चिंता नहीं है, तो कम से कम अपनी बदनामी के डर से ही शेड की मरम्मत करा दे। 

 

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