रावण से जुड़ीं ये हकीकत जानते हैं आप?

रावण के बारे में कई तरह की बातें की जाती हैं। मसलन, वो बहुत बुद्धिमान था, उसके जैसा शिव का भक्त कोई दूसरा नहीं हो सकता, उसने कभी किसी महिला पर बलपूर्वक अत्याचार नहीं किया आदि आदि। विजयदशमी को लेकर सोशल मीडिया पर इस तरह के संदेशों की बाढ़ आ गई है। हालांकि हकीकत इससे पूरी तरह जुदा है और आज हम आपको उसी हकीकत से रूबरू कराने जा रहे हैंः
ravanरावण के बारे में कहा जाता है कि उसने अपनी बहन के अपमान का बदलना लेने के लिए सीता का अपहरण किया। जबकि इसकी वजह कुछ और ही थी। रावण ने कई ़िस्त्रयों के साथ दुराचार किया था। जब शूर्पणखा ने रावण के सामने सीता की सुंदरता का वर्णन किया, तो उसके मन में सीता को प्राप्त करने की इच्छा जागृत हो उठी। और इसी इच्छा की पूर्ति के लिए उसने सीता का अपहरण किया।

कम ही लोग जानते हैं कि शूर्पणखा भी यही चाहती थी कि रावण का सर्वनाश हो जाए। दरअसल, शूर्पणखा का पति विद्युतजिव्ह कालकेय नामक राजा का सेनापति था। जब रावण का कालकेय से युद्ध हुआ तो उसने विघुतजिप्ह का भी वध कर दिया। इससे दुखी शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया था कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

रावण को इसलिए संयमी कहा जाता है कि उसने अपहरण के बाद भी कभी सीता को हाथ तक नहीं लगाया। जबकि यदि वो चाहता था बल का प्रयोग कर सकता था। दरअसल, रावण को कुबेर के पुत्र नलकुबेर ने श्राप दिया था कि अगर उसने किसी स्त्री को उसकी इच्छा के विरुद्ध छुआ तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे। इसी डर के चलते रावण ने कभी सीता को बलपूर्वक छूने का प्रयास नहीं किया।

रावण को सबसे बड़ा शिवभक्त कहा जाता है, लेकिन पौराणिक कथाओं में इसका जिक्र नहीं है। उनके अनुसार, जब रावण बैजनाथ का शिवलिंग लेकर जा रहा था, तो उसे लघुशंका आई, उसने ब्राह्मण के रूप में आए विष्णु को शिविंग थमा दिया और खुद निवृत्त होने चला गया। विष्णु शिवलिंग जमीन पर रखकर वहां से चले गए। जब रावण लौटकर आया तो उसने शिवलिंग उठाने की कोशिश, मगर वो हिला तक नहीं। इससे नाराज रावण ने मुक्के से प्रहार कर शिवलिंग को आधा जमीन में गाड़ दिया।

रावण को अजेय योद्ध कहा जाता है, जबकि वो केवल राम ही नहीं बल्कि चार अन्य लोगों से भी हारा था। रावण को पाताल लोक के राजा बलि, महिष्मति के राजा कार्तवीर्य अर्जुन, वनराज बालि और भगवान शिव ने भी परास्त किया था।

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