South China Sea: जानें क्या है विवाद

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) पर अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले ने इस मुद्दे को एक बार फिर गर्मा दिया है। पिछले काफी वक्त से यह मामला चीन और फिलिपींस सहित कई देशों में विवाद की वजह बना हुआ है। यहां तेल की खोज को लेकर भारत और चीन भी आमने सामने आ चुके हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह विवाद है क्याः

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    साउथ चाइना सी पर विवाद की एक बड़ी वजह इस क्षेत्र का आर्थिक महत्व भी है। दुनिया के एक तिहाई व्यापारिक जहाज इस समुद्री इलाके से गुजरते हैं। भारत की बात करें तो उसका 50 से 55 प्रतिशत समुद्री व्यापार यहीं से होता है। इसके अलावा यह माना जाता है कि यहां सागर के गर्त में तेल और गैस का अकूत भंडार है। इसके चलते दक्षिण चीन सागर का महत्व काफी बढ़ गया है।
  • दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर का एक हिस्सा है। यह समुद्री इलाका सिंगापुर और मलक्का जलडमरूमध्य से लेकर ताइवन जलडमरूमध्य तक 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है।
  • इस इलाके में कई द्वीप हैं जिन पर चीन सहित कई देश अधिकार जता रहे हैं। खासकर स्प्रातली और पारासेल नामक दो बड़े द्वीपसमूह विवाद का मुख्य कारण हैं। चीन इन्हें अपना बताता है, जबकि फिलीपींस आदि देशों का कहना है कि ये उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। पारासेल द्वीपसमूह पर 1974 तक चीन और वियतनाम का कब्जा था। दक्षिण वियतनाम और चीन के बीच हुई झड़प में चीन के सैनिक मारे जाने के बाद उसने पूरे द्वीपसमूह पर कब्जा जमा लिया।
  • स्प्रातली द्वीपसमूह पर चीन, वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस औ बुनेई काफी वक्त से लड़ रहे हैं। चीन पूरे इलाके पर एकछत्र राज चाहता है ताकि तेल और गैस की संभावनाओं के हकीकत में तब्दील होते ही वो उसका अकेला मालिक बन जाए।

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