जानवरों से प्यार का संदेश दे रहीं आलिया

चुलबुली आलिया भट्ट एनिमल लवर भी हैं. सोशल मीडिया पर वो अक्सर जानवरों के साथ फ़ोटोज़ शेयर करती रहती हैं. आलिया अब लोगों को जानवरों से प्यार करने की सीख दे रही हैं. उन्होंने एक ‘को-एग्जिट’ नामक एनजीओ भी शुरू किया है, जो ज़रूरतमंद जानवरों की सहायता करता है. अपने अभियान के बारे में वो कहती हैं, सड़क के कुत्ते-बिल्लियों के साथ लोग बहुत बुरा बर्ताव करते हैं. उनकी जान को हर पल खतरा बना रहता है. हमारी कोशिश लोगों का बर्ताव बदलने की है और उम्मीद है कि हम इसमें सफल होंगे. ‘को-एग्जिट’ लावारिस कुत्ते-बिल्लियों को गोद लेने के लिए भी लोगों को प्रेरित करेगा.

आलिया ने लोगों से अपील की है कि अगर वो जानवरों को गोद नहीं ले सकते, तो कम से कम अपने इलाकों में उनके प्रति लगाव रखें. उन्हें किसी तरह की परेशानी होने पर उनकी सहायता करें.

क्या सुसाइड करने समुद्रतट पर आईं थीं व्हेल?

न्यूजीलैंड के समुद्रतट पर बीते दिनों सैकड़ों व्हेल (Whale) मृत पाई गईं। एक दिन जब सुबह लोग दक्षिण आइलैंड टापू के फेयरवेल स्पिट तट पर पहुंचे तो हर तरफ व्हेल ही व्हेल नजर आ रही थीं। बिना वक्त गंवाए बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक 300 से ज्यादा व्हेल दम तोड़ चुकी थीं। वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है, भारत सहित तमाम देशों में समुद्र किनारे व्हेलों के मारे जाने की घटनाएं होती रही हैं। फेयरवेल स्पिट बीच पर 2015 में भी 100 के आसपास व्हेल मारी गई थीं। पिछले साल तमिलनाडु के तूतीकोरिन तट पर 73 व्हेल मृत पाईं गई थीं। इसी दौरान ब्रिटेन के लिंकनशायर समुद्र तट पर भी तीन स्पर्म व्हेल ने दम तोड़ दिया था। ये मछलियां अपेकक्षाकृत ज्यादा गहरे पानी में रहती हैं। इसलिए वैज्ञानिकों के लिए ये समझना मुश्किल था कि आखिर स्पर्म व्हेल किनारे आईं कैसे?

सुसाइडल टेंडेंसी (Suicidal Tendencies)
व्हेल का समुद्र तट की ओर रुख करने का स्पष्ट कारण अब तक सामने नहीं आ सका है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि बीमार या घायल होने के चलते व्हेल रास्ता भटककर समुद्र तट पर आ पहुंचती हैं। कई बार ऐसा होता है कि एक व्हेल किनारे आ जाती है और  फिर वो दूसरी व्हेलों को मदद का संकेत भेजती है। संकेत मिलने पर दूसरी व्हेल वहां आने लगती हैं और वो भी फंस जाती हैं। वैसे इसके पीछे सुसाइडल टेंडेंसी से भी इंकार नहीं किया जा सकता। खुद वैज्ञानिक इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज नहीं करते।

इतिहास में उल्लेख
आज से करीब दो हजार साल पहले यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने एक घोड़े की खुदकुशी का जिक्र किया था। उनके मुताबिक जब घोड़े को इस बात का अहसास हुआ कि उसने अपनी मां के साथ सेक्स किया है तो उसने समुंदर में कूदकर खुदकुशी कर ली। इसी तरह ग्रीक विचारक क्लॉडियस ऐलियन ने अपनी किताब में जानवरों की आत्महत्या की 21 घटनाओं पर प्रकाश डाला था। इसमें शिकारी कुत्तों की एक घटना का भी जिक्र है, जिन्होंने अपने मालिक की मौत के बाद खाना छोड़कर जान दे दी। एक बाज के बारे में भी क्लॉडियस ने बताया है, जिसने अपने मालिक की चिता में खुद को जला लिया था।

खुद को डुबा दिया
1845 में लंदन के अखबार इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज में छपी एक खबर ने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या जानवरों में भी इंसानों जैसे भाव होते हैं? खबर के मुताबिक, काले रंग के एक कुत्ते ने समुंदर में कूदकर जान दे दी। कुत्तों को अच्छा तैराक माना जाता है, लेकिन इस कुत्ते ने तैरने की कोशिश ही नहीं की। कुत्ते को डूबता देखकर कुछ लोग उसे बाहर निकालकर लाए, मगर वो दोबारा पानी में कूद गया और अपनी जान देकर ही माना। एक अन्य खबर में बिल्ली के पेड़ से लटककर जान देने का उल्लेख किया गया, जो अपने बच्चों की मौत से बेहद दुखी थी। इसी तरह चीन में बाड़े में बंद भालू ने अपने बच्चे को मारकर खुद भी जान दे दी थी। बच्चे को एक बेहद तकलीफदेह इंजेक्शन लगाया जाता था। मां से बच्चे की यह तकलीफ देखी नहीं गई और बच्चे को मारकर खुद भी आत्महत्या कर ली।

मादाओं की संख्या ज्यादा
इंसानों की तरह जानवरों में सुसाइडल टेंडेंसी मादाओं में ज्यादा होती है। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि नर की अपेक्षा ज्यादातर मादाएं मानसिक तनाव और पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए खुदकुशी कर लेती हैं। हालांकि सुसाइडल टेंडेंसी पर अब तक कोई एक राय नहीं बन पाई है। कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है जानवरों में ऐसी कोई भावना नहीं होती।

सबसे बड़ा सवाल?
यह बात हम सब जानते हैं कि मनुष्य जैसी संवेदनाओं के चलते जानवर भी डिप्रेशन सरीखी मानसिक बीमारियों का शिकार होते हैं। इसलिए मालिक के साथ कुछ बुरा होने पर उन्हें भी बुरा महसूस होता है। वो दर्द होने पर रोते भी हैं और खुशी में चहकते भी हैं, बस उनका अंदाज अलग होता है। जब इंसान डिप्रेशन में अपनी जान देने जैसा कदम उठा सकता है, तो क्या जानवर ऐसा नहीं कर सकते? इस सवाल का जवाब पूरी तरह मिलना अभी बाकी है।