तीनों सेनाओं की सलामी में क्यों होता है अंतर?

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क्या आपने कभी गौर किया है कि सेना के अधिकारियों का सलामी देने का तरीका अलग-अलग होता है. मसलन, आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स के जवान जब सलामी देते हैं, तो उसमें समानता के साथ-साथ कुछ अंतर भी होते हैं. आइए अंतर उनकी वजहों के बारे में जानते हैं:

सबसे पहले बात करते हैं थल सेना यानी आर्मी की. आर्मी में सलामी खुली हथेली से दी जाती है और हाथ को उस व्यक्ति की ओर रखा जाता है जिसे सलामी दी जाती है. इसका आश्य यह दर्शाना है कि सलामी देने वाले के पास कोई हथियार नहीं है और उस पर विश्वास किया जा सकता है.

नेवी में सलामी हथेली को नीचे की ओर रखकर दी जाती है. दरअसल पहले ज़्यादातर काम सैनिक अपने हाथों से करते थे. इस वजह से उनके हाथ चिकने और गंदे हो जाते थे. इसलिए सलामी देते वक़्त हाथ नीचे की ओर रखा जाता था, ताकि वरिष्ठ अधिकारियों को अपमान महसूस न हो. यही परंपरा अब तक चली आ रही है.

वायु सेना में सलामी हाथ को 45 डिग्री के एंगल पर रखकर दी जाती है. यह आसमान में उसके बढ़ते कदमों को दर्शाता है. इससे पहले वायु सेना में सलामी आसमान की तरफ हथेली रखकर दी जाती थी.

रेलवे से दलालों की छुट्टी करने के भले ही लाख दावे किए जाएं, लेकिन हकीकत वैसी ही है। पटना जंक्शन पर जब एक फौजी रिजर्वेशन के लिए गया तो बुकिंग काउंटर पर बैठे रेलकर्मी ने उसे सीट खाली न होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया, लेकिन जब फौजी दलाल के मार्फत गया तो उसे तुरंत कन्फर्म सीट मिल गई। फौजी ने इसका Video भी तैयार किया, हालांकि अब देखने वाली बात यह है कि क्या रेलवे इस पर कोई एक्शन लेगा?
पाक की कायराना हरकतः जवान के शव से बर्बरता

पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जम्मू कश्मीर के माछिल सेक्टर में पाक सेना द्वारा भारतीय जवान के शव को indian-armyक्षत विक्षत करने की घटना सामने आई है। पिछले महीने के अंदर पाकिस्तान की ओर से की गई यह दूसरी घृणित कार्रवाई है। सरकार ने सेना को इसका मुंहतोड़ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, माछिल में पाक सेना के हमले में तीन भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। पाकिस्तानी फौजियों ने कायराना हरकत को अंजाम देते हुए एक जवान के शव को क्षत विक्षत कर दिया। गौरतलब है कि अक्टूबर में भी इसी तरह एक भारतीय जवान के शव के साथ बर्बरता की गई थी।

कन्वेंशन का उल्लंघन
रक्षा विशेषज्ञों ने पाक सेना की इस कार्रवाई को जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि अगर भारत ने पिछले घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दिखाते हुए जोरशोर से मामले को उठाया होता तो शायद यह घटना नहीं होती। गौरतलब है कि भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तानी सैनिक बौखलाए हुए हैं। उनकी तरफ से सीमा पर लगातार फायरिंग की जा रही है।

J&K: सेना के कैंप पर फिर हमला!

indian-armyआतंकवादियों ने एक बार फिर सेना को निशाना बनाया है। रविवार रात को बारामूला में 46 राष्ट्रीय राइफल कैंप पर आतंकियों ने हमला बोला। देर रात तक दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। खबरों के मुताबिक, आतंकवादियों ने सबसे पहले ग्रेनेड से हमला बोला, फिर फायरिंग शुरू कर दी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राइफल्स आतंक निरोधी अभियानों को अंजाम देती है। भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से आशंका जताई जा रही थी कि पाकिस्तानी पलटवार कर सकता है। उधर, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में लिखा है, बारामूला के मेरे साथियों ने मुझे फोन करके बताया है कि आसपास गोलीबारी हो रही है। मैं इलाके में लोगों की सलामती की दुआ करता हूं।

क्या सेना की चूक से हुआ हमला?

उरी में हुआ हमला क्या सेना की चूक का परिणाम था? यह सवाल अब पूछा जाने लगा है। कई ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जिससे यह साफ होता है कि कहीं न कहीं सुरक्षा में कोताही बरती गई। जिसके चलते आतंकी इतने बड़े हमले को अंजाम दे सके। uriसूत्रों के मुताबिक, 12 13 सितंबर को ऐसे किसी हमले की की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसे सेना से साझा भी किया गया था। इसमें कहा गया था कि 12 इंफैंट्री ब्रिगेड को निशाना बनाया जा सकता है। आतंकियों ने काला पहाड़ ब्रिगेड कैंप में दो जगह घुसपैठ की। दोनों ही जगह कटे तार मिले हैं। इसके बाद आतंकी करीब 150 मीटर तक अंदर चले आए। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने संवेदनशील क्षेत्र में आतंकी कैसे इतना अंदर दाखिल होने में सफल रहे? क्यों किसी की नजर उन पर नहीं गई? एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम 28 अगस्त से सीमा पर तैनात थी और जानकारी थी कि वो किसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे सकती है।

सबसे बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर आतंकियों को सेना के शिविर के बारे में इतनी सटीक जानकारी कैसी थी। खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच में लगी हैं कि क्या उन्हें अंदरूनी तौर पर किसी शख्स से सहायता मिली थी। सेना का दावा है कि फेंस के चारों ओर फ्लड लाइट होती हैं, अब सवाल ये है कि ऐसे में किसी की नजर तार काटते आतंकियों पर क्यों नहीं गई? जैसा कि कहा जा रहा है अगर वॉशरूम पोस्ट से गोली चली तो उसके निशान कहीं क्यों नहीं हैं? घाटी में घुसपैठ की लगातार मिल रहीं खबरों के बीच भी उरी में सुरक्षा में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई?

कश्मीर में फिर हमले, जवान शहीद

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कश्मीर में फिर हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को पुंछ के अल्लाह पीर में मुठभेड़ के बाद कई इलाकों से इस तरह की खबरें सुनने में आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक, आतंकियों ने तीन स्थानों पर घुसपैठ की कोशिश की है। सुरक्षाबलों की ओर की जा रही कार्रवाई में चार आतंकी मारे जा चुके हैं। जबकि एक पुलिसकर्मी भी शहीद हुआ है, साथ ही 3 सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर है। आतंकियों ने सुबह अल्लाह पीर इलाके में स्थित मिनी सचिवालय को निशाना बनाया। इसके बाद नौगाम सेक्टर में एलओसी के पास सुरक्षाबलों की उनसे मुठभेड़ हुई। गौरतलब है कि घाटी में माहौल गर्माने के लिए सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें लगातार जारी हैं। तकरीबन दो साल के बाद घाटी के कुछ इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। अगर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए तो फिर से पूरी तरह कमान सेना के हाथ में दी जा सकती है। इसके मद्देनजर घुसपैठ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

J&K: जवानों के साथ बर्बरता!

जम्मू कश्मीर (J&K) में हालात सुधरने के बजाए और बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाबलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। खबर है कि चंद रोज पहले कुछ स्थानीय लोगों ने एक सीआरपीएफ जवान के साथ बर्बर सलूक किया। उसे आर्मी J&Kअस्पताल में भर्ती कराया गया है। जवान छुट्टी से वापस लौट रहा था। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे पहले एक जवान को गोली मारने की भी खबर मिली थी। सूत्र बताते हैं कि सीआरपीएफ जवान कश्मीर स्थित अपने कैंप वापस लौट रहा था। तभी कुछ लोगों ने उसे रास्ते में रोक लिया। जवान ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की, लेकिन उसका आई कार्ड हमलावरों की नजर में आ गया। इसके बाद उन्होंने जवान को बेरहमी से मारापीट और फिर उसे धारधार हथियारों से घायल कर दिया। पीडि़त जवान को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

विशेष निर्देश
कश्मीर स्थित सुरक्षाबलों के कैंप के आसपास बड़ी संख्या में एकट्ठा होकर प्रदर्शनकारियों द्वारा नारेबाजी की जा रही है। इसके मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारी आजादी, आजादी, कश्मीर लेकर रहेंगे जैसे नारे लगा रहे हैं। खबरें हैं कि पाकिस्तान से कुछ आतंकी घाटी में दाखिल हो चुके हैं और उनके निशाने पर सुरक्षा बल हैं। प्रदर्शनकारियों के रूप में वही जवानों पर हमले कर रहे हैं ताकि और हिंसा भड़काई जा सके। इसे देखते हुए सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

उखाड़ रहे सड़कें
सुरक्षा बलों की परेशानी बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़कें खोदी जा रही हैं। रात के वक्त उपद्रवी बाहर निकलते हैं और प्रमुख सड़कों को खोद देते हैं। कहीं कहीं तो इसके लिए बाकायदा बुल्डोजर की मदद भी ली जा रही है। सड़कें खुदी होने के चलते सुरक्षा बलों को एक स्थान से दूरे स्थान तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कर्फ्यू के बावजूद उपद्रवी इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

दगा किया तो मिली गोली!

हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी सुलग रही है। स्थानीय तौर पर दावा किया गया है कि वानी के जनाजे में 2 लाख लोग शामिल हुए, इससे वानी की फैन फॉलोइंग का अंदाजा लगाया जा सकता है। वानी ने घाटी में थोड़े ही वक्त में vaniखुद को एक हीरो के तौर पर स्थापित कर लिया था। उसके चाहने वालों में महिलाओं की संख्या भी काफी ज्यादा थी। वानी मूलरूप से श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर शरीफाबाद नामक गांव का रहने वाला था। इस गांव तक पहुंचने का रास्ता जिस तरह से टेड़ामेड़ा है, उसी तरह से वानी की जिंदगी भी चरमपंथ की आड़ी तिरछी राहों से होते हुए सुरक्षा बलों की गोली पर जाकर खत्म हुई।

   कहा जा रहा है कि वानी को सुरक्षाबल केवल इसलिए निशाना बना सके क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड ने उसके ठिकाने के बारे में सूचना दी थी। हालांकि ये बात अलग है कि घाटी के लोग इस बात पर यकीन नहीं करते। उनके मुताबिक बुरहान वानी के साथ चंद पल बिताने के लिए लड़कियां अपना सबकुछ कुर्बान करने को तैयार रहती थीं। ऐसे में यह जानते हुए भी कि सुरक्षा बल उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, कोई क्यों भला मुखबरी करेगा। वैसे वानी की आशिक मिजाजी के किस्से श्रीनगर से लेकर शरीफाबाद तक फैले हैं। उसके कई महिलाओं से संबंध थे। अपनी कदकाठी और चरपमंथी विचारधारा वाले समुदाय में फिली शौहरत के चलते वह हर थोड़े वक्त में माशूका बदलता रहता था। लड़कियां इस बात को बखूबी जानती थीं कि वानी ज्यादा वक्त तक उनके साथ नहीं रहेगा बावजूद इसके वो रिश्ता बनाने को तैयार हो जाती थीं।

साथी से किया दगा
वानी के खिलाफ घाटी में कोई कुछ सुनना, बोलना नहीं चाहता। जो उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं, वो भी खामोश रहना पसंद कर रहे हैं। उन्हें लगता है यदि उन्होंने कुछ कहा तो उनकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि दबी जुबान में वो यह स्वीकारते हैं कि वानी की रंगीन मिजाजी के चलते अंदरूनी तौर पर असंतोष बढ़ रहा था। ऐसी चर्चा है कि वानी ने अपने साथी की गर्लफ्रेंड के साथ भी संबंध बनाए थे। जिसके चलते दोनों में विवाद हुआ था। वानी के ठिकाने के बारे में उसकी महबूबाओं को कोई जानकारी नहीं होती थी, केवल साथी जानते थे कि वो कब कहां जाएगा। लिहाजा स्थानीय लोगों को लगता है कि वानी से नफरत करने वाले उसके किसी साथी ने ही मुखबरी की और गर्लफ्रेंड वाला मामला उछाल दिया ताकि उस पर किसी को शक न हो।

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लगते थे पोस्टर
22 वर्षीय वानी अपनी आतंकी सोच के चलते घाटी में पोस्टरबॉय बन गया था। आलम ये था कि वानी के पोस्टर घरों में लगे मिल जाया करते थे। सोशल मीडिया पर सक्रिय वानी का स्थानीय नेटवर्क बेहद मजबूत था। घाटी के किस घर में क्या हो रहा है, उसे हर बात की जानकारी थी। वैसे ऐसा नहीं है कि पूरी की पूरी घाटी उसे पसंद करती थी। अमन पसंद लोग वानी की सोच के विस्तारित रूप को देखकर चिंतित भी थे और आक्रोषित भी। हालांकि ये बात अलग है कि उनकी संख्या बेहद सीमित थी। कहा जाता है कि वानी बीच बीच में युवाओं से प्रत्यक्ष तौर पर मुखातिब होता था। वो तब तक उन्हें बरगलाता था, जब तक कि वो जिहाद के इस रूप को अपना नहीं लेते।

भाई के नाम पर
कहा जाता है कि वानी ने 2010 में घाटी में हुई हिंसा का हवाला देकर बंदूक उठाई। उस दौरान पुलिस के साथ संघर्ष में वानी का भाई घायल हुआ था, जिसका प्रतिशोध लेने के लिए वो आतंकी बन गया। हालांकि स्थानीय लोग बताते हैं कि वो बचपच से ही चरमपंथी विचारधारा से प्रभावित था।  पाकिस्तान से भारत के प्रति आग उगलने वाले आतंकी वानी के हीरो हुआ करते थे। 2010 में जो हुआ, उसने केवल बुरहान वानी को जल्दी बंदूक उठाने के लिए प्रेरित किया।

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कई पुलिसकर्मी लापता
घाटी में हिंसा के बाद से अब तक कई पुलिसकर्मी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें अगवा कर लिया है। जो सुरक्षाकर्मी हिंसा में घायल हुए थे उनमें से कुछ ही हालत गंभीर बताई जा रही है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी सड़कों पर फैले हैं।

जानें कैसे धधका कश्मीर
स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर कैसे नफरत और हिंसा की आग में जला, कैसे कश्मीर के युवाओं ने अमन परस्ती के बजाए पाकिस्तान के बहकावे में आकर बंदूक को अपना साथ बनाया। इस तरह के कई सवालों के जवाब आप कश्मीर पर लिखी गईं किताबों से प्राप्त कर सकते हैं। यहां हम आपकी सहायता के लिए कुछ किताबों के लिंक दे रहे हैं। जो एमाजोन पर काफी सस्ते दामों में उपलब्ध हैं।


सेना के डिपो में आग साजिश तो नहीं?

महाराष्ट्र के वर्धा में सेना के सबसे बड़े हथियार डिपो में लगी आग में साजिश की बू आ रही है। Army भी इस सवाल का जवाब खोजने में लगी है कि आखिर आग कैसे लगी। अग्निकांड में सेना को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। एक तो उसके 18 जवानों की मौत हुई, वहीं fireभारी मात्रा में गोला बारूद भी बर्बाद हो गया। इस डिपो में सभी तरह की सुरक्षा के खास इंतजाम किए जाते हैं। इसके बावजूद आग लगना किसी के गले नहीं उतर रहा है।

  एक अधिकारी ने कहा, “डिपो में आग लगने के परिणामों से सभी वाकिफ हैं, लिहाजा कोई गलती से भी गलती नहीं कर सकता। शॉर्ट सर्किट आदि की वजह से भी आग की संभावना न के बराबर है, क्योंकि यहां हर छोटी बात पर नजर रखी जाती है’। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि हादसे के पीछे साजिश हो सकती है। सेना ने जांच के लिए कमेटी गठित है, जो सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए रक्षामंत्री को वर्धा जाने के निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि आग में 2 अफसर और डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स के 15 जवानों की मौत हुई है। जबकि 17 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आग सोमवार रात डेढ़ से दो के बीच धमाके के साथ लगी। जो करीब आठ किलोमीटर के दायरे में फैल गई। सेना ने आग पर काबू पाने का दावा किया है। हालांकि डिपो में अब भी रुक रुककर आवाजें का रही हैं। यह डिपो कई एकड़ में फैला हुआ है।