दगा किया तो मिली गोली!

हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी सुलग रही है। स्थानीय तौर पर दावा किया गया है कि वानी के जनाजे में 2 लाख लोग शामिल हुए, इससे वानी की फैन फॉलोइंग का अंदाजा लगाया जा सकता है। वानी ने घाटी में थोड़े ही वक्त में vaniखुद को एक हीरो के तौर पर स्थापित कर लिया था। उसके चाहने वालों में महिलाओं की संख्या भी काफी ज्यादा थी। वानी मूलरूप से श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर शरीफाबाद नामक गांव का रहने वाला था। इस गांव तक पहुंचने का रास्ता जिस तरह से टेड़ामेड़ा है, उसी तरह से वानी की जिंदगी भी चरमपंथ की आड़ी तिरछी राहों से होते हुए सुरक्षा बलों की गोली पर जाकर खत्म हुई।

   कहा जा रहा है कि वानी को सुरक्षाबल केवल इसलिए निशाना बना सके क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड ने उसके ठिकाने के बारे में सूचना दी थी। हालांकि ये बात अलग है कि घाटी के लोग इस बात पर यकीन नहीं करते। उनके मुताबिक बुरहान वानी के साथ चंद पल बिताने के लिए लड़कियां अपना सबकुछ कुर्बान करने को तैयार रहती थीं। ऐसे में यह जानते हुए भी कि सुरक्षा बल उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, कोई क्यों भला मुखबरी करेगा। वैसे वानी की आशिक मिजाजी के किस्से श्रीनगर से लेकर शरीफाबाद तक फैले हैं। उसके कई महिलाओं से संबंध थे। अपनी कदकाठी और चरपमंथी विचारधारा वाले समुदाय में फिली शौहरत के चलते वह हर थोड़े वक्त में माशूका बदलता रहता था। लड़कियां इस बात को बखूबी जानती थीं कि वानी ज्यादा वक्त तक उनके साथ नहीं रहेगा बावजूद इसके वो रिश्ता बनाने को तैयार हो जाती थीं।

साथी से किया दगा
वानी के खिलाफ घाटी में कोई कुछ सुनना, बोलना नहीं चाहता। जो उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं, वो भी खामोश रहना पसंद कर रहे हैं। उन्हें लगता है यदि उन्होंने कुछ कहा तो उनकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि दबी जुबान में वो यह स्वीकारते हैं कि वानी की रंगीन मिजाजी के चलते अंदरूनी तौर पर असंतोष बढ़ रहा था। ऐसी चर्चा है कि वानी ने अपने साथी की गर्लफ्रेंड के साथ भी संबंध बनाए थे। जिसके चलते दोनों में विवाद हुआ था। वानी के ठिकाने के बारे में उसकी महबूबाओं को कोई जानकारी नहीं होती थी, केवल साथी जानते थे कि वो कब कहां जाएगा। लिहाजा स्थानीय लोगों को लगता है कि वानी से नफरत करने वाले उसके किसी साथी ने ही मुखबरी की और गर्लफ्रेंड वाला मामला उछाल दिया ताकि उस पर किसी को शक न हो।

wani

लगते थे पोस्टर
22 वर्षीय वानी अपनी आतंकी सोच के चलते घाटी में पोस्टरबॉय बन गया था। आलम ये था कि वानी के पोस्टर घरों में लगे मिल जाया करते थे। सोशल मीडिया पर सक्रिय वानी का स्थानीय नेटवर्क बेहद मजबूत था। घाटी के किस घर में क्या हो रहा है, उसे हर बात की जानकारी थी। वैसे ऐसा नहीं है कि पूरी की पूरी घाटी उसे पसंद करती थी। अमन पसंद लोग वानी की सोच के विस्तारित रूप को देखकर चिंतित भी थे और आक्रोषित भी। हालांकि ये बात अलग है कि उनकी संख्या बेहद सीमित थी। कहा जाता है कि वानी बीच बीच में युवाओं से प्रत्यक्ष तौर पर मुखातिब होता था। वो तब तक उन्हें बरगलाता था, जब तक कि वो जिहाद के इस रूप को अपना नहीं लेते।

भाई के नाम पर
कहा जाता है कि वानी ने 2010 में घाटी में हुई हिंसा का हवाला देकर बंदूक उठाई। उस दौरान पुलिस के साथ संघर्ष में वानी का भाई घायल हुआ था, जिसका प्रतिशोध लेने के लिए वो आतंकी बन गया। हालांकि स्थानीय लोग बताते हैं कि वो बचपच से ही चरमपंथी विचारधारा से प्रभावित था।  पाकिस्तान से भारत के प्रति आग उगलने वाले आतंकी वानी के हीरो हुआ करते थे। 2010 में जो हुआ, उसने केवल बुरहान वानी को जल्दी बंदूक उठाने के लिए प्रेरित किया।

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कई पुलिसकर्मी लापता
घाटी में हिंसा के बाद से अब तक कई पुलिसकर्मी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें अगवा कर लिया है। जो सुरक्षाकर्मी हिंसा में घायल हुए थे उनमें से कुछ ही हालत गंभीर बताई जा रही है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी सड़कों पर फैले हैं।

जानें कैसे धधका कश्मीर
स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर कैसे नफरत और हिंसा की आग में जला, कैसे कश्मीर के युवाओं ने अमन परस्ती के बजाए पाकिस्तान के बहकावे में आकर बंदूक को अपना साथ बनाया। इस तरह के कई सवालों के जवाब आप कश्मीर पर लिखी गईं किताबों से प्राप्त कर सकते हैं। यहां हम आपकी सहायता के लिए कुछ किताबों के लिंक दे रहे हैं। जो एमाजोन पर काफी सस्ते दामों में उपलब्ध हैं।