ऐसे 5 रुपए सस्ता पाएं गैस सिलेंडर

5महंगाई के दौर में यदि आप रसोई गैस सिलेंडर पर कुछ छूट चाहते हैं, तो आपको भुगतान का तरीका बदलना होगा। यानी अगर आप सिलेंडर के लिए बुकिंग और पेमेंट ऑनलाइन करते हैं तो आपको हर सिलेंडर पर 5 रुपए छूट मिलेगी। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है। मालूम हो कि नोटबंदी के बाद से सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने पर जोर दे रही है। इससे पेट्रोल और डीजल के कैशलेस भुगतान पर छूट की घोषणा की गई थी। तेल कंपनियों के मुताबिक, सरकार की तरफ से अब रसोई गैस पर भी छूट देने को कहा गया है। इसका फायदा लेने के लिए ग्राहकों को नेट बैकिंग, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। इसमें 5 रुपए की छूट मिलेगी। ट्रांजेक्शन होने पर छूट का अमाउंट ग्राहक कम्प्यूटर स्क्रीन पर देख सकेंगे।

South China Sea: ड्रैगन के दावे दरकिनार

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) पर संयुक्त राष्ट्र की एक अदालत के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय माहौल गर्मा दिया है। एक तरफ जहां चीन ने इस फैसले को मानने से इंकार किया है, वहीं अमेरिका खुलकर इस निर्णय के पक्ष में आ गया है। अदालत ने फिलिपींस का पक्ष सही मानते हुए कहा कि ऐसे कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं, जिनसे चीन का इस समुद्र और संसाधनों पर southchinaseaएकाधिकार सिद्ध हो। चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला गलत आधार पर लिया गया है और वो इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा। इस ताजा अपडेट से भारत और चीन के रिश्तों में तल्खी बढ़ने की आशंका भी पैदा हो गई है।

     चीन का कहना है कि उसका पुराने समय से इस समुद्री इलाके पर कब्जा है, ऐसे में भारत को यहां आने की जरूरत नहीं। वहीं, भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय अदालत के निर्णय का अप्रत्यक्ष समर्थन करते हुए साफ कर दिया है कि वो चीन के चौधराहट के दबाव में आने वाला नहीं है। हालांकि सरकार ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

जानें-क्या-है-विवाद/

क्या कर रहा है चीन?
अमेरिका का कहना है कि चीन दक्षिण सागर में पिछले कई सालों से कृत्रिम द्वीप बना रहा है। चीन लगभग पूरे दक्षिण सागर पर दावा करता है, जिसमें वह मूंगे की चट्टानें और द्वीप भी शामिल हैं, जिन पर अन्य देश दावा करते हैं। अमेरिका ने चीन से अदालत के फैसले का सम्मान करने को कहा है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि ट्राइब्यूनल का फैसला चीन और फिलीपींस दोनो के लिए फाइनल और कानूनी रूप से बाध्य है।

सैन्य टकराव की आशंका
चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि चीन की सेनाएं धमकियों और खतरों से निपटने के लिए तैयार हैं। उसके मुताबिक, ये फैसला समुद्री नियमों पर संयुक्त राष्ट्र संधि के अंतर्गत आने वाली हेग की अदालत की ओर से आया है। यह संधि दोनों देशों ने की है। हालांकि यह फैसला मामनना जरूरी नहीं, लेकिन इसे लागू करवाना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

LPG: बीमा है पर बताते नहीं

LPG गैस सिलेंडर से होने वाली दुर्घटनाओं में इजाफे के बावजूद अधिकतर उपभोक्ता इस बात से अंजान हैं कि हादसे की स्थिति में वो मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसकी वजह है गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होने वाली लापरवाही। सालाना करोड़ों रुपए प्रीमियम का lpgभुगतान करने के बाद भी कंपनियां इस बारे में उपभोक्ता को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझतीं। पुणे जिले में 140 के आसपास गैस एजेंसियां हैं और उपभोक्ताओं की संख्या 24 लाख से ज्यादा है। बीते कुछ सालों में जिले में कई दुर्घटनाएं भी हुईं, लेकिन एक भी उपभोक्ता ने अब तक मुआवजे के लिए आवेदन नहीं किया। अधिकारी स्वयं इस बात की पुष्टि करते हैं। कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर दोनों की तरफ से अधिकृत उपभोक्ताओं को बीमा कवर दिया जाता है। कंपनियों की वेबसाइट पर सिटीजन चार्टर के तहत जानकारी भी दी गई है, लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर इसे स्वीकारने में दोनों ही कतराते हैं। इस संबंध में जब डिस्ट्रीब्यूटरों से बात की गई तो उन्होंने इसे कंपनी की पॉलिसी करार दिया और कंपनी अधिकारी बीमे को डीलरों की जिम्मेदारी ठहराते रहे।

कहीं जिक्र नहीं
गैस कंपनियों की तरफ से अधिकृत उपभोक्ताओं को ग्राहक पुस्तिका दी जाती है, जिस पर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश होते हैं। इस पुस्तिका में भी बीमा कवर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं सिलेंडर की डिलेवरी के दौरान मिलने वाली रसीद पर भी बीमे का जिक्र नहीं रहता।

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सबसे ज्यादा ताज्जुब की बात तो ये है कि बीमे की राशि को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। कंपनी अधिकारियों से लेकर डीलर और यहां तक कि महाराष्ट्र गैस डीलर एसोसिएशन के पास भी इसका कोई सीधा जवाब नहीं मिला। हालांकि इंडेन के एक अधिकारी ने इतना जरूर कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ से 10 लाख का बीमा करवाया जाता है, लेकिन जब उनसे कंपनी के बीमा कवर के बारे पूछा गया तो वो खामोश हो गए।

नियमों का उल्लंघन
जानकारी के मुताबिक कंपनियों के अलावा डीलर स्तर पर भी उपभोक्ताओं का थर्ड पार्टी बीमा कराया जाता है। लेकिन वो भी इस संबंध में उपभोक्ता को कुछ बताना जरूरी नहीं समझते। जबकि नियमानुसार उन्हें डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से इसकी जानकारी देना आवश्यक है। शहर के अधिकांश डिस्ट्रीब्यूटर इस नियम की खुलेआम अवेहलना कर रहे हैं।