वाजिब तो है Rahul का सवाल

Rahul Gandhi एक अर्से के बाद संसद में आक्रामक नजर आए। सबसे अच्छी बात ये है कि उनकी आक्रामता एक ऐसे मुद्दे को लेकर थी, जिसका जुड़ाव देश की आबादी के एक बड़े हिस्से से है। राहुल ने महंगाई पर केंद्र सरकार को न केवल घेरा बल्कि प्रधानमंत्री के उन वादों को भी दोहराया जो उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान जनता से किए थे। इस बात में कोई दोराय नहीं कि कांग्रेस के rahul1कार्यकाल में भी महंगाई एक बड़ा मुद्दा थी, लेकिन जिस तरह से भाजपा ने आम आदमी को अच्छे दिनों का सपना दिखाया था उस परिप्रेक्ष्य में यह सवाल मोदी के लिए और भी बड़ा हो जाता है कि महंगाई कब थमेगी?

भाजपा ने 2014 में केंद्र में सरकार बनाई तब से अब तक महंगाई के मोर्चे पर ऐसा कुछ भी खास नहीं हुआ है, जिससे यह लग सके कि आम आदमी के अच्छे दिन आ रहे हैं। भले ही वित्तमंत्री आंकड़ों की जादूगिरी दिखाकर महंगाई को कम दर्शाने का प्रयास कर रहे हों, मगर हकीकत क्या है ये वह खुद भी जानते होंगे। हकीकत यही है कि महंगाई कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा डकार रही है। आटे, दाल से लेकर सब्जियां, फल सभी के दाम आसमान पर हैं। जमीन पर अगर कुछ आया है तो वो है आम जनता के अरमान, जो उसने भाजपा को वोट देते वक्त जगाए थे।

वादे हैं वादों का क्या
राहुल गांधी ने संसद में बोलते हुए कहा कि 16 फरवरी 2014 को मोदी ने कहा था कि देश के सामने महंगाई सबसे बड़ी समस्या है। मां बच्चे रात भर नहीं सोते, आंसू पीकर सोते हैं। तब उन्होंने वादा किया था कि महंगाई रोकेंगे पर आज दाल और सब्जियां कई गुना महंगी हो गई हैं। टमाटर के भाव 200 प्रतिशत बढ़े हैं। राहुल ने मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब बनारस में चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था कि आप मुझे प्रधानमंत्री मत बनाइए, मैं आपका चौकीदार हूं। पर आज उनकी नाक के नीचे से दाल चोरी हो रही है। कीमतें आसमान छू रही हैं। राहुल ने कहा, आप प्रधानमंत्री बन गए हैं अब आप क्या करेंगे, चौकीदारी का काम कांग्रेस कर लेगी। इस दौरान राहुल ने अरहर मोदी का नारा भी दिया।

कैसी है महंगाई की चाल?
आंकड़ों की बात करें तो महंगाई यहां भी बढ़ती नजर आ रही है। जून में थोक महंगाई दर बढ़कर 1 16 फीसदी हो गई, जो एक महीने पहले 0 70 प्रतिशत थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में आलू 64 48 फीसदी महंगा हुआ और दलहन कीमतों में 26 61 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस दौर में सब्जियां भी 16 91 फीसदी महंगी हुईं।

ये तो कोई तर्क नहीं
राहुल गांधी के सवाल का जवाब संसद में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दिया। जेटली ने मौजूदा सीजन को महंगाई का सीजन करार देकर लगभग वैसे ही तर्क पेश किए जैसे यूपीए के कार्यकाल में दिए जाते थे। जेटली ने कहा, मानसून आने से पहले खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी आम बात है। राहुल गांधी के अरहर मोदी के नारे पर वे बोले, सवाल नारे देने का नहीं, आंकड़े पेश करने का है। हमारी सरकार ने महंगाई रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। कांग्रेस के कार्यकाल में नीतिगत विकलांगता थी। कीमतें मांग और आपूर्ति से तय होती हैं। भारत में दाल की कमी वैश्विक मंदी की वजह से है।

Modi Gov: आलाकमान से इत्तेफाक नहीं रखते कांग्रेसी

नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस ने एक कार्टून बुक जारी करके अपना विरोध जताया है। इस किताब में modiविकास सहित कई मुद्दों पर कार्टून के जरिए सरकार की नाकामी को दर्शाया गया है। कांग्रेस का मानना है कि Modi Gov के दो साल किसी भी सूरत में देश के लिए अच्छे नहीं रहे। न तो आम आदमी को सरकार ने कोई राहत दी, और न ही उद्योग जगत राहत महसूस कर पाया। हालांकि ये बात अलग है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित चुनिंदा वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस कार्टून बुक से अधिकतर कांग्रेसी इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक चश्मा हटाकर देखा जाए तो दो साल में ऐसे कई कार्य हुए हैं जिनकी सराहना की जानी चाहिए।

महाराष्ट्र कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हम मानें या न मानें विकास तो हुआ है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार भले ही वादे अनुसार नहीं रही, पर उसमें सुधार है। वर्तमान सरकार जिस तरह अर्थव्यवस्था पर फोकस कर रही है, उसके और भी बेहतर परिणाम आने वाले वक्त में मिलेंगे। पिछले दो सालों में देश की जीडीपी बेहतर हुई है, इसे नकारा नहीं जा सकता। हां, इतना जरूर है कि मोदी को यूपीए के कार्यकाल में किए गए प्रयासों का लाभ मिल रहा है। कांग्रेस हमेशा से अर्थव्यवस्था पर जोर देती आई है। विदेश नीति के लिए भी पिछले 2 साल अच्छे रहे, मोदी की आक्रामक भूमिका ने पाक और चीन जैसे हमारे पड़ोसियों के मन में जहां खौफ पैदा किया वहीं अमेरिका और अन्य मुल्कों की सोच भी बदली। हालांकि, नेपाल से हमारे संबंध जरूर खराब हुए हैं, मोदी को इस दिशा में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। महंगाई पर सरकार को थोड़ा ज्यादा फोकस करना चाहिए।

मध्यप्रदेश कांग्रेस से जुड़े एक नेता ने कहा, दो साल में बदलाव तो हुए हैं। विपक्षी पार्टी होने के नाते हम सार्वजनिक तौर पर तो इसका बखान नहीं कर सकते, लेकिन हकीकत स्वीकारते हैं। बात चाहे विदेश नीति की या अर्थव्यवस्था की, मजबूती दिखाई दे रही है। कुछ मुद्दे हैं, जिन पर सरकार ज्यादा ध्यान नहीं दे सकी है। मसलन महंगाई और सांप्रदायिक सौहार्द कायम करना। उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले वक्त में स्थिति और सुधरेगी। हाल ही में सामने आए पांच राज्यों के चुनावी नतीजे इस बात का सबूत है कि जनता को बदलाव नजर आ रहा है। अब भला जनता से ज्यादा सरकार के कामकाज को कौन परख सकता है? एक महत्वपूर्ण बात जो मेरे जैसे अधिकतर कांग्रेसी महसूस करते हैं, वो यह है कि मोदी ने चुनाव पूर्व और बाद आक्रामकता की लय बरकरार रखी है। जो कांग्रेस के कार्यकाल में नदारद थी। हमारी सरकार ने भी कई अच्छे कार्य किए, लेकिन उससे भुनाने के प्रयास सही से नहीं हो सके।

cartoon4

एक अन्य नेता ने कहा, मोदी जो सबसे महत्वपूर्ण काम का रहे हैं, वो है जनता से संवाद। वे इस बात को बखूबी समझते हैं कि संवाद से ही समस्याएं दूर की जा सकती हैं। पिछले दो सालों में विकास हुआ है, इसमें कोई दोराय नहीं। लेकिन उसकी गति रॉकेट सरीखी थी ऐसा बिल्कुल नहीं है। रोजगार विकास और महंगाई के मसले पर सरकार ज्यादा कुछ नहीं कर सकी है। वो केवल संवाद के जरिए लोगों में यह विश्वास बनाए हुए हैं कि अच्छे दिन आ रहे हैं। हमारी सरकार बस यही काम ठीक ढंग से नहीं कर सकी। हां, विदेश नीति के बारे में अपनी समझ के आधार पर मैं ये जरूर कह सकता हूं कि हालात पहले से बेहतर हुए हैं। लोकसभा चुनाव से पूर्व जिस तरह के आक्रामक तेवर भाजपा ने दिखाए थे, उसका फायदा द्विपक्षीय सम्बंधों में देखने को मिला है। मैं यहां मोदी सरकार से कहना चाहूंगा कि अगर महंगाई की नब्ज जल्द नहीं टटोली गई, तो उसे भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस से जुड़े एक नेता के मुताबिक, र्स्टाटअप इंडिया, गरीबों के बैंक खाते खुलवाना, उनका बीमा करवाना, सब्सिडी के बोझ को कम करना आदि कई ऐसे कार्य हैं, जो पिछले दो सालों में हुए हैं। इसलिए ये कहना कि मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया, मुझे नहीं लगता सही होगा। विपक्ष के तौर पर हमारा काम सरकार की नीतियों में खामिया निकालने का है, लेकिन आम भारतीय के तौर पर तो हम जो कुछ अच्छा हो रहा है उसकी प्रशंसा कर ही सकते हैं। जिस तरह के पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आए हैं, उसे देखते हुए हमारी पार्टी को उत्तर प्रदेश में काफी मेहनत करनी होगी।

ये महंगाई कब थमेगी मोदी जी?

एक तरफ जहां नरेंद्र मोदी सरकार अपने दो साल पूरे होने का जश्न मना रही है, वहीं आम जनता सरकार से सवाल कर रही है कि ये inflationnमहंगाई कब थमेगी? पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि के बाद अब गैस सिलेंडर भी महंगा हो गया है। बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए अब आपको 21 रुपए ज्यादा देने पड़ेंगे। इसके अलावा हवाई यात्रा भी महंगी हो गई है। विमान ईंधन के मूल्य में 9 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर टिकटों की कीमत पर पड़ना लाजमी है। आपको बता दें कि मंगलवार को पेट्रोल 2 58 और डीजल 2 26 रुपए प्रति लीटर महंगा किया गया था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल के दाम और बढ़ाए जा सकते हैं।
नाकाम रही सरकार
सब्जियों और दाल की कीमत में बढ़ोत्तरी का सिलसिला थम नहीं रहा है। सरकार के लाख दावों के बावजूद महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि ये बात अलग है कि आंकड़ों में महंगाई घटी है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में महंगाई को लेकर तंज कसने वाली भाजपा अब तक इस मामले में नाकाम ही रखी है।