ऐसे 5 रुपए सस्ता पाएं गैस सिलेंडर

5महंगाई के दौर में यदि आप रसोई गैस सिलेंडर पर कुछ छूट चाहते हैं, तो आपको भुगतान का तरीका बदलना होगा। यानी अगर आप सिलेंडर के लिए बुकिंग और पेमेंट ऑनलाइन करते हैं तो आपको हर सिलेंडर पर 5 रुपए छूट मिलेगी। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है। मालूम हो कि नोटबंदी के बाद से सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने पर जोर दे रही है। इससे पेट्रोल और डीजल के कैशलेस भुगतान पर छूट की घोषणा की गई थी। तेल कंपनियों के मुताबिक, सरकार की तरफ से अब रसोई गैस पर भी छूट देने को कहा गया है। इसका फायदा लेने के लिए ग्राहकों को नेट बैकिंग, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। इसमें 5 रुपए की छूट मिलेगी। ट्रांजेक्शन होने पर छूट का अमाउंट ग्राहक कम्प्यूटर स्क्रीन पर देख सकेंगे।

अच्छी खबर: छोड़ने वाले फिर पा सकेंगे LPG सब्सिडी

उन LPG उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है, जो जाने अंजाने सब्सिडी छोड़ चुके हैं। जाने अंजाने शब्द यहां इसलिए इस्तेमाल lpgकिया जा रहा है, क्योंकि फोन पर गैस बुक कराते वक्त कई बार उपभोक्ता नंबर दबाने की गफलत में गलत नंबर का चयन कर लेते हैं और फिर चंद सेकेंड बाद सुनाई देने वाले संदेश से उन्हें पता चलता है कि अब वो सब्सिडी के हकदार नहीं हैं। केंद्र सरकार के गिव इट अप कैंपेन को एक साल पूरा होने जा रहा है। इसी के मद्देनजर सरकार इरादा बदलने वाले उपभोक्ताओं को पुनः सब्सिडी पाने का मौका देने जा रही है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बारे में कहा, जिन उपभोक्ताओं ने सब्सिडी छोड दी है, वे फिर उसे हासिल कर सकते हैं। गौरतलब है कि अभी दिल्ली में सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत 419 रूप्ए है और गैर सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर का मूल्य 509। इस संबंध में जल्द ही कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं से जानकारी साझा की जाएगी।

LPG: बीमा है पर बताते नहीं

LPG गैस सिलेंडर से होने वाली दुर्घटनाओं में इजाफे के बावजूद अधिकतर उपभोक्ता इस बात से अंजान हैं कि हादसे की स्थिति में वो मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसकी वजह है गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होने वाली लापरवाही। सालाना करोड़ों रुपए प्रीमियम का lpgभुगतान करने के बाद भी कंपनियां इस बारे में उपभोक्ता को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझतीं। पुणे जिले में 140 के आसपास गैस एजेंसियां हैं और उपभोक्ताओं की संख्या 24 लाख से ज्यादा है। बीते कुछ सालों में जिले में कई दुर्घटनाएं भी हुईं, लेकिन एक भी उपभोक्ता ने अब तक मुआवजे के लिए आवेदन नहीं किया। अधिकारी स्वयं इस बात की पुष्टि करते हैं। कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर दोनों की तरफ से अधिकृत उपभोक्ताओं को बीमा कवर दिया जाता है। कंपनियों की वेबसाइट पर सिटीजन चार्टर के तहत जानकारी भी दी गई है, लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर इसे स्वीकारने में दोनों ही कतराते हैं। इस संबंध में जब डिस्ट्रीब्यूटरों से बात की गई तो उन्होंने इसे कंपनी की पॉलिसी करार दिया और कंपनी अधिकारी बीमे को डीलरों की जिम्मेदारी ठहराते रहे।

कहीं जिक्र नहीं
गैस कंपनियों की तरफ से अधिकृत उपभोक्ताओं को ग्राहक पुस्तिका दी जाती है, जिस पर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश होते हैं। इस पुस्तिका में भी बीमा कवर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं सिलेंडर की डिलेवरी के दौरान मिलने वाली रसीद पर भी बीमे का जिक्र नहीं रहता।

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सबसे ज्यादा ताज्जुब की बात तो ये है कि बीमे की राशि को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। कंपनी अधिकारियों से लेकर डीलर और यहां तक कि महाराष्ट्र गैस डीलर एसोसिएशन के पास भी इसका कोई सीधा जवाब नहीं मिला। हालांकि इंडेन के एक अधिकारी ने इतना जरूर कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ से 10 लाख का बीमा करवाया जाता है, लेकिन जब उनसे कंपनी के बीमा कवर के बारे पूछा गया तो वो खामोश हो गए।

नियमों का उल्लंघन
जानकारी के मुताबिक कंपनियों के अलावा डीलर स्तर पर भी उपभोक्ताओं का थर्ड पार्टी बीमा कराया जाता है। लेकिन वो भी इस संबंध में उपभोक्ता को कुछ बताना जरूरी नहीं समझते। जबकि नियमानुसार उन्हें डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से इसकी जानकारी देना आवश्यक है। शहर के अधिकांश डिस्ट्रीब्यूटर इस नियम की खुलेआम अवेहलना कर रहे हैं।