क्या मनमोहन काल में लिखी गई थी बाबा के जेल जाने की कहानी?

राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद, जहां इसका क्रेडिट लेने की अप्रत्यक्ष जंग चल रही है वहीं पूर्व सीबीआई अधिकारी के खुलासे ने कांग्रेस को खुश होने का एक मौका दिया है. तत्कालीन जांच अधिकारी एम. नारायणन का कहना है कि डेरा प्रमुख के खिलाफ जांच करते समय उन्हें पूर्व प्रधनामंत्री मनमोहन सिंह का पूरा सहयोग मिला, जिसके बिना आगे बढ़ना संभव नहीं था. नारायणन के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब के नेताओं द्वारा राम रहीम के प्रति नरमी बरतने का दबाव डाला जा रहा था. इस बारे में जब मनमोहन सिंह से बात की, तो उन्होंने राजनीतिक दबाव को दरकिनार करते हुए सीबीआई को काम करने की पूरी आज़ादी दी.

नारायणन कहते हैं, मामला 2002 में एक गुमनाम चिट्टी के ज़रिये सामने आया, लेकिन 2007 तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट ने तत्कालीन सीबीआई चीफ विजय शंकर को तलब करके 57 दिनों में जांच पूरी करने के निर्देश दिए. बकौल नारायणन यह काम इतना आसान नहीं थी. जब हम जांच करने पहुंचे तो पता लगा कि 1999 से 2002 के बीच 200 से ज्यादा यौन उत्पीड़न की शिकार साध्वियां डेरा छोड़कर चली गईं थीं. भरपूर कोशिशों के बावजूद हम 10 साध्वियों तक पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन सबकी शादी हो चुकी थी और कोई भी आगे आना नहीं चाहती थी. किसी तरह हमने दो साध्वियों को रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए राजी किया और 56वें दिन अदालत में चार्जशीट दाखिल हो सकी.

2009 में रिटायर्ड हुए नारायणन का कहना है कि रणजीत सिंह बाबा का समर्पित सेवादार था, पर जब उसे अपनी बहन के साथ बलात्कार के बारे में पता चला तो वो बहन को लेकर सिरसा से दूर चला गया. इसके कुछ दिनों बाद ही बाबा से जुड़ी एक गुमनाम चिट्टी प्रधानमंत्री और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची. बाबा के समर्थकों को शक था कि इस चिट्टी के पीछे रंजीत का हाथ है, जिसके चलते उसकी हत्या करवा दी गई. ये साबित हो चुका है कि जिस रिवाल्वर से रंजीत ही हत्या हुई, वो डेरा के मैनेजर की ही थी. इसके अलावा अपराध स्थल पर डेरा का वॉकी-टॉकी भी मिला था.

क्या अमित शाह का गणित कमज़ोर है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं को लेकर खासे चर्चा में रहते हैं. एक दौरा ख़त्म होता नहीं कि दूसरे की तैयारी हो जाती है. 2014 में पद संभालने के बाद से मोदी 56 विदेश यात्राएं कर चुके हैं. जिस रफ़्तार से मोदी विदेशों की सैर कर रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि कार्यकाल ख़त्म होते-होते वो इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काफी पीछे छोड़ देंगे. हालांकि, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लगता है कि मोदी ने मनमोहन सिंह के मुकाबले कम विदेश यात्राएं की हैं. अब शाह ने किस गणित के आधार पर यह बयान दिया समझना मुश्किल है, क्योंकि आंकडें को कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं.

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मोदी ने 3 सालों में 56 विदेशी दौरे किए हैं और कुल 132 विदेशों में गुज़ारे हैं. अब मनमोहन सिंह की बात करें तो अपने 10 सालों के कार्यकाल में उन्होंने 80 विदेश यात्राएं की और 305 विदेशों में रहें. इस हिसाब से देखा जाए तो पूर्व प्रधानमंत्री ने हर साल औसतन 8 विदेशी दौरे किए, जबकि मोदी ने 18. अब सोचने वाली बात यह है कि संख्या में 8 बड़ा होता या 18?

सेंचुरी तय
अमित शाह शायद पीएम मोदी के तीन सालों की तुलना मनमोहन सिंह के 10 सालों के कार्यकाल से कर रहे हैं. अगर ऐसा है भी तो, आने वाले 2 सालों में नरेंद्र मोदी विदेश यात्राओं की सेंचुरी पूरी अवश्य कर लेंगे, क्योंकि उनकी रफ़्तार पहले से ही काफी तेज़ है.

MODI का कमाल: 97 घंटों में ही पूरा किया 6 दिनों का दौरा

प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश यात्राओं पर तंज कसने वाला विपक्ष भी मोदी के टाइम मैनेजमेंट का कायल हो गया है। मोदी हाल ही में तीन देशों का दौरा कर भारत लौटे हैं। अमूमन इस तरह के दौरों में कम से कम 6 दिनों का वक्त लगता है, लेकिन modiMODI ने महज 97 घंटों में इसे खत्म कर दिया। हालांकि इसके लिए उन्हें कुछ हद तक अपनी नींद की कुर्बानी देनी पड़ी। ऐसे वक्त में जब नेता अपने ऐशो आराम को अधिक तवज्जो देते हैं, मोदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि काम उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे अव्वल है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने होटलों में रात गुजारने के बजाए फ्लाइट में ही सोना पसंद किया और ज्यादातर कार्यक्रम सुबह के रखे। इसके चलते वे कम समय से अधिक से अधिक लोगों से मुलाकात कर सके। यहां गौर करने वाली बात ये है कि फ्लाइट में भी उन्होंने पूरे वक्त आराम नहीं किया बल्कि बैठकों में व्यस्त रहे।

ऐसा रहा दौरा
मोदी 30 मार्च से 2 अप्रैल तक बेल्जियम, अमेरिका और सउदी अरब के दौरे पर गए थे। कुल 5 दिनों के इस दौरे के दौरान उन्होंने समय बचाने के लिए दिल्ली से ब्रसेल्स, ब्रसेल्स से वॉशिंगटन और वॉशिंगटन से रियाद के बीच रात में ही सफर किया। वे महज वॉशिंगटन और रियाद में ही रात के वक्त होटल में ठहरे।

दिए हैं निर्देश
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, प्रधानमंत्री ने समय बचाने के लिए रात के वक्त यात्रा की और विमान में ही सोए। यदि वे ऐसा नहीं करते तो 97 घंटों में दौरा कभी खत्म हो ही नहीं सकता था। अधिकारी के अनुसार, पीएम ने खुद यह निर्देश दिया है कि जब रात के वक्त कोई काम नहीं हो सकते तो, होटलों में ठहरने के बजाए यात्रा करनी चाहिए। पीएम केवल तभी होटल में ठहरते हैं जब अगला दिन बेहद व्यस्त हो।

मनमोहन थे आराम पसंद?
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राएं अमूमन लंबी होती थीं। वे रात में सफर करने से कतराते थे। अपने पहले दो सालों के कार्यकाल में मोदी ने 95 दिन विदेश यात्राओं पर रहे। जबकि इसी अवधि में मनमोहन सिंह ने 75 दिन विदेशों में बिताए थे। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री रात के वक्त सफर नहीं करना चाहते थे, इसलिए अगर यात्रा दो या तीन देशों की होती थी तो वे होटलों में ही ठहरते थे।