इनकी हिंदी देखकर आप भी शरमा जाएंगे

अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी जैसे हिंदी प्रेमियों की पार्टी भाजपा में ऐसे नेताओं की भी कमी नहीं है, जो अपने हिंदी के ज्ञान से अर्थ का अनर्थ कर रहे हैं. अब पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी को ही देख लीजिए. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जिन शब्दों में स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत का प्रचार किया, उसे देखकर हिंदी को भी शर्म आ जाएगी. ये तस्वीर आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

सांसद और वकील मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से बॉटनी से बीएससी, दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी किया है. ये तस्वीर तब की है जब मंगलवार 27 जून को लेखी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड की तरफ से दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची. इस कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी, सांसद उदित राज आदि भी मौजूद थे.

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यहां रावण दहन है महापाप!

हर साल विजयादशमी पर रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ स्थान ऐसे भी हैं, जहां रावण दहन के बारे में सोचना भी पाप है। वहां भगवान राम की तरह ही रावण को पूजा जाता है। आइए जानते हैं, ऐसे स्थानों के बारे मेंः

ravanहिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ गांव को शिवनगरी के नाम से भी पहचाना जाता है। यहां रावण को जलाना महापाप है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी ने रावण का पुतला जलाया तो उसकी मौत निश्चित है। मान्यता है कि रावण ने कुछ समय तक बैजनाथ में भगवान शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था। इसलिए शिव के सामने उनके भक्त के पुतले को जलाना उचित नहीं है। ऐसे करने वाले को स्वयं भगवान शिव दंड देते हैं। बैजनाथ में बिनवा पुल के पास रावण मंदिर भी है।
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर बनाया जा रहा है। मान्यता है कि गाजियाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव राणव का ननिहाल था। इस गांव का नाम पहले विश्वेश्वर था, जो रावण के पिता विश्रवा के नाम पर पड़ा। बाद में इसे बिसरख कहा जाने लगा।

महाकाल की नगरी उज्जैन में भी रावण की पूजा करने वाले मौजूद हैं। यहां के चिखली ग्राम में ऐसी मान्यता है कि यदि रावण की पूजा नहीं की गई तो पूरा गांव भस्म हो जाएगा। इसी के चलते गांववासी रावण दहन नहीं करते, बल्कि विजयादशमी पर उसकी पूजा की जाती है। गांव में रावण की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।

मध्यप्रदेश के ही मंदसौर में भी रावण पूज्यनीय है, यहां रावण की एक विशालकाय मूर्ति भी है। कहा जाता है कि रावण मंदसौर का दामाद था। उसकी पत्नी मंदोदरी मंदसौर की ही रहने वाली थी। मंदोदरी के कारण ही दशपुरा का नाम मंदसौर पड़ गया। इसी तरह छिंदवाड़ा में रावण को पूजा जाता है।

जोधपुर में भी रावण का मंदिर है। खासकर दवे, गोधा और श्रीमाली समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि जोधपुर रावण का ससुराल था, जबकि कुछ का कहना है कि रावण के वध के बाद उसके वंशज यहां बस गए थे। स्थानीय निवासी स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं।

महाराष्ट्री के अमरावती और गढ़चिरौली जिले में रावण दहन नहीं होता। कोरकू और गोंड आदिवासी रावण और उसके पुत्र मेघनाद को अपना देवता मानते हैं। फागुन के अवसर पर दोनों की पूजा भी की जाती है।

कर्नाटक के कोलार जिले में रावण अब भी पूज्यनीय है। फसल महोत्सव के दौरान यहां रावण की पूजा अर्चना की जाती है। इसके पीछे लोगों का तर्क है कि क्योंकि रावण शिव का भक्त था, इसलिए वो हमारे लिए भी पूज्यनीय है। राज्य के मंडया जिले के मालवल्ली तालुका में रावण का एक मंदिर भी है।

दबंगों का खौफः तालाब से होकर निकाली शवयात्रा

जीने की बात तो छोड़ दीजिए हमारे देश में आम नागरिक को सम्मान से मरने का हक भी नहीं है। कम से कम मध्यप्रदेश की घटना को देखकर तो यही लगता है। दबंगों के खौफ के चलते जबलपुर में कुछ स्थानीय लोगों को पानी से भरे तालाब से होकर शवयात्रा jabalpurनिकालनी पड़ी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। दरअसल, शुक्रवार को जबलपुर के रेत माफियाओं ने रास्ता बंद कर दिया था। उन्होंने महिला की शवयात्रा को भी अपनी जमीन से गुजरने नहीं दिया। जिसके चलते शव को कमर तक पानी से भरे ़तालाब से गुजारना पड़ा। इतना ही नहीं, श्मशानघाट की जमीन में धान की फसल रोन दी गई थी, इसलिए पीडि़त परिवार ने निजी जमीन पर बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार किया।

डीएम को लगा बनावटी
जिलाधिकारी ने इस घटना को बनावटी करार दिया है। उन्होंने कहा कि लोग खेतों की मेड़ से होकर श्मशानघाट जाते हैं। वहीं इलाके के विधायक सुशील तिवारी ने कहा कि बेहर गांव में श्मशानघाट जाने का रास्ता जल्द बनवाया जाएगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रेत माफिया अक्सर ऐसा करते हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

पानी से इतना डरते क्यों हैं शिवराज?

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार सहित देश के कई हिस्सों में बाढ़ से हालात बेकाबू हो रहे हैं। जिन सड़कों पर गाडि़यां दौड़ती थीं, shivrajअब वहां नाव दिखाई दे रही हैं। अकेले मध्यप्रदेश में ही पिछले 24 घंटों में 20 लोगों की मौत की खबर है। इस बीच राज्य के पन्ना में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर आलोचना हो रही है। बाढ़ के पानी से बचने के लिए शिवराज ने पुलिसकर्मियों की गोद में सवार होकर प्रभावित इलाके को पार किया। इतना ही नहीं, जब मुख्यमंत्री ने अपने पांव जमीन पर रखे तो एक अधिकारी ने उनके जूते अपने हाथों में उठा लिए, ताकि गंदे न हो जाएं। सोशल मीडिया में अपनी इस शाही सवारी के लिए सीएम की आलोचना हो रही है। विपक्ष भी सवाल उठा रहा है, आखिर शिवराज सिंह को पानी से इतना डर क्यों लगता है?
सेना ने संभाला मोर्चा
एमपी के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में बारिश ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। तीन दिनों से जारी बारिश के चलते रीवा जिला टापू बन गया है। यहां कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। हालात से निपटने के लिए सेना को बुलाया गया है। सेना के जवान हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
बिहार बेहाल
पटना में बारिश ने पिछले 22 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 1975 के बाद यह पहला मौका है, जब पटना के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। छपरा, खगडि़या और सासाराम में हालात सबसे ज्यादा बुरे हैं। इसी तरह यूपी और राजस्थान में भी बारिश ने कहर बरपाया है। उधर, उत्तराखंड में बादल फटने से कई मकान बह गए हैं।

ये हैं व्यापम घोटाला उजागर करने वाले

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले को उजागर करने वाले आप और हम जैसे साधारण लोग ही हैं, लेकिन गलतvyapam1 को गलत करार देने की जिद आज उन्हें एक अलग पहचान दिला दी है। हालांकि इस पहचान के लिए उन्हें काफी कुछ कुर्बान करना पड़ा, अपना सुख और शांति भी। 25 वर्षीय आशीष चतुर्वेदी ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी से मास्टर इन सोशल वर्क (एमएसडब्लू) कर रहे हैं। आशीष को घोटाले की बू 2009 में आई, जब उन्हें अपनी मां के कैंसर के बारे में पता चला। इस सिलसिले में वो कई विशेषज्ञों से मिले। बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाले डॉक्टरों के कई जवाबों ने आशीष के जहन में इस कौतूहल को जन्म दिया कि आखिर ऐसे लोग डॉक्टर कैसे बन जाते हैं। इसके बाद वो अपने स्तर पर परीक्षा से लेकर डॉक्टर बनने तक की प्रक्रिया की पड़ताल में जुट गए।

2010 में आशीष की पड़ताल को तब रफ्तार मिली, जब चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने उनकी शिकायत पर कमेटी गठित की जिसने 115 स्टूडेंट्स को धोखाधड़ी का दोषी पाया। 2011 में आशीष ने व्यापम में काउंसलिंग फ्रॉड को लेकर एफआईआर दर्ज की। तब से लेकर अब तक आशीष इस संबंध में जांच एजेंसियों को हर संभव मदद करते आ रहे हैं। उन पर कई बार हमला भी किया जा चुका है, लेकिन फिर भी पीछे हटने को तैयार नहीं। इंदौर निवासी 34 वर्षीय फॉरेंसिक एक्सपर्ट प्रशांत पांडे राज्य सरकार की नींद उड़ाने वाले दूसरे शख्स हैं। प्रशांत के बारे में लोगों को पता तब लगा, जब उन्हें पिछले साल मई में भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप था कि व्यापम कार्यालय से जब्त की गई हार्डडिस्क में से संवेदनशील जानकारी प्रशांत ने लीक की। दरअसल, प्रशांत कई मामलों मेंं फॉरेंसिक एक्सपर्ट होने के नाते पुलिस की मदद कर चुके हैं, इसलिए पुलिस से उनकी पुराना रिश्ता है।

इस साल मार्च में प्रशांत ने मध्यप्रदेश के चीफ सेक्रेटरी, डीआईजी और एसटीएफ प्रमुख को अपनी गिरफ्तारी को लेकर हाईकोर्ट में घसीटा। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उनके पास एमपीएसईबी घोटाले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां हैं, जिसके चलते उनकी जान को खतरा बना हुआ है। इस कड़ी में तीसरा नाम है 38 वर्षीय आनंद राय का। एक अध्यापिका के बेटे आनंद ने अपनी मां से मिले आदर्शों को आधार बनाते हुए गलत का खुलकर विरोध किया। व्यापम का जिन्न बाहर निकलने से पहले तक आनंद इंदौर में गर्वनमेंट मेडिकल ऑफिसर थे, इसके बाद उन्हें धार जिले में ट्रांसफर कर दिया गया।

अनइथिकल क्लिीनिकल ट्रायल के खिलाफ आरटीआई दायर को लेकर 2010 में उन्हें अलग-अलग आरोपों का हवाला देते हुए भोपाल अस्पताल से बर्खास्त कर दिया गया। उस वक्त आनंद को यह अहसास हुआ कि कमजोर शैक्षणिक योग्यता वाले अमीर परिवारों के बच्चे भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के टॉपर बन गए। वो इस मामले में अपने स्तर पर पड़ताल करते रहे और 2011 में आनंद ने निर्दलीय विधायक पारस सखलेचा की मदद से इस मुद्दे को विधानसभा में उठवाया। इसके बाद घोटाले की कई परतें उजागर हुईं। आनंद ने व्यापम के संबंध में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में जनहित याचिकाएं दायर कीं।