टीसी ने यात्री को मारे थप्पड़!

  • पुणे रेलवे स्टेशन की घटना, TC के बचाव में उतरा रेलवे.
पुणे रेलवे स्टेशन पर एक टीसी द्वारा यात्री से मारपीट का मामला सामने आया है। ‘आज का खबरी’ के पास इस घटना का वीडियो में जिसमें साफ तौर पर नजर आ रहा है कि पहले एक युवा टीसी बिना उकसावे के यात्री को थप्पड़ मारता है उसके बाद वहां मौजूद आरपीएफ कर्मी भी उसके साथ मारपिटाई करता है। हालांकि रेलवे का कहना है कि उक्त यात्री ने पहले टीसी के साथ बदसलूकी की थी। जानकारी के मुताबिक एक फरवरी रात 12.30 बजे के आसपास टिकट चेकिंग स्टाफ ने यात्री को प्लेटफॉर्म नंबर 6 से पकड़ा। इसके बाद उसे डीसीटीआई कार्यालय लेकर लाया गया और यहां उसके साथ मारपीट की गई। जबकि, रेलवे का कहना है कि यात्री से जब टिकट दिखाने को कहा गया तो उसने न केवल गालीगलौच की बल्कि टीसी की शर्ट भी फाड़ दी।
गलती उसकी थी पर हाथ उठाना गलत
सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर क्रिष्णनथ पाटिल ने कहा, “उक्त यात्री के पास मान्य टिकट नहीं थी, जब टीसी ने उसे जुर्माना भरने को कहा तो उसने गालियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद उसे टीसी ऑफिस लाया गया, यहां भी उसने रेलवे स्टाफ के साथ बदसलूकी की। हालांकि बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने लिखित माफी मांगी”। पाटिल का भी मानना है कि इस तरह टीसी का हाथ उठाना गलत है। उन्होंने कहा, हमने टीसी को इस बारे में हिदायत दे दी है।
आम हैं घटनाएं
एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, “पुणे स्टेशन पर इस तरह की घटनाएं आम हैं। खासकर देर रात यात्रा करने वालों के साथ रेलवे स्टाफ और पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा बदसलूकी करते हैं। यात्रियों से मोबाइल दिखाने को कहा जाता है और गलती से उसमें कोई अश्लील वीडियो क्लिप मिल गई तो जबरन वसूली की जाती है। जो पैसे देने से इंकार करता है उसके साथ मारपीट होती है”।
छोड़ा क्यों, कार्रवाई करते
रेलवे प्रवासी ग्रुप की अध्यक्षा हर्षा शाह ने कहा, “अगर यात्री ने बदसलूकी की थी तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी, ताकि भविष्य में लोगों को सबक मिल सके। महज माफीनामा लेकर उसे छोड़ना समझ से परे है। जहां तक बात टीसी द्वारा हाथ उठाए जाने की है तो वो बिल्कुल गलत है। सरकारी अधिकारी को इस तरह अपना आपा नहीं खोना चाहिए”।

Knowledge Booster: क्या होती है Z, X कैटेगिरी सुरक्षा?

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अति विशिष्ट लोगों को सुरक्षा के घेरे में चलते हुए तो आपने बहुत देखा होगा। आपने Z सिक्योरिटी, Y सिक्योरिटी जैसी श्रेणियों के बारे में भी सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये श्रेणियां वास्तव में होती क्या हैं और किस आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाती है? अगर नही तो हम आपको यहां विस्तार से इस बारे में बताने जा रहे हैंः

कैसे मिलती है सुरक्षा?
Z,Xअगर किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या नेता को जान का खतरा हो तो उसे सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। ये सुरक्षा मंत्रियों को मिलने वाली सुरक्षा से अलग है। संबंधित व्यक्ति इस बारे में सरकार से आवेदन करता है और सरकार खुफिया एजेंसियों के जरिए पता लगाती है कि खतरे की बात में कितनी सच्चाई है। यदि खतरे की पुष्टि होती है तो सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की समिति यह तय करती है कि संबंधित व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। हालांकि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जज, राज्यों के गवर्नर, मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री अपने आप ही सुरक्षा के पात्र हो जाते हैं।

कौन करता है सुरक्षा?
पुलिस के साथ साथ कई एजेंसियां हैं जो वीआईपी, वीवीआईपी को सुरक्षा कवर मुहैया कराती हैं। जैसे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एनपीजी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड एनएसजी, भारत तिब्बत सीमा पुलिस आईटीबीपी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ। वैसे तो विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा का जिम्मा एनएसजी के कंधों पर ही होता है, लेकिन जिस तरह से जेड प्लस सुरक्षा लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है उसे देखते हुए सीआईएसएफ को भी यह काम सौंपा जा रहा है। मौजूदा वक्त में एनएसजी 15 लोगों को जेड प्लस सुरक्षा दे रही है, जबकि सीआईएसएफ भी कुछ को यह सुरक्षा मुहैया करा रही है।

क्या होती हैं श्रेणियां?

  • जेड प्लसः इसके तहत 36 जवानों को सुरक्षा में लगाया जाता है, जिसमें 10 से अधिक एनएसजी कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं। अधिकतर नेता इस सुरक्षा घेरे की जुगत में लगे रहते हैं।
  • जेडः इस श्रेणी में 22 जवान सुरक्षा मुहैया कराते हैं, जिसमें 5 एनएसजी कमांडो के साथ पुलिस अधिकारी होते हैं।
  • वाईः इसमें संबंधित व्यक्ति को 11 जवानों का सुरक्षा कवच मिलता है, जिसमें 1 या 2 एनएसजी कमांड और पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।
  • एक्सः 5 या 2 जवानों वाले इस सुरक्षा कवच में केवल सशस्त्र जवान ही शामिल होते हैं।

कौन करता है पीएम की सुरक्षा?
प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी उठाती है। वैसे भूतपूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को भी यह सुरक्षा मिलती है, लेकिन केवल 1 साल के लिए। हालांकि कुछ विशेष कानूनी प्रावधानों के जरिए यह सुविधा राजीव गांधी और अब उनके परिजनों को अनिश्चितकाल के लिए दी गई है।

America में दुर्घटना के बाद पुलिस बुलाना एक महिला को भारी पड़ गया। पुलिस ने न केवल उसे नशे के आरोप में हिरासत में लिया बल्कि उसके साथ अश्लील बर्ताव भी किया। वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस प्रशासन पर अपने अधिकारी को निलंबित करने का दबाव बढ़ गया है। उधर, महिला भी संबंधित अधिकारी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने जा रही है। ड्राइविंग करते वक्त अमांडा की कार का दूसरी कार से एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद अमांडा ने 911 कॉल करके मदद मांगी। मौके पर पहुंचे दो पुलिस अधिकारियों ने अमांडा को ही हिरासत में ले लिया। उन्हें शक था कि अमांडा ने शराब पी रखी है। इसके बाद एक पुलिसकर्मी उसे कुछ दूर ले गया, जहां बेहद अश्लील अंदाज में अमांडा की तलाशी ली गई।

नहीं सुनी
अमांडा के दोनों हाथ बांधने के बाद पुलिसकर्मी ने उसके चेस्ट को छूना शुरू किया, फिर उसकी पीट पर हाथ फेरने लगा। अमांडा ने बार बार पुलिसकर्मी से दूर रहने को कहा, लेकिन वो तलाशी का हवाला देकर उसे छूता रहा। अधिकारी ने कहा, मैं तुम्हारी तलाशी ले सकता हूं और वही कर रहा हूं।

पुलिस का तर्क
पुलिस प्रशासन को लगता है कि अधिकारी ने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया। विभाग के मुताबिक, उसके पास केवल तीन महिला पुलिसकर्मी है, ऐसे में अधिकतर पुरुष अधिकारी ही तलाशी लेते हैं।

फ्रेंच फ्राई खाने की सजा जेल

french fryफ्राई खाने पर एक महिला को जेल की हवा खाली पड़ी। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अमेरिकी पुलिस का मजाक उड़ रहा है। दरअसल, वाशिंगटन डीसी के एक रेस्त्रां में पुलिस अधिकारी खाना खाने पहुंचे। उन्होंने फ्रेंच फ्राई खाना शुरू ही किया था कि एक महिला वहां पहुंच गई। कुछ देर की बातचीत के बाद वो पुलिस अधिकारी की प्लेट से फ्रेंच फ्राई खाने लगीं। अधिकारी ने रोका, मगर वो नहीं मानी। इसके बाद पुलिसकर्मी ने महिला को धमकी देते हुए कहा कि अगर वो नहीं मानी तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस धमकी का महिला पर कोई असर नहीं हुआ। उसने प्लेट से फ्रेंच फ्राई उठाना जारी रखा। इससे नाराज पुलिसकर्मी ने उसे चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया।

कश्मीर में फिर हमले, जवान शहीद

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कश्मीर में फिर हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को पुंछ के अल्लाह पीर में मुठभेड़ के बाद कई इलाकों से इस तरह की खबरें सुनने में आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक, आतंकियों ने तीन स्थानों पर घुसपैठ की कोशिश की है। सुरक्षाबलों की ओर की जा रही कार्रवाई में चार आतंकी मारे जा चुके हैं। जबकि एक पुलिसकर्मी भी शहीद हुआ है, साथ ही 3 सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर है। आतंकियों ने सुबह अल्लाह पीर इलाके में स्थित मिनी सचिवालय को निशाना बनाया। इसके बाद नौगाम सेक्टर में एलओसी के पास सुरक्षाबलों की उनसे मुठभेड़ हुई। गौरतलब है कि घाटी में माहौल गर्माने के लिए सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें लगातार जारी हैं। तकरीबन दो साल के बाद घाटी के कुछ इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। अगर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए तो फिर से पूरी तरह कमान सेना के हाथ में दी जा सकती है। इसके मद्देनजर घुसपैठ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

‘अब हर दावे पर होगा शक’

  • कांस्टेबल दंपति के झूठ से पुणे पुलिस शर्मिंदा

एवरेस्ट फतेह का झूठा दावा करने वाले युगल के चलते पुणे पुलिस को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। पुलिस कांस्टेबल दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ के दावे को नेपाल सरकार ने खारिज कर दिया है। साथ ही उन पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया है। इस संबंध में पुणे पुलिस को पत्र भेजकर सूचना दी गई है। पुलिस कमिश्नर रश्मि शुक्ला खुद मानती हैं कि इस घटना से पुलिस की छवि खराब हुई है। दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ का झूठ सामने आने के बाद से ही दोनों फरार है। दोनों शिवाजीनगर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ थे। मुख्यालय के पुलिसकर्मी इस बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहते, लेकिन वे इतना जरूर कहते हैं कि दिनेश और तारकेश्वरी ने पुलिस की छवि खराब की है।

policepuneहोता रहेगा शक
एक डीसीपी रैंक के अधिकारी ने कहा, महज लोकप्रियता हासिल करने के लिए इतना बड़ झूठ बोलने वालों को पुलिस में रहने का अधिकार नहीं है। पुलिसकर्मी होने के नाते उनका अपराध और भी बड़ा हो जाता है। भविष्य में जब कोई पुलिसकर्मी कोई रिकॉर्ड बनाएगा तो पहली बार में उसे भी शक की निगाहों से देखा जाएगा। राठौड़ दंपति के कृत्य की जितनी निंदा की जाए कम है।

दुख और गुस्सा
दिनेश को करीब से जानने वाले एक कांस्टेबल ने कहा, हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि वो इतना बड़ा झूठ बोल सकता है। पूरा डिपार्टमेंट उसके झूठ को सच मान रहा था, हम सभी बेहद खुश थे। दिनेश झूठ बोलने वाला व्यक्ति नहीं था। वो अपने काम से काम रखता था। हमें इस घटना पर दुख भी है और गुस्सा भी। दोनों ने फरार होकर बहुत बड़ी गलती की है। उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी।

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जाएगी नौकरी!
कमिश्नर शुक्ला ने कहा, दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय जांच के बाद से ही दोनों फरार हैं। माना जा रहा है कि उच्च अधिकारियों ने कांस्टेबल दंपति की बर्खास्तगी की सिफारिश की है। क्योंकि इस मामले ने पुलिस को शर्मसार किया है, इसलिए अधिकारी चाहते हैं कि दंड इतना सख्त हो कि फिर कोई पुलिसकर्मी झूठ बोलने का साहस न दिखा पाए। अगर दोनों की नौकरी बच भी जाती है तो उनका डिमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि रुकना तय है।

क्या है मामला
दिनेश और तार्केशवरी ने 5 जून को एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की थी कि उन्होंने 23 मई को एवरेस्ट फतेह किया था। पुणे पुलिस ने इसके लिए दोनों का सम्मान भी किया था। कांस्टेबल दंपति के इस दावे पर पर्वतरोहियों ने एक दल के आपत्ति जताई थी। जिसके बाद जांच शुरू हुई और नेपाल सरकार से संपर्क किया गया। अब नेपाल सरकार ने भी दिनेश के दावे को नकार दिया है।

J&K: जवानों के साथ बर्बरता!

जम्मू कश्मीर (J&K) में हालात सुधरने के बजाए और बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाबलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। खबर है कि चंद रोज पहले कुछ स्थानीय लोगों ने एक सीआरपीएफ जवान के साथ बर्बर सलूक किया। उसे आर्मी J&Kअस्पताल में भर्ती कराया गया है। जवान छुट्टी से वापस लौट रहा था। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे पहले एक जवान को गोली मारने की भी खबर मिली थी। सूत्र बताते हैं कि सीआरपीएफ जवान कश्मीर स्थित अपने कैंप वापस लौट रहा था। तभी कुछ लोगों ने उसे रास्ते में रोक लिया। जवान ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की, लेकिन उसका आई कार्ड हमलावरों की नजर में आ गया। इसके बाद उन्होंने जवान को बेरहमी से मारापीट और फिर उसे धारधार हथियारों से घायल कर दिया। पीडि़त जवान को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

विशेष निर्देश
कश्मीर स्थित सुरक्षाबलों के कैंप के आसपास बड़ी संख्या में एकट्ठा होकर प्रदर्शनकारियों द्वारा नारेबाजी की जा रही है। इसके मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारी आजादी, आजादी, कश्मीर लेकर रहेंगे जैसे नारे लगा रहे हैं। खबरें हैं कि पाकिस्तान से कुछ आतंकी घाटी में दाखिल हो चुके हैं और उनके निशाने पर सुरक्षा बल हैं। प्रदर्शनकारियों के रूप में वही जवानों पर हमले कर रहे हैं ताकि और हिंसा भड़काई जा सके। इसे देखते हुए सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

उखाड़ रहे सड़कें
सुरक्षा बलों की परेशानी बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़कें खोदी जा रही हैं। रात के वक्त उपद्रवी बाहर निकलते हैं और प्रमुख सड़कों को खोद देते हैं। कहीं कहीं तो इसके लिए बाकायदा बुल्डोजर की मदद भी ली जा रही है। सड़कें खुदी होने के चलते सुरक्षा बलों को एक स्थान से दूरे स्थान तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कर्फ्यू के बावजूद उपद्रवी इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

दगा किया तो मिली गोली!

हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी सुलग रही है। स्थानीय तौर पर दावा किया गया है कि वानी के जनाजे में 2 लाख लोग शामिल हुए, इससे वानी की फैन फॉलोइंग का अंदाजा लगाया जा सकता है। वानी ने घाटी में थोड़े ही वक्त में vaniखुद को एक हीरो के तौर पर स्थापित कर लिया था। उसके चाहने वालों में महिलाओं की संख्या भी काफी ज्यादा थी। वानी मूलरूप से श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर शरीफाबाद नामक गांव का रहने वाला था। इस गांव तक पहुंचने का रास्ता जिस तरह से टेड़ामेड़ा है, उसी तरह से वानी की जिंदगी भी चरमपंथ की आड़ी तिरछी राहों से होते हुए सुरक्षा बलों की गोली पर जाकर खत्म हुई।

   कहा जा रहा है कि वानी को सुरक्षाबल केवल इसलिए निशाना बना सके क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड ने उसके ठिकाने के बारे में सूचना दी थी। हालांकि ये बात अलग है कि घाटी के लोग इस बात पर यकीन नहीं करते। उनके मुताबिक बुरहान वानी के साथ चंद पल बिताने के लिए लड़कियां अपना सबकुछ कुर्बान करने को तैयार रहती थीं। ऐसे में यह जानते हुए भी कि सुरक्षा बल उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, कोई क्यों भला मुखबरी करेगा। वैसे वानी की आशिक मिजाजी के किस्से श्रीनगर से लेकर शरीफाबाद तक फैले हैं। उसके कई महिलाओं से संबंध थे। अपनी कदकाठी और चरपमंथी विचारधारा वाले समुदाय में फिली शौहरत के चलते वह हर थोड़े वक्त में माशूका बदलता रहता था। लड़कियां इस बात को बखूबी जानती थीं कि वानी ज्यादा वक्त तक उनके साथ नहीं रहेगा बावजूद इसके वो रिश्ता बनाने को तैयार हो जाती थीं।

साथी से किया दगा
वानी के खिलाफ घाटी में कोई कुछ सुनना, बोलना नहीं चाहता। जो उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं, वो भी खामोश रहना पसंद कर रहे हैं। उन्हें लगता है यदि उन्होंने कुछ कहा तो उनकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि दबी जुबान में वो यह स्वीकारते हैं कि वानी की रंगीन मिजाजी के चलते अंदरूनी तौर पर असंतोष बढ़ रहा था। ऐसी चर्चा है कि वानी ने अपने साथी की गर्लफ्रेंड के साथ भी संबंध बनाए थे। जिसके चलते दोनों में विवाद हुआ था। वानी के ठिकाने के बारे में उसकी महबूबाओं को कोई जानकारी नहीं होती थी, केवल साथी जानते थे कि वो कब कहां जाएगा। लिहाजा स्थानीय लोगों को लगता है कि वानी से नफरत करने वाले उसके किसी साथी ने ही मुखबरी की और गर्लफ्रेंड वाला मामला उछाल दिया ताकि उस पर किसी को शक न हो।

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लगते थे पोस्टर
22 वर्षीय वानी अपनी आतंकी सोच के चलते घाटी में पोस्टरबॉय बन गया था। आलम ये था कि वानी के पोस्टर घरों में लगे मिल जाया करते थे। सोशल मीडिया पर सक्रिय वानी का स्थानीय नेटवर्क बेहद मजबूत था। घाटी के किस घर में क्या हो रहा है, उसे हर बात की जानकारी थी। वैसे ऐसा नहीं है कि पूरी की पूरी घाटी उसे पसंद करती थी। अमन पसंद लोग वानी की सोच के विस्तारित रूप को देखकर चिंतित भी थे और आक्रोषित भी। हालांकि ये बात अलग है कि उनकी संख्या बेहद सीमित थी। कहा जाता है कि वानी बीच बीच में युवाओं से प्रत्यक्ष तौर पर मुखातिब होता था। वो तब तक उन्हें बरगलाता था, जब तक कि वो जिहाद के इस रूप को अपना नहीं लेते।

भाई के नाम पर
कहा जाता है कि वानी ने 2010 में घाटी में हुई हिंसा का हवाला देकर बंदूक उठाई। उस दौरान पुलिस के साथ संघर्ष में वानी का भाई घायल हुआ था, जिसका प्रतिशोध लेने के लिए वो आतंकी बन गया। हालांकि स्थानीय लोग बताते हैं कि वो बचपच से ही चरमपंथी विचारधारा से प्रभावित था।  पाकिस्तान से भारत के प्रति आग उगलने वाले आतंकी वानी के हीरो हुआ करते थे। 2010 में जो हुआ, उसने केवल बुरहान वानी को जल्दी बंदूक उठाने के लिए प्रेरित किया।

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कई पुलिसकर्मी लापता
घाटी में हिंसा के बाद से अब तक कई पुलिसकर्मी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें अगवा कर लिया है। जो सुरक्षाकर्मी हिंसा में घायल हुए थे उनमें से कुछ ही हालत गंभीर बताई जा रही है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी सड़कों पर फैले हैं।

जानें कैसे धधका कश्मीर
स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर कैसे नफरत और हिंसा की आग में जला, कैसे कश्मीर के युवाओं ने अमन परस्ती के बजाए पाकिस्तान के बहकावे में आकर बंदूक को अपना साथ बनाया। इस तरह के कई सवालों के जवाब आप कश्मीर पर लिखी गईं किताबों से प्राप्त कर सकते हैं। यहां हम आपकी सहायता के लिए कुछ किताबों के लिंक दे रहे हैं। जो एमाजोन पर काफी सस्ते दामों में उपलब्ध हैं।


Knowledge Booster: वर्दी देखकर पहचानें रैंक

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एक पुलिसकर्मी को देखकर उसकी रैंक का पता कैसे लगाया जा सकता है? क्या आपके मन में यह सवाल उठता है? यदि हां, तो यह जानकारी आपके काम की हो सकती है। यहां हम आपको जो बताने जा रहे हैं, उसके बाद आप किसी भी पुलिसकर्मी को देखकर पलक झपकते ही उसकी उसकी रैंक पता लगा लेंगे।

पुलिस कॉन्स्टेबल एक कॉन्स्टेबल की वर्दी पर किसी तरह का कोई निशान या तमगा नहीं होता।

Knowledge Boosterसीनियर पुलिस कॉन्स्टेबल: एक वरिष्ठ पुलिस कॉन्स्टेबल की वर्दी पर इस तरह का निशान या तमगा होता है।

 
head constableहेड कॉन्स्टेबल: एक हेड पुलिस कॉन्स्टेबल की वर्दी पर इस तरह का निशान या तमगा होता है।

 

 

 

assistant subअसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर: सहायक उप पुलिस निरीक्षक की वर्दी पर एक स्टार होता है, जिसके नीचे लील और नीचे रंग की पट्टी होती है।

 

 

 

 

sub inspectorसब इंस्पेक्टर: उप पुलिस निरीक्षक की वर्दी पर दो स्टार होते हैं, जिसके नीचे लाल और नीने रंग की पट्टी होती है।

 

 

 

 


piइंस्पेक्टर:
पुलिस निरीक्षक की वर्दी पर तीन स्टार होते हैं, जिसके नीचे लाल और नीने रंग की पट्टी होती है।

 

 

 

 

 

inspectorअसिस्टेंट पुलिस कमिश्नर या डिप्टी सुप्रीटेंडेंटः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर तीन स्टार होते हैं, लेकिन उनके नीचे लाल नीली पट्टी नहीं होती।

 

 

 

 

additional dy cpएडिशनल डिप्टी कमिश्नर या एडिशनल सुप्रीटेंडेंटः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर अशोक का चिह्न होता है।

 

 

 

 

dcpडिप्टी कमिश्नर या सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिसः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर अशोक के चिह्न के साथ एक स्टार होता है।

 

 

 

 

आईपीएस अधिकारियों की वर्दी

aspअसिस्टेंट सुप्रीटेंडेंट (प्रोबेशनरी रैंक) : इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर एक स्टार होता है और उसके नीचे आईपीएस लिखा होता है।

 

 

 

 

ips acp1असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर या डिप्टी सुप्रीटेंडेंटः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर तीन स्टार होते हैं और उसके नीचे आईपीएस लिखा होता है।

 

 

 

 

ips additional dycpएडिशनल डिप्टी कमिश्नर या एडिशनल सुप्रीटेंडेंटः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर अशोक का चिह्न होता है और उसके नीचे आईपीएस लिखा होता है।

 

 

 

 

ips dycडिप्टी कमिश्नर या सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिसः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर अशोक के चिह्न के साथ एक स्टार होता है और उनके नीचे आईपीएस लिखा होता है।

 

 

 

 

joint cpज्वाइंट कमिश्नर या डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल: इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर अशोक के चिह्न के साथ तीन स्टार होते हैं और उनके नीचे आईपीएस लिखा होता है।

 

 

 

 

ips additional cpएडिशनल कमिश्नर या इंस्पेक्टर जनरलः इस रैंक के पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर एक स्टार और नीचे दर्शाया गया चिह्न होता है। साथ ही आईपीएस भी लिखा होता है।

 

 

 

 

cpपुलिस कमिश्नर: पुलिस कमिश्नर की वर्दी पर अशोक की लाट के साथ नीचे दर्शाया गया चिह्न होता है। साथ ही आईपीएस भी लिखा रहता है।

 

 

 

 

ध्यान देंः राज्यों के पुलिस नियमों के आधार पर रंग या आकार आदि में कुछ अंतर हो सकता है।

Molestation Case: अच्छा हुआ सस्पेंड हुए

युवती से छेड़छाड़ और मारपीट की एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर रश्मि शुक्ला के आदेश पर कोंडवा पुलिस स्टेशन के एक सब इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।

File Photo.
File Photo.

अधिकतर पुलिसकर्मी इस कार्रवाई को सही मानते हैं। उनका कहना है कि इससे पुलिस में अनुशासन बनाने और उसकी छवि सुधारने में मदद मिलेगी। Kondhwa थाने के एक पुलिसकर्मी ने कहा, “उन्हें सस्पेंड तो होना ही था। आला अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश हैं कि महिलाओं से जुड़े मामलों में खासतौर पर गंभीरता बरती जाए, इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज न करना सीधे तौर पर निर्देशों का उल्लंघन है”।

       थाने के ही एक अन्य अधिकारी ने कहा, “बार-बार सबको यह बताया जाता है कि शिकायत के आधार पर एफआईआर तुरंत दर्ज करनी चाहिए। इसके बाद भी अगर कोई नहीं समझता तो फिर सजा लाजमी है। वैसे भी यह मामला काफी संवेदनशील था, पुलिसकर्मियों को तुरंत हरकत में आना चाहिए था। कुछ लोगों की वजह से पूरे विभाग का नाम खराब होता है’। गौरतलब है कि 1 मई को लुल्लानगर रोड पर कुछ लड़कों ने एक युवती से छेड़छाड़ करते हुए उसके दोस्तों के साथ मारपीट की थी। इस मामले में जब पीडि़ता ने कोंडवा पुलिस चौकी में रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही तो पुलिस टालमटोली करती रही।

सही फैसला
क्राइम ब्रांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “प्रारंभिक जांच पड़ताल के बाद ही सस्पेंड करने का फैसला लिया जाता है। लिहाजा इसमें कोई शक नहीं कि पुलिसकर्मियों पर जो आरोप लगाए गए हैं, उनमें सच्चाई है। गलत करने वाले को सजा मिलनी ही चाहिए, फिर भले ही वो किसी भी रैंक का हो”।

आम हैं घटनाएं
सब इंस्पेक्टर रैंक की एक महिला अधिकारी ने कहा, ‘चौकी स्तर पर इस तरह की घटनाएं आम हैं। चौकी में कुछ ही पुलिसकर्मी होते हैं, इसलिए कई बार वो मनमानी कर जाते हैं। मेरी लोगों की यही गुजारिश है कि यदि चौकी में उनकी बात नहीं सुनी जा रही तो उन्हें तुरंत पुलिस स्टेशन जाना चाहिए। पुलिस का पहला काम है पीडि़त की बात सुनकर रिपोर्ट दर्ज करना और आरोपियों पर कार्रवाई करना। जो पुलिसकर्मी इसमें असफल रहता है, उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए”।

समर्थन भी
हालांकि कुछ पुलिसकर्मी ऐसे भी हैं, जो मानते हैं कि निलंबन की कार्रवाई सही नहीं। एक कान्स्टेबल ने कहा, “कई बार हम सोचते हैं कि दोनों पक्षों को समझाकर मामला निपटा दिया जाए। इसलिए एफआईआर दर्ज करने में थोड़ी देरी हो जाती है। कहीं कहीं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश होते हैं कि एफआईआर दर्ज करने से पहले उन्हें अवगत कराया जाए, इस प्रक्रिया के चलते भी बात अटक जाती है”।

लेन देन का चक्कर?
एक रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, “पुलिस की तरफ से एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही की जाती है, इसमें कोई दोराय नहीं। कई बार देरी के वाजिब कारण होते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में व्यक्तिगत हितों के चलते ऐसा किया जाता है। भ्रष्ट पुलिसकर्मी जानबूझकर तब तक केस दर्ज नहीं करते, जब तक दूसरे पक्ष के साथ उनका कोई समझौता नहीं हो जाता। पुलिस फोर्स अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों से भरी हुई है”।