यूपी को सिर्फ मोदी पसंद हैं

उत्तर प्रदेश (UP) की जनता ने साफ़ कर दिया है कि उसे अखिलेश और राहुल का साथ नहीं बल्कि मोदी पसंद हैं. अब तक के रुझानों के आधार पर यूपी में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया है. यानी उसे सरकार बनाने के लिए किसी के साथ की ज़रूरत नहीं है. UPभाजपा ने पिछले चुनाव के मुकाबले ऐतिहासिक वोट प्राप्त किए हैं. इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि नोटबंदी को लेकर जनता में केंद्र सरकार के प्रति किसी तरह गुस्सा नहीं है. वहीं इस चुनाव ने मायावती को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया है, बसपा 30-25 सीटों पर ही सिमटकर रह गई है. सपा और कांग्रेस के हाल भी काफी बुरा रहा है, दोनों पार्टियों को जनता ने पूरी तरह नकार दिया है. यूपी में कुल 404 सीटें हैं और बहुमत के लिए 202 सीटों की ज़रूरत है, और भाजपा इस आंकड़े से काफी आगे निकल गई है.

उत्तराखंड में भी भाजपा

उत्तर प्रदेश की तरह ही उत्तराखंड में भी भाजपा जीत की तरफ बढ़ रही है. अब तक के रुझानों के आधार भाजपा को 54 सीटें मिल रही हैं और कांग्रेस महज 9 सीटों पर सिमटकर रह गई है. वहीं पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाती दिख रही है और गोवा में भी कांग्रेस आगे है. इन दोनों ही राज्यों में आम आदमी पार्टी को करार झटका लगा है. माना जा रहा था कि यहां आप की सरकार बन सकती है.

खाट पंचायत में खटिया की लूट

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की खाट पंचायत में खटिया की जमकर लूटपाट हुई। उत्तर प्रदेश में जमीन तैयार करने के लिए राहुल ने खाट पंचायत शुरू की है। इसके पहले चरण में मंगलवार को देवरिया जिले के रूद्रपुर में राहुल किसानों से मिलने पहुंचे। राहुल का भाषण खत्म होते ही किसान बैठने के लिए लाई गईं खाटों को लेकर चलते बने। कुछ लोगों में खाट को लेकर छिना झपटी भी हुई। टीवी चैनलों के कैमरों में खटिया लूट के दृश्य कैद हुए हैं। पंचायत के दौरान राहुल ने किसानों की समस्याएं सुनीं और राज्य एवं केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं।

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बड़बोलेपन ने बुरा फंसाया

अपने बड़बोलेपन के चलते आखिरकार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुरी तरह फंस गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल से कहा है कि वे संघ rahulपर दिए अपने बयान के लिए या तो माफी मांगें या फिर मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहें। गौरतलब है कि राहुल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि उनके खिलाफ महाराष्ट्र की एक अदालत में चल रहा आपराधिक मानहानि का मामला रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा कि मामले का फैसला मेरिट आधार पर होना चाहिए। अदालत ने राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने के लिए 27 जुलाई तक का समय दिया है।

क्या कहा था
मार्च 2014 को ठाणे में एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने कहा था आरएसएस के लोगों ने गांधीजी की हत्या की और आज उनके लोग (भाजपा) उनकी बात करते हैं उन लोगों ने सरदार पटले और गांधीजी का विरोध किया था। इस बयान को लेकर राहुल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया था।

Rahul के ये आरोप कितने सच

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि उन्हें असम दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं ने मंदिर में नहीं घुसने दिया।  राहुल के इस कथन से केंद्र की भाजपा सरकार को लेकर फिर बयानबाजी शुरू हो गई है। देश को असहिष्णुता से ग्रस्त बताने वालों ने कहना शुरू कर दिया है कि मोदी सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं। कांग्रेस ने सोमवार को केरल, पंजाब और असम के मुद्दे पर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। इस मौके पर Rahul ने कहा कि संघ कार्यकर्ताओं ने महिलाओं को हथियार बनाया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के वहां से चले जाने के बाद वो शाम के वक्त बिना किसी रोक-टोक के मंदिर गए। राहुल ने यह भी कहा कि केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी को उस कार्यक्रम में जाने से रोका जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री भाग लेने वाले हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि चूंकि चांडी केरल की जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिए कार्यक्रम में जाने से रोकना केरल के लोगों का अपमान है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में निर्दोष लोगों को काटा जा रहा है, दलितों को मारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का परिणाम है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आगे कहा कि यह मोदी के काम करने का तरीका है। एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में जाने से रोको, मंदिर जाने से रोको और दलितों को मारो। पूरे देश के लोगों को यह स्वीकार नहीं होगा। सरकार को अपना तरीका बदलना होगा। वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल के इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है।

मंदिर ने नकारा
बारपेटा मंदिर ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। मंदिर प्रमुख वशिष्ठ शर्मा ने कहा कि मैंने खुद 4 घंटे तक कांग्रेस उपाध्यक्ष का द्वार के पास इंतजार किया, वो दूसरे रास्ते रास्ते से आगे निकल गए। मंदिर में उनके प्रवेश पर न तो कोई रोक थी और न ही किसी तरह का प्रदर्शन किया गया।