मिसाल: चाय वाले ने स्कूल को दान दी जमीन

अगर आप समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो जेब नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए। झारखंड में एक चाय वाले ने इस बात को सही साबित कर दिखाया है। schoolधीरन मंडल ने अपनी जमीन School को सिर्फ इसलिए दान दे दी, क्योंकि उन्हें बच्चों का खुले आसमान के नीचे पढऩा गंवारा नहीं था। उत्क्रमित मध्य विद्यालय उदबली के पास खुद की कोई जमीन नहीं है। पहले जब ये प्राथमिक स्कूल था, तब इसके पास दो कमरे थे, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। स्कूल को 2006 में प्राथमिक से मध्य विद्यालय घोषित किया गया था। उस वक्त अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित हुई थी, मगर जमीन नहीं होने के चलते भवन नहीं बन सका। नतीजतन बच्चों को खुले में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इस बारे में धीरन ने कहा, मैं बच्चों को ऐसे पढ़ते नहीं देख सकता था। इसलिए मैंने अपनी जमीन दान देने का फैसला लिया। धीरन मंडल को इस फैसले के लिए रिश्तेदारों का विरोध भी झेलना पड़ा। हालांकि बाद में वे सभी विरोधियों को शिक्षा का महत्व समझाने में सफल रहे। धीरन उसी गांव में चाय बेचते हैं, जहां स्कूल है।

शुरू हुआ काम
जमीन मिलते ही शिक्षा विभाग ने नए सिरे से स्कूल का निर्माण शुरू कर दिया है। धीरन के इस फैसले से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। बच्चे इस बात को लेकर खुश हैं कि अब उन्हें गर्मी या बारिश में खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई नहीं करनी होगी। शिक्षा विभाग ने धीरन का धन्यवाद करते हुए कहा है कि लोगों को उनसे सीख लेनी चाहिए।

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