अनोखी गांधीगिरी का रहा है ये शख्स

सड़क पर कीलें बिछाकर गाड़ियां पंक्चर करने का तरीका काफी पुराना है। पंक्चर रिपेयर करने वाले अक्सर अपनी कमाई बढ़ाने के लिए ऐसा करते हैं। बेंगलुरु निवासी बेनेडिक्ट जेबाकुमार भी कई बार इस साजिश का शिकार हुए। हालांकि उन्होंने समस्या से पीछा
nailhuntछुड़ाने के बजाए कुछ ऐसा किया, जिसके बारे में अधिकतर लोग शायद सोच भी नहीं सकते। बेनेडिक्ट ने आउटर रिंग रोड सहित उन स्थानों पर कीले बीनने का काम शुरू किया, जहां उनकी बाइक अक्सर पंक्चर हो जाया करती थी। साल 2014 से शुरू हुआ उनका ये अभियान आज भी बदस्तूर जारी है।

   बेनेडिक्ट बताते हैं, “बेल्लांदुर स्थित अपने दफ्तर जाने के लिए मैं आउटर रिंग रोड मार्ग चुनता हूं। यहां सिल्क बोर्ड के सामने मेरी बाइक बार बार पंक्चर हो जाया करती थी। पहले मैंने सोचा कि शायद टायर खराब हो गया है, लेकिन बाद में अहसास हुआ कि माजरा कुछ और है। मैंने पाया बाइक पंक्चर करने वाली कीलें एक ही तरह की हैं। इसके बाद मैंने रास्ते से कीलें हटाने का फैसला किया, ताकि प्रशासन को नींद से जगा सकूं”। पेशे से सिस्टम इंजीनियर 44 वर्षीय बेनेडिक्ट पहले नंगे हाथों से कीलें चुनते है, पर अब वे मैग्नेटिक स्टिक का इस्तेमाल करते हैं।

कुछ ऐसा है रूटीन
बकौल बेनेडिक्ट, मैं सुबह सात बजे बनशंकरी स्थित अपने घर से दफ्तर के लिए निकलता हूं और कुछ खास जगह पर रुककर कीलें उठाता हूं। घर वापसी के वक्त भी मेरा रूटीन कुछ ऐसा ही होता है। बेनेडिक्ट ने 2014 में फेसबुक पर माई रोड, माई रिस्पॉन्सिबिलिटी नाम से एक पेज भी बनाया था, जिस पर वे जुटाई गई कीलों की जानकारी देते हैं। अब तक बेनेडिक्ट 37 किला कीलें सड़कों से हटा चुके हैं। वे कहते हैं, मैं अपना अभियान तब तक जारी रखूंगा, जब तक प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता।

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