दम तोड़ रहा था बेजुबान… मिली नई जिंदगी

यूं तो बेजुबानों की मदद के लिए तमाम संस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन अक्सर जरूरत के वक्त कोई काम नहीं आता। या तो ऐसी संस्थाएं खुद को अधिकार क्षेत्र की सीमा में बांध लेती हैं, या फिर उनके पास मदद न करने के तमाम बहाने होते हैं। तस्वीर में दिखाई दे रहा कुत्ता कुछ दिनों पहले आज का खबरी के एक सदस्य को बेहद बुरी अवस्था में मिला। उसकी एक आंख लगभग खराब हो चुकी थी और वो खड़े होने की स्थिति में भी नहीं था। पॉमेरियन नस्ल के इस कुत्ते को उसका मालिक यहां छोड़ गया था,   शायद इसकी वजह कुत्ते की बीमारी रही हो। कुत्ता इस कदर सदमें में था कि उसने भूखा होने के बावजूद कुछ नहीं खाया। इस बारे में एनीमल वेलफेयर के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स फॉर एनीमल्स को जानकारी दी गई, लेकिन उसने खुद सहायता करने के बजाए रेस्क्यू नामक संस्था से संपर्क करने को कहा। पीएफए के पुणे प्रमुख को वॉट्सएप पर कुत्ते की तस्वीर भी भेजी गई, जिसे देखने के बाद शायद उस इंसान का दिल भी पसीज जाता जिसे जानवरों से कोई प्यार नहीं, लेकिन उन्होंने तस्वीर को भी अनदेखा कर दिया।

मिला सहारा
रेस्क्यू संस्था से सीधे संपर्क का कोई साधन नहीं, जब तक ऑनलाइन फॉर्म भरकर, घायल जानवर की फोटो अपलोड करके उन्हें नहीं भेजते, जब तक नहीं मिल सकती। फिर भले ही घायल दम क्यों न तोड़ दे। सब तरफ से निराशा हाथ लगने पर पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका के प्राणी विभाग प्रमुख डॉ गोरे को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। उन्होंने तत्काल पशुसंवर्धन शेती व वन प्रकल्प विकास संस्था से बात की और थोड़ी ही देर में मदद पहुंच गई। कुत्ते को जब अस्पताल पहुंचाया गया तो डॉक्टर भी उसकी हालत देखकर सकते में आ गए।

घर में दिया आसरा
कुत्ते ने कई दिनों से कुछ खाया नहीं था। अगर एक दो दिन वो इसी अवस्था में रहता था, उसकी मौत निश्चित थी। सबसे पहले उसे सलाइन चढ़ाई गईं और फिर आगे का उपचार शुरू किया। लगातार एक हफ्ते देखभाल के बाद कुत्ता अपने पैरों पर खड़ा होने लगा है। उसकी सेहत में तेजी से सुधार आ रहा है। पशुसंवर्धन संस्था के पास कोई शेल्टर नहीं है, इस वजह से संस्था के सुनील और उनकी बहन जयश्री घायल जानवरों को अपने घर में आसरा देते हैं।

मदद की दरकार
पशुसंवर्धन संस्था को उस रेस्क्यू किए गए कुत्ते सहित बाकी जानवरों की देखभाल और इलाज के लिए मदद की दरकार है। आज का खबरी ने कुछ पशु प्रेमियों की मदद से इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया है, लेकिन मदद के दायरे को विस्तृत करने की जरूरत है ताकि बेजुबान जानवरों को जिंदगी थोड़ी आसान बन सके।

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