बदली-बदली नज़र आ रही हैं सड़कें

  • यातायात व्यवस्था: नए-नए प्रयोग कर रहा चर्तुःश्रृंगी ट्रैफिक डिवीज़न

पुणे में ट्रैफिक की समस्या आम है और इससे निपटने के लिए पुलिस नए-नए प्रयोग करती रहती है. कभी किसी मार्ग को वन-वे कर दिया जाता है, तो कभी वन-वे में ढील दे दी जाती है. चर्तुःश्रृंगी डिवीज़न भी बीते कुछ समय से अपने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए नित नए कदम उठा रहा है. हाल ही में यहां प्रमुख सड़कों को नया रूप दिया गया है, साथ ही कई जगहों पर डिवाइडर भी बनाए गए हैं. ख़ास बात यह है कि सीमेंट के मोटे डिवाइडरों के बजाए प्लास्टिक के पतले डिवाइडरों को तवज्जो दी गई है. जिसके चलते बेवजह का जाम नहीं लगता. कुछ वक़्त पहले यूनिवर्सिटी रोड पर लेन सिस्टम निर्धारित किया गया था. हालांकि बीआरटी की वजह, फ़िलहाल वहां के हाल ख़राब हैं.

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चमकीं सड़कें
चर्तुःश्रृंगी डिवीज़न के तहत आने वालीं कई सड़कों पर लेन पेंट की गईं हैं. ताकि चौराहों पर वाहनों की बेवजह होने वाली भगदड़ को कम किया जा सके. पुलिस का कहना है कि इससे वाहन चालकों में अनुशासन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी. एसबी रोड, पत्रकार नगर, बाणेर फटा सहित कई मार्गों पर लेन पेंट की गई हैं. ख़ास बात ये है कि पुलिस के इस कदम को न केवल सराहना मिल रही है बल्कि काफी हद तक वाहन चालक इसका पालन भी कर रहे हैं.

जाम से मुक्ति
औंध रोड पर ब्रेमेन चौक से वाकड जाने वाला मार्ग काफी व्यस्त है. यहां अक्सर जाम जैसे हालात पैदा हो जाते थे. इसकी वजह थी सांगवी और औंध को जोड़ने वाली सड़क से आने वाला ट्रैफिक. दरअसल सांगवी के ब्रिज पर जाम होने की स्थिति में वाहन चालक कनेक्टिंग रोड से सीधे यहां पहुंचते थे और आगे बढ़ने की जल्दबाजी में जाम लग जाता था. जब से इस मार्ग पर डिवाइडर लगाए गए हैं, तब से हालात काफी हद तक सुधार गए हैं.

क्या कहते हैं लोग

आईटी कर्मी अनुज कुलकर्णी ने कहा, डिवाइडर बनने से काफी राहत है. पहले स्थिति ये थी कि कभी भी जाम लग जाता था. मेरी पुलिस से गुजारिश है कि इस पूरी रोड पर जहां तक संभव हो डिवाइडर लगाए जाने चाहिए. डिवाइडर से एक तो बेवजह का जाम नहीं लगता, दूसरा एक दूसरे से आगे निकलने की जल्दबाजी से होने वाले एक्सीडेंट में भी कमी आती है.

बैंक कर्मी अतुल परमार ने कहा, टू-व्हीलर के लिए जिस तरह का लेन सिस्टम यूनिवर्सिटी रोड पर बनाया गया था, उसे बाकी जगहों पर भी अमल में लाया जाना चाहिए. इसके अलावा पुलिस को उन चालकों के खिलाफ कार्रवाई भी करनी चाहिए जो इसका उल्लंघन करते हैं.

प्राइवेट कर्मचारी अर्पणा सिंह ने कहा, लेन पेंट करना अच्छा कदम है. अगर हम सभी इसका पालन करें तो ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति पैदा ही नहीं होगी. यूनिवर्सिटी रोड के बारे में कहना चाहूंगी कि ट्रैफिक सिग्नल काम न करने की स्थिति में पुलिसकर्मी काफी देर तक एक साइड का ट्रैफिक रोक लेते हैं, जिसकी वजह से दूर तक जाम लग जाता है. कभी-कभी तो 10-10 मिनट तक ट्रैफिक रोका जाता है. अधिकारियों को इस पर भी ध्यान देना चाहिए.

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