यूपी को पसंद आ रहे योगी के तेवर

मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस तरह से योगी आदित्यनाथ एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं, उससे यूपी (UP) की जनता खुश है. जनता को विश्वास है कि योगी पांच सालों में प्रदेश का कायाकल्प करने में सफल होंगे. योगी के एजेंडे में कानून व्यवस्था और अवैध बूचड़खाने सबसे ऊपर हैं. कुर्सी पर बैठने के मात्र चंद घंटों में ही उन्होंने इस पर काम शुरू कर दिया है. एक अच्छी बात तो अब तक नज़र आ रही है वो यह है कि योगी अफसरों के ट्रांसफर पर जोर नहीं दे रहे हैं, जैसा कि पूर्व के मुख्यमंत्री करते आए हैं. आज का खबरी ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लोगों से बात की और अधिकांश का यही कहना है कि योगी ने जिस तरह से आगाज़ किया है उससे वो खुश हैं.
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अब नया अभियान
योगी ने अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसने के बाद लड़कियों को परेशान करने वाले रोमियों के खिलाफ अभियान का आगाज़ किया और अब खुले में शराब पीने वालों पर भी पुलिस का कहर टूट रहा है. प्रदेश के अलग-अलग शहरों में वो पुलिस घूम-घूमकर सड़कों पर जाम छलकाने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचा रही है, जिस पर कभी सोते रहने के आरोप लगा करते थे. गौरतलब है कि अपराध में इजाफे की एक बड़ी वजह खुलेआम शराब का सेवन भी है.

गायब हुए अपराधी
यूपी में योगी का सख्त अंदाज़ देखकर ज़्यादातर अपराधी अंडरग्राउंड हो गए हैं. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कुछ वक़्त पहले तक सक्रीय गिरोह के बारे में अब कोई सूचना नहीं है. अपराधियों को डर सता रहा है कि जिस तरह योगी फैसले ले रहे हैं, उससे उनकी जान आफत में पड़ सकती है. सूत्र तो यहां तक कहते हैं कि अन्य सियासी दलों ने भी अपने कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह की गड़बड़ न करने के आदेश दिए हैं.

क्या कहते हैं लोग
आज का खबरी से बातचीत में लोगों के कहा, यूपी को जिस धमाकेदार मुख्यमंत्री की तलाश थी, वो पूरी हो गई है. प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या लचर कानून व्यवस्था है, जिस तरह से योगी ने सख्ती दिखाई है उससे तो यही लगता है कि बढ़ते अपराधों पर लगाम लगेगी. लोगों के माना कि एंटी-रोमियो अभियान से कुछ परेशानी हो सकती है, पर यह आवश्यक कदम था. कुछ राजनीतिक दलों के छोटे-मोटे कार्यकर्ता ही छेड़छाड़ को बढ़ावा देते थे, लेकिन अब उन्हें भी खामोश बैठने पड़ेगा. सीएम से लोगों की यही अपील है कि जो सख्ती वो दिखा रहे हैं वो आगे भी कायम रहे तभी सुधार संभव होगा. बूचड़खाने के मामले पर लोगों की राय कुछ हद तक बंटी हुई है, समुदाय विशेष के कुछ लोगों को जहां लगता है कि इसकी आड़ में उन्हें बेवजह परेशान होना पड़ेगा बाकियों का मानना है कि यह अच्छा कदम है.

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