जानें: Modi से क्या चाहते हैं लोग

narendra modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अब तक का कार्यकाल विदेश यात्राओं के नाम रहा है। उन्होंने एक के बाद एक कई यात्राएं कीं। विदेशी सरजमीं पर मोदी ने भारत को सशक्त, समृद्ध और खुशहाल राष्ट्र के रूप में पेश किया और खूब वाहवाही बटोरी। लेकिन क्या देशवासियों से जिन अच्छे दिनों का वादा Modi ने किया था उसे वे पूरा करते नजर आए? इस बारे में आज का खबरी ने वरिष्ठ पत्रकारों, नेताओं और आम जनता से बात की। साथ ही उनसे जानना चाहा कि 2016 में नरेंद्र मोदी को जनआकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए किन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

कुछ खास नहीं बदला

वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक जागरण के पूर्व संपादक सरोज अवस्थी कहते हैं, “मोदीजी देश के प्रधानमंत्री हैं, ऐसे में विदेश यात्राएं स्वभाविक हैं। जहां तक बात इन यात्राओं से भारत को होने वाले फायदे की है तो यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल तो केवल इतना ही नजर आ रहा है awastiकि इन यात्राओं ने मोदीजी को दुनिया भर में एक ब्रांड बना दिया है। हर तरफ मोदी ही मोदी छाए हुए हैं। अगर जनता से किए गए वादों की बात करें तो वो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। आम आदमी की सबसे बड़ी समस्या क्या है, महंगाई। संप्रग सरकार के कार्यकाल में भी जनता इससे परेशान थी और आज भी है। महंगाई पर बड़ी-बड़ी बातें जरूर की गईं, लेकिन उसे कम करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास नहीं हुए। इसके अलावा और भी कई मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र सरकार की भूमिका कुछ अटपटी रही। मसलन, बीच में एक खबर आई थी कि रूस भारत में न्यूक्लियर प्लांट लगाना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही हमें यूरेनियम देने को तैयार है। ऐसे में गाड़ी कहां अटक रही है, समझना मुश्किल है”।

सरोज अवस्थी के मुताबिक, इस साल मोदीजी को विशेषकर उन मुद्दों ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनके सहारे वे सत्ता में आए। जैसे महंगाई, रोजगार और विकास। आम जनता को इससे को ई फर्क नहीं पड़ता कि जीएसटी लागू होगा या नहीं, उसे केवल इतना ही चाहिए कि उसकी थाली खाली न रहे। मेरा मानना है कि सरकार को अब आपस के झगड़े सुलझाकर विकास पर ध्यान देना चाहिए। हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का उदाहरण ले सकते हैं। उन्हें अब यह समझ आ गया है कि जनता क्या चाहती है, इसलिए उनका पूरा फोकस मेट्रो, फ्लाईओवर, सड़क, बिजली, पानी पर है। मोदी सरकार को भी जनआकांक्षाओं को समझना चाहिए।

उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

पुणे कांग्रेस नेता रमेश धर्मावत मानते हैं कि मोदी सरकार अब तक जनता की अपेकक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। धर्मावत कहते हैं, “आज हर कोई पूछ रहा है कि अच्छे दिन कहां हैं। फिर चाहे वह आम आदमी हो या व्यापारी वर्ग। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में व्यापारियों की समस्या इतनी बढ़ गई है dharmavatकि उनके लिए मुनाफा कमाना तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अगर मैं महाराष्ट्र की बात करूं तो यहां भी लोग भाजपा-शिवसेना सरकार के वादों के पूरा होने की बांट जोह रहे हैं”। धर्मावत नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को सही करार देते हैं। उनका कहना है, “अगर हमें विदेशी निवेश चाहिए तो उसके लिए यात्राएं करनी होंगी। लेकिन यात्राओं का फायदा क्या मिला ये देखना भी जरूरी है। मोदी सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में अब तक तो ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि उनके विदेश दौरे भारत के लिहाज से सार्थक रहे”।

कांग्रेस नेता की नजर में केंद्र सरकार को 2016 में कॉमन मैन के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। वे कहते हैं, “सरकार यदि जीएसटी लाना चाहती है तो ठीक है, लेकिन उसकी दर कम होनी चाहिए। अगर वैट और सर्विस टैक्स से ज्यादा दर रहेगी तो कैसे चलेगा। जरा सोचिए जीएसटी 24-25 प्रतिशत हुई तो वस्तुएं के दाम कहां जाएंगे। मेरा मानना है कि इसकी दर 15-16 प्रतिशत तक रहनी चाहिए, ताकि किसी पर ज्यादा भार न पड़े। सरकार अगर कर नीति में बदलाव कर व्यापारियों को छूट देती है तो काफी अच्छा रहेगा। कुल मिलाकर मैं बस यही कहना चाहूंगा कि सरकार जो भी फैसले ले उसमें आम आदमी का हित झलकना चाहिए”।

टीम को भी मोदी बनना होगा
समाचार4मीडिया के एडिटोरियल हेड अभिषेक मेहरोत्रा कहते हैं, “नरेंद्र मोदी के आने के बाद देश में विकास की काफी बातें हो रही हैं। उन्होंने लोगों abhishekके मन में विकास की भावना जागृत की है, इसे सरकार की उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि विकास बातों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वैसे इसकी एक वजह यह भी है कि मोदी की टीम उनकी तरह प्रभावशाली नहीं है। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक जो काम किया, उससे लोग काफी प्रभावित हैं, मगर उनकी टीम के बाकी सदस्य अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाए। अकेले मोदी देश नहीं चला सकते, यह एक टीम वर्क है और जब तक पूरी टीम संतुलित नहीं होगी विकास रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा”।

अभिषेक के मुताबिक, 2016 में भाजपा को सबसे पहला काम यही करना चाहिए कि टीम मोदी को मोदी बनाने का प्रयास हो। इसके अलावा सरकार को आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि इन्हीं के बूते भाजपा सत्ता में आई है। अभिषेक कहते हैं, मोदी के अंतरराष्ट्रीय दौरों से भारत को फायदा हो रहा है, लेकिन आम आदमी को इसकी खुश तभी होगी जब उसकी समस्या पर भी गौर फरमाया जाए। पिछले डेढ़ सालों में प्रत्यक्ष तौर पर महंगाई घटी है, यह मानना मुश्किल है। चाहे दाल हो या सब्जी सब के भाव ऊपर की ओर भाग रहे हैं। एक और महत्वपूर्ण मुद्दा जिस पर मोदी को ध्यान देने की जरूरत है, वो है भ्रष्टाचार। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कही थी, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट। अरुण जेटली का नाम भ्रष्टाचार से जुड़ते ही पार्टी और मोदी की नीतियां बदल गईं, ऐसा नहीं होना चाहिए।

विदेश कम जाते तो अच्छा होता
सरकारी कर्मचारी एनआर श्रीधर का नजरिया मोदी सरकार को लेकर सकारात्मक है। वे कहते हैं, “इतनी जल्दी सरकार के कार्यकाल पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते। डेढ़ साल का वक्त सरकार चलाने के लिहाज से ज्यादा नहीं है। नरेंद्र मोदी ने कई अच्छे फैसले लिए हैं, और एक अच्छी सोच के sridharसाथ आगे बढ़ रहे हैं”। हालांकि श्रीधर मानते हैं कि महंगाई के मुद्दे पर मोदी कुछ खास नहीं कर पाए हैं। वे कहते हैं, “आम आदमी के लिए खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम अब भी समस्या बने हुए हैं और जब तक इसका हल नहीं तलाशा जाता, उसके लिए अच्छे दिन सपना ही बने रहेंगे”। श्रीधर उन लोगों में शामिल हैं जो मानते हैं कि मोदी पिछले साल अपने विदेश दौरों में कटौती करके देश पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे। वे कहते हैं, “प्रधानमंत्री के लिए विदेश यात्राएं जरूरी हैं इसमें कोई दोराय नहीं। लेकिन अगर पीएम उन्हे थोड़ा कम करते तो शायद ज्यादा अच्छा लगता”। कॉमन मैन के नाते श्रीधर कहते हैं, “सरकार को इस साल महंगाई कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बेकार के विवादों में पडऩे के बजाए मोदी और सरकार का केवल एक ही एजेंडा होना चाहिए, आवाम की उम्मीदों पर खरा उतरना”।

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