रसगुल्ले को किसने जन्म दिया? Row on Rasgulla

रसगुल्ले (Rasgulla) का स्वाद चखने से पहले आप भले ही ये न सोचते हों कि इसका जन्मदाता कौन है, लेकिन ऐसा सोचने वालों ने इसे विवाद की वजह बना दिया है। ओडिशा का दावा है कि रसगुल्ला उसकी देन है, जबकि सालों से अधिकर लोग यही सुनते आ रहे हैं कि मुंह में मिठास घोलने वाली इस मिठाई को कोलकाता ने दुनिया के सामने पेश किया। इस अजीबों-गरीब विवाद की शुरुआतrasgullas1 17 जुलाई को पुरी में समाप्त हुई रथयात्रा के बाद हुई। प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) से जुड़े शोधकर्ता सूर्यनारायण रथ शर्मा ने दावा पेश किया कि रसगुल्ले को पुरा ने इजाद किया। जगन्नाथ ने लक्ष्मी को प्रसाद स्वरूप रसगुल्ला दिया था, तब से हर साल भगवान को इसका भोग लगाया जाता है। मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) लक्ष्मीधर पूजापंडा कहते हैं, 12वीं सदी में जब जगन्नाथ मंदिर अस्तित्व में आया, तभी से रसगुल्ला रथयात्रा की धार्मिक रीतियों का हिस्सा बनता आ रहा है। हालांकि बंगाल से ताल्लुक रखने वाले कई जानकार (West Bengal based food historians) मानते हैं कि रसगुल्ले को 1868 में कोलकाता के नोबिन चंद्रादास ने इजाद किया था। बाद में उनके बेटे केसी दास के नाम से स्वीट चेन शुरू की। नोबिन चंद्रादास के पढ़पोते (Great-Great Grandson) अनमिख रॉय का कहना है, अगर ओडिशा रसगुल्ला के लिए जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication-GI) की बात कर रहा है तो हम भी रसगुल्ला की पहचान बचाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। धार्मिक गाथाओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ ने नाराज लक्ष्मी को मनाने के लिए उन्हें रसगुल्ला पेश किया था। लक्ष्मी इस बात से नाराज थीं कि भगवान जगन्नाथ, उनकी सहमति के बिना नौदिवसीय रथयात्रा पर चले गए थे। बहरहाल, जिस तरह से दोनों पक्ष अपने-अपने दावे के संबंध में तर्क पेश कर रहे हैं, उसे देखकर ये कहना मुश्किल है कि इस विवाद का कोई हल निकलेगा। लिहाजा बेहतर यही होगा कि आप इस बेकार की बहस में पड़े बिना, रसगुल्ले की मिठास से अपना मुंह मीठा करते रहें।

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