लापरवाही के ऑडिट में बहा पुल!

मुंबई से गोवा को जोड़ने वाला पुल मंगलवार देर रात गिर गया। जिसके चलते राज्य परिवहन निगम की दो बसों सहित कई वाहन उफनती सावित्री नदी में बह गए। इन बसों में 30 से ज्यादा लोग सवार बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी इस बात का सही पता लगाना mumbai-goa bridgeबेहद मुश्किल है कि कुल कितने वाहन बहे, क्योंकि घटना के वक्त चारों ओर अंधेरा था। घटना की खबर मिलते ही पुणे से एनडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। मुंबई गोवा हाईवे पर स्थित महाड के पास सावित्री नदी पर बना यह पुल लगभग 88 साल पुराना था। इसे अंग्रेजों ने तैयार करवाया था। इसी पुल के समानंतर एक नया पुल भी बनाया गया है, जिससे भी वाहन गुजरते हैं।
ये कैसा ऑडिट
इस दुर्घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली की पोल भी खोल दी है। पुल का इसी साल मई में ऑडिट करवाया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में पुल को एकदम फिट करार दिया गया था। बावजूद इसके पुल सावित्री नदी में ताश के पत्तों की तरह बह गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने पुराने पुल को मूसलाधार बारिश के मौसम में यातायात के लिए बंद क्यों नहीं किया गया। अगर पुल पर बड़े, भारी वाहनों की आवाजाही बंद की गई होती तो शायद हादसे से बचा जा सकता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुल काफी पुराना था और इस वजह उसमें कहीं कहीं दरारें भी उभर आई थीं। नया पुल बनने से इसका भार थोड़ा कम जरूर हुआ था, मगर भारी बारिश के चलते पुल इतना कमजोर हो गया कि वाहनों का बोझ नहीं सह सका।

अब खुली नींद
मुंबई सहित देश को हिलाने वाले इस घटना के बाद राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस की नींद खुल गई है। मुख्यमंत्री ने पीडब्लूडी विभाग को सभी पुल, नालों का ऑडिट करने का आदेश दिया है। सामान्य तौर पर बारिश आदि के मौसम में पुराने पुलों की दुरुतगी की जांच कराई जाती है, लेकिन ये जांच कैसी होती है इसका अंदाजा सावित्री नदी पर बने पुल से लगाया जा सकता है। यदि बारिश और सावित्री नदी के बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अमले ने पुल की जांच की होती तो शायद हादसे को टाला जा सकता था।

दो शव बरामद
राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ के अलावा, कोस्ट गार्ड का चेतक और वायुसेना का एमआई17 हेलीकॉप्टर भी जुटा हुआ है। देर शाम तक दो लोगों के शव बरामद कर लिए गए थे। सावित्री नदी में आई बाढ़ और बारिश के चलते बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। मुख्यमंत्री पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। वहीं प्रधानमंत्री ने भी घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता की पेशकश की है।

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