ऐसा क्या हुआ कि जज को जेल भेजना पड़ा?

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सी एस करनन (CS Karnan) को  6 महीने कैद की सजा सुनाई है. भारत के इतिहास में यह पहला मामला है जब किसी वर्तमान जज के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई की गई है. कोर्ट ने जस्टिस करनन को अवमानना का दोषी करार दिया है. आखिर उन्होंने ऐसा क्या किया था? आइए विस्तार से समझते हैं.

जस्टिस करनन और सुप्रीम कोर्ट के बीच विवाद की शुरुआत पिछले महीने तब हुई, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर शीर्ष न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. जस्टिस करनन ने इस संबंध में पीएम को 20 जजों की सूची दी. जब जस्टिस करनन की चिट्ठियों का सिलसिला बढ़ने लगा तो सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: सज्ञान लिया. कोर्ट ने जस्टिस से इस बाबत स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. अदालत ने जस्टिस करनन से बिना शर्त माफ़ी मांगने और चिट्ठियां वापस लेने को कहा, मगर जस्टिस करनन पेश नहीं हुए. इसके बाद उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू हुई.

पुराना नाता
जस्टिस करनन का विवादों से पुराना नाता रहा है. मद्रास हाईकोर्ट से जब उनका कोलकाता तबादला हुआ तो उन्होंने खुद ही इस पर रोक लगा दी. इतना ही नहीं उन्होंने अपने चीफ जस्टिस को ही नोटिस जारी कर डाला. मामला बिगड़ते देख सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और फरवरी 2016 के बाद उनके दिए हुए सभी निर्देशों पर रोक लगा दी गई. जब राष्ट्रपति ने जस्टिस करनन को निर्देश दिया, तब कहीं जाकर उन्होंने कोलकाता में पदभार संभाला. जस्टिस करनन तब भी विवादों में घिर गए थे जब उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि दो वयस्कों के बीच यदि शारीरिक संबंध हो तो उन्हें पति-पत्नी के रूप में देखा जाना चाहिए.

दलित होने का तर्क
जस्टिस करनन शुरू से यह कहते आ रहे हैं कि दलित होने के चलते उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. मद्रास हाईकोर्ट का जज रहते हुए जस्टिस करनन ने साथी जजों पर गाली देने का आरोप लगाया था. उन्होंने संबंधित जजों के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति के राष्ट्रीय आयोग में भी शिकायत की थी.

इंकार पर इंकार
एक मई को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन की दिमागी हालत की जाँच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था, मगर जस्टिस करनन ने जांच नहीं होने दी. उन्होंने कहा कि मेरा काम मुझे वापस नहीं दिया गया तो वो कोर्ट में हाज़िर नहीं होंगे. चाहे इसके लिए मुझे जेल भी क्यों न भेज दिया जाए.  अवमानना के लिए जब कोर्ट ने जस्टिस करनन के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया तो उन्होंने इसे भी मनाने से इंकार कर दिया.

देश को हिला दिया
जेल भेजे जाने से एक दिन पहले जस्टिस करनन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और सात अन्य जजों के खिलाफ समान जारी करते हुए अपनी अदालत में पेश होने का आदेश देकर देश को हिला दिया था. जस्टिस करनन ने अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के उल्लंघन के आरोपों के तहत यह फैसला सुनाया था. इसके बाद उन्होंने सातों जजों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश भी दिए थे. मामले को इतना आगे बढ़ते देख सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन को 6 महीने जेल भेजने का निर्णय लिया.

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