तुर्की क्यों है आतंकी निशाने पर?

तुर्की क्यों है आतंकी निशाने पर?

इंस्ताबुल के अतातुर्क हवाई अड्डे पर बीते दिनों हुआ हमला तुर्की के लिए नया नहीं है। पिछले दो सालों में तुर्की ऐसे कई हमलों का गवाह बन चुका है। सात जून को इंस्ताबुल में हुए कार बम धमाके में सात पुलिसकर्मियों 11 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 13 turkey-blastऔर 19 मार्च को हुए धमाकों में 38 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसी तरह फरवरी, जनवरी, पिछले साल दिसंबर, अक्टूबर और जुलाई में भी कई आतंकवादी घटनाएं turkey की जमीं पर हुई थीं। तुर्की में लगातार हो रहे हमलों की दोहरी वजह है। या ये कहें कि तुर्की दो तरफ से मार झेल रहा है।

     आंतरिक तौर पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी यानी पीकेके उसे खोखला कर रहा है और बाहर से चरमपंथी संगठन आईएएस। 2015 में अंकारा रेलवे स्टेशन पर हुए जिस हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, उसमें आईएएस का हाथ था। हाल फिलहाल की वारदातों को छोड़ दे तो तुर्की में ज्यादातर आतंकी घटनाएं देश के पूर्वी और दक्षिण पूर्वी कुर्द इलाकों में हुईं। वहां पीकेके के खिलाफ तुर्की सेना कई दशकों से संघर्ष कर रही है।

दहशत का साया
पीकेके के साथ सरकार के दो साल के युद्ध विराम ने तुर्की और कुर्द विद्रोहियों के बीच के विवाद को काफी हद तक शांत कर दिया था। लेकिन जुलाई 2015 में युद्ध विराम खत्म होने के बाद हालात फिर बिगड़ने लगे। इसके बाद से सीरिया संकट भी तुर्की की चौखट तक पहुंच गया। पीकेके का आरोप है कि तुर्की आईएस लड़ाकों की मदद से सीरिया और इराक में कुर्द चरमपंथियों को रोकने की कोशिश कर रहा है। हालांकि तुर्की सरकार इन आरोपों से इंकार करती रही है। आरोपों में सच्चाई है या नहीं, ये अलग बात है। फिलहाल तो तुर्की की जनता पीकेके और आईएएस की दहशत का सामना कर रही है।

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